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बिहार कृषि मंत्री विजय सिन्हा का 'खेत बचाओ अभियान' में किसानों से आह्वान: 25% भूमि पर प्राकृतिक खेती अपनाएँ

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बिहार कृषि मंत्री विजय सिन्हा का 'खेत बचाओ अभियान' में किसानों से आह्वान: 25% भूमि पर प्राकृतिक खेती अपनाएँ

सारांश

बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने गया में 'खेत बचाओ अभियान' के तहत किसानों से 25% भूमि पर प्राकृतिक खेती अपनाने, मिट्टी जाँच कराने और एल-नीनो के मद्देनज़र धान की सीधी बुआई को प्राथमिकता देने का आह्वान किया। 14 प्रखंडों में कोल्ड स्टोरेज और प्रसंस्करण इकाइयाँ भी प्रस्तावित हैं।

मुख्य बातें

बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने 18 जून 2026 को कृषि विज्ञान केंद्र, मानपुर, गया में 'खेत बचाओ अभियान' को संबोधित किया।
किसानों से कम से कम 25 प्रतिशत भूमि पर प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील; रासायनिक खेती को कैंसर जैसी बीमारियों से जोड़ा।
एल-नीनो के कारण कम वर्षा की आशंका; धान की सीधी बुआई तकनीक अपनाने पर जोर।
जीवामृत, बीजामृत, नीमास्त्र और आच्छादन जैसी तकनीकों को प्रोत्साहन; प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को सम्मानित करने का आश्वासन।
जिले के 14 प्रखंडों में सब्जी प्रसंस्करण इकाइयाँ और कोल्ड स्टोरेज स्थापित किए जाने की घोषणा।
एग्री स्टैक योजना के तहत फार्मर आईडी बनवाने और भूमि अभिलेख परिमार्जन की अपील।

बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने 18 जून 2026 को कृषि विज्ञान केंद्र, मानपुर, गया में आयोजित 'खेत बचाओ अभियान-सह-कृषि जन कल्याण चौपाल एवं संवाद' कार्यक्रम में प्रदेश के किसानों से कम से कम 25 प्रतिशत भूमि पर प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की। उन्होंने रासायनिक खेती के बढ़ते दुष्प्रभावों को कैंसर सहित गंभीर बीमारियों की बड़ी वजह बताया और मृदा स्वास्थ्य को बचाने के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया।

मृदा स्वास्थ्य और संतुलित उर्वरक पर जोर

मंत्री सिन्हा ने किसानों से नियमित रूप से मिट्टी की जाँच कराने और मृदा स्वास्थ्य कार्ड की अनुशंसाओं के आधार पर संतुलित उर्वरक का उपयोग करने की बात कही। उनके अनुसार, इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनी रहेगी, खेती की लागत में कमी आएगी और उत्पादन में वृद्धि होगी। यह सलाह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब बिहार के कई जिलों में अत्यधिक रासायनिक उपयोग से भूमि की गुणवत्ता में गिरावट दर्ज की जा रही है।

एल-नीनो की चेतावनी और धान की सीधी बुआई

कृषि मंत्री ने मौसम परिवर्तन पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस वर्ष एल-नीनो के प्रभाव के कारण सामान्य से कम वर्षा होने का अनुमान है। ऐसी स्थिति में उन्होंने किसानों को धान की सीधी बुआई जैसी जल-संरक्षण तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसानों को इस पद्धति का प्रशिक्षण दिया जाए और जो किसान पहले से इसे अपना चुके हैं, उनके खेतों का भ्रमण कराकर अन्य किसानों को इसके लाभों से परिचित कराया जाए।

प्राकृतिक खेती की तकनीकें और पर्यावरण संरक्षण

सिन्हा ने जीवामृत, बीजामृत, नीमास्त्र और आच्छादन जैसी प्राकृतिक खेती की तकनीकों के उपयोग पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि इन विधियों से न केवल पर्यावरण संरक्षण होगा, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा। प्राकृतिक खेती को अपनाने वाले किसानों को सम्मानित करने का आश्वासन भी उन्होंने दिया।

एग्री स्टैक और किसान आईडी की अपील

कृषि मंत्री ने किसानों से एग्री स्टैक योजना के तहत फार्मर आईडी बनवाने की अपील की। साथ ही, भूमि अभिलेखों में किसी प्रकार की त्रुटि होने पर सहयोग-सह-जन कल्याण शिविरों में आवेदन कर परिमार्जन कराने का सुझाव दिया। गौरतलब है कि यह पहल किसानों को डिजिटल कृषि पारिस्थितिकी तंत्र से जोड़ने की केंद्र और राज्य सरकार की साझा कोशिश का हिस्सा है।

स्थानीय प्रतिनिधियों की भागीदारी और आगे की राह

इस अवसर पर वजीरगंज विधायक बीरेन्द्र सिंह ने सार्वजनिक रूप से अपनी 25 प्रतिशत भूमि पर प्राकृतिक खेती करने का संकल्प लिया — जो एक उल्लेखनीय राजनीतिक प्रतिबद्धता है। वहीं, जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर ने बताया कि जिले के 14 प्रखंडों में सब्जी प्रसंस्करण इकाइयों और कोल्ड स्टोरेज की स्थापना की जा रही है, जिससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा। इन घोषणाओं का क्रियान्वयन ही तय करेगा कि 'खेत बचाओ अभियान' केवल एक चौपाल तक सीमित रहता है या ज़मीनी बदलाव लाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 25% भूमि पर प्राकृतिक खेती का लक्ष्य तब तक महज एक नारा बना रहेगा जब तक किसानों को बाज़ार मूल्य की गारंटी और तकनीकी सहायता नहीं मिलती। बिहार में छोटे और सीमांत किसानों की बड़ी संख्या को देखते हुए, जीवामृत जैसी तकनीकों के प्रशिक्षण का विस्तार ज़रूरी है — केवल चौपाल-स्तरीय प्रदर्शन पर्याप्त नहीं। 14 प्रखंडों में कोल्ड स्टोरेज और प्रसंस्करण इकाइयों की घोषणा स्वागतयोग्य है, पर अतीत में ऐसी घोषणाएँ क्रियान्वयन में पिछड़ती रही हैं — इस बार जवाबदेही का ढाँचा स्पष्ट होना चाहिए।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'खेत बचाओ अभियान' बिहार में क्या है?
'खेत बचाओ अभियान-सह-कृषि जन कल्याण चौपाल एवं संवाद' बिहार सरकार का एक कृषि जागरूकता कार्यक्रम है, जो किसानों को प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य और आधुनिक तकनीकों से जोड़ने के लिए आयोजित किया जाता है। 18 जून 2026 को गया के कृषि विज्ञान केंद्र, मानपुर में इसका आयोजन हुआ।
बिहार के कृषि मंत्री ने किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए क्यों प्रेरित किया?
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि रासायनिक खेती के बढ़ते दुष्प्रभावों के कारण कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियाँ बढ़ रही हैं और मिट्टी की उर्वरा शक्ति घट रही है। इसीलिए उन्होंने कम से कम 25 प्रतिशत भूमि पर प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की।
एल-नीनो का बिहार की खेती पर क्या असर पड़ेगा?
कृषि मंत्री के अनुसार, इस वर्ष एल-नीनो के प्रभाव के कारण सामान्य से कम वर्षा होने का अनुमान है। इसके मद्देनज़र किसानों को धान की सीधी बुआई जैसी जल-संरक्षण तकनीकों को अपनाने की सलाह दी गई है।
गया जिले में किसानों के लिए कौन-सी नई सुविधाएँ आने वाली हैं?
जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर ने बताया कि गया जिले के 14 प्रखंडों में सब्जी प्रसंस्करण इकाइयों और कोल्ड स्टोरेज की स्थापना की जा रही है। इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर बाज़ार मूल्य मिल सकेगा।
एग्री स्टैक योजना के तहत फार्मर आईडी क्यों ज़रूरी है?
एग्री स्टैक योजना के तहत फार्मर आईडी किसानों को सरकारी योजनाओं, सब्सिडी और डिजिटल कृषि सेवाओं से सीधे जोड़ती है। कृषि मंत्री ने सभी किसानों से यह आईडी बनवाने और भूमि अभिलेखों में त्रुटि होने पर जन कल्याण शिविरों में आवेदन करने की अपील की।
राष्ट्र प्रेस
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