क्या भागलपुर कृषि विश्वविद्यालय ने पांच स्टार्टअप्स के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए?
सारांश
Key Takeaways
- बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने पांच कृषि-आधारित स्टार्टअप्स के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
- इन स्टार्टअप्स को 50 लाख रुपए की वित्तीय सहायता दी जाएगी।
- इस पहल का उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि और रोजगार सृजन करना है।
- सबौर एग्री इनक्यूबेटर पूर्वी भारत के अग्रणी कृषि इन्क्यूबेशन केंद्रों में से एक है।
- बिहार कृषि विश्वविद्यालय युवा उद्यमियों को तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है।
भागलपुर, 12 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के भागलपुर स्थित सबौर कृषि विश्वविद्यालय के अधीन संचालित सबौर एग्री इनक्यूबेटर ने सोमवार को कृषि नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सफलता के रूप में पांच कृषि-आधारित स्टार्टअप्स के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इन स्टार्टअप्स को राष्ट्रीय कृषि विकास योजना 'रफ्तार' के तहत 50 लाख रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान की गई, जिसमें से 32.50 लाख रुपए की पहली किस्त जारी की जाएगी।
यह समझौता ज्ञापन बिहार कृषि विश्वविद्यालय की ओर से सबौर एग्री इनक्यूबेटर के परियोजना अन्वेषक सह नोडल अधिकारी, डॉ. अनिल कुमार सिंह द्वारा और पांचों स्टार्टअप्स के सह-संस्थापकों द्वारा हस्ताक्षरित किया गया। चयनित स्टार्टअप्स डेयरी, ऑर्गेनिक उत्पाद, ड्रायर तकनीक और आधुनिक एग्री-टेक नवाचार के क्षेत्रों में कार्यरत हैं, जिनका उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि, मूल्य संवर्धन, रोजगार सृजन और बाजार से सीधा जुड़ाव सुनिश्चित करना है।
इस अवसर पर बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डीआर सिंह ने कहा, "यह समझौता ज्ञापन बिहार में कृषि-आधारित स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूती देने वाला एक महत्वपूर्ण कदम है। सबौर एग्री इनक्यूबेटर और राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के सहयोग से नवाचार, उद्यमिता और कृषि विकास को एकीकृत रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है। ये स्टार्टअप्स किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ बिहार को कृषि नवाचार के राष्ट्रीय मानचित्र पर नई पहचान दिलाएंगे।"
उन्होंने आगे कहा कि विश्वविद्यालय शोध, तकनीक, मेंटरशिप और अधोसंरचना उपलब्ध कराकर युवा उद्यमियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।
वहीं, निदेशक शोध एवं एग्री इनक्यूबेटर के नोडल अधिकारी डॉ. अनिल कुमार सिंह ने कहा कि यह पहल बिहार की कृषि अर्थव्यवस्था को तकनीक-सक्षम, उद्यमशील और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है, जिससे किसानों, युवाओं और ग्रामीण उद्यमियों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
कार्यक्रम के दौरान यह भी बताया गया कि सबौर एग्री इनक्यूबेटर पूर्वी भारत के अग्रणी कृषि इन्क्यूबेशन केंद्रों में शामिल हो चुका है, जहां स्टार्टअप्स को तकनीकी मार्गदर्शन, वित्तीय सहायता, बाजार संपर्क और नीति समर्थन उपलब्ध कराया जा रहा है।