बिहार कृषि विश्वविद्यालय में कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने किया कई परियोजनाओं का उद्घाटन, 25% भूमि पर प्राकृतिक खेती का आह्वान
सारांश
मुख्य बातें
बिहार सरकार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने 20 जून 2026 को बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर, भागलपुर में अनेक परियोजनाओं और अनुसंधान सुविधाओं का उद्घाटन किया। विश्वविद्यालय की 31वीं शोध परिषद बैठक में वैज्ञानिकों और किसानों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अनुसंधान पूरी तरह किसानोपयोगी होना चाहिए और किसानों से अपनी कम से कम 25 प्रतिशत भूमि पर प्राकृतिक खेती अपनाने का आग्रह किया।
उद्घाटन कार्यक्रम का आगाज़
मंत्री ने अपने दौरे की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर चल रहे अभियान 'एक पेड़ मां के नाम' के तहत सिंदूर के पौधे लगाकर की। इसके बाद उन्होंने विश्वविद्यालय की विस्तारित मधु प्रसंस्करण इकाई का उद्घाटन किया, जिसकी शहद प्रसंस्करण क्षमता अब 2 क्विंटल से बढ़कर 6 क्विंटल प्रति छह घंटे हो गई है — यानी तीन गुना वृद्धि।
नई तकनीकी सुविधाएँ
मंत्री ने स्वचालित शहद फिलिंग प्रणाली का भी शुभारंभ किया, जिसमें बॉटलिंग, कैपिंग, सीलिंग और लेबलिंग की पूरी प्रक्रिया बिना मानवीय हस्तक्षेप के संपन्न होगी। इससे उत्पाद की गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा मानकों में उल्लेखनीय सुधार अपेक्षित है। इसके अतिरिक्त, अत्याधुनिक आणविक पादप रोग प्रयोगशाला का भी उद्घाटन किया गया, जो पादप रोगों की वैज्ञानिक जाँच एवं अनुसंधान को नई दिशा देगी।
मंत्री ने कृषि विज्ञान केंद्र, कटिहार में स्थित सामुदायिक रेडियो स्टेशन का वर्चुअल उद्घाटन भी किया। यह रेडियो स्टेशन 20 किलोमीटर के दायरे में लगभग 8 लाख लोगों तक कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और जन-जागरूकता से जुड़े कार्यक्रमों का प्रसारण करेगा। इस नए स्टेशन के जुड़ने से बीएयू के अंतर्गत संचालित सामुदायिक रेडियो स्टेशनों की कुल संख्या चार हो गई है।
किसानों को संदेश और शोध की दिशा
31वीं शोध परिषद बैठक में सिन्हा ने कहा कि स्थापना के मात्र 15 वर्षों में बिहार कृषि विश्वविद्यालय ने राज्य की कृषि प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने वैज्ञानिकों से आग्रह किया कि शोध और नवाचार किसानों तक पहुँचें तथा उनकी खेती की लागत और मेहनत को कम करें। गौरतलब है कि उन्होंने अलनीनो जैसी जलवायु चुनौतियों से निपटने वाली किस्मों और तकनीकों के विकास पर विशेष जोर दिया, और छोटे एवं सीमांत किसानों की जरूरतों के अनुरूप अनुसंधान करने की आवश्यकता रेखांकित की।
रसायनों के संतुलित उपयोग और जहर मुक्त खेती को समय की माँग बताते हुए मंत्री ने किसानों से कम से कम 25 प्रतिशत भूमि पर प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान किया। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों पर बहस तेज हो रही है।
कुलपति के प्रस्ताव
इस अवसर पर कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने कृषि मंत्री के समक्ष कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे — जिनमें जलवायु परिवर्तन एवं सिंदूर फसल पर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, कृषि आधारित एआई लैब, राज्य स्तरीय समन्वय समिति तथा पटना जिले में अतिरिक्त कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना शामिल हैं।
पीएम किसान सम्मान निधि उत्सव
विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित पीएम किसान सम्मान निधि उत्सव में 700 से अधिक किसानों ने भाग लिया और किसान सम्मान निधि वितरण कार्यक्रम से वर्चुअल रूप से जुड़े। आने वाले समय में विश्वविद्यालय के प्रस्तावों पर सरकारी निर्णय और नई एआई लैब की स्थापना बिहार की कृषि अनुसंधान क्षमता को और सुदृढ़ कर सकती है।