अल नीनो से खरीफ बुवाई में 91.95 लाख हेक्टेयर का अंतर, शिवराज सिंह चौहान बोले — रणनीति तैयार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 8 जुलाई को नई दिल्ली में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद स्पष्ट किया कि अल नीनो के संभावित प्रभाव से उत्पन्न मानसून की अनिश्चितता के बावजूद केंद्र सरकार पूरी तरह सतर्क है और ठोस कदम उठाए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि जून में 33 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई थी, जो जुलाई में घटकर 24 प्रतिशत की कमी पर आ गई है।
बुवाई की स्थिति और फसलों पर असर
चौहान ने बताया कि अभी तक देश में 350.85 लाख हेक्टेयर में खरीफ बुवाई हो चुकी है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 91.95 लाख हेक्टेयर कम है। मानसून में देरी का सर्वाधिक असर सोयाबीन और कपास की फसलों पर पड़ा है। इससे निपटने के लिए किसानों को मक्का, बाजरा और मूंग जैसी कम अवधि एवं कम सिंचाई वाली फसलों की बुवाई की सलाह दी गई है।
हाल के दिनों में देश के अनेक हिस्सों में हुई अच्छी बारिश के चलते कम वर्षा वाले जिलों की संख्या 262 से घटकर 178 रह गई है। उम्मीद जताई जा रही है कि जुलाई में वर्षा की गति और तेज होगी, जिससे बुवाई में आई कमी को काफी हद तक पूरा किया जा सकेगा।
विशेष निगरानी में कौन-से राज्य
चौहान ने बताया कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पंजाब, पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे राज्यों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। इन राज्यों में अल-नीनो मॉनिटरिंग सेल, क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप और राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम के माध्यम से मानसून, बुवाई, फसल और बाजार की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
सरकार की अग्रिम तैयारी और कंटिंजेंसी प्लान
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने इस चुनौती के लिए अप्रैल से ही तैयारी शुरू कर दी थी। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के सहयोग से संभावित रूप से प्रभावित जिलों के लिए कंटिंजेंसी प्लान तैयार कर राज्यों के साथ साझा किए गए हैं। जून महीने में चलाए गए 'खेत बचाओ अभियान' के अंतर्गत 1.24 लाख से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए और 80 लाख से अधिक किसानों तक सीधे पहुँच बनाई गई।
बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 1.75 लाख क्विंटल का राष्ट्रीय बीज भंडार तैयार रखा गया है। किसान क्रेडिट कार्ड अभियान के तहत 30 जून तक प्राप्त 1.14 लाख आवेदनों में से 94 हजार से अधिक को स्वीकृति दी जा चुकी है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की भूमिका
चौहान ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों की भागीदारी बढ़ाने के प्रयास जारी हैं, ताकि किसी भी संभावित नुकसान की स्थिति में किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिल सके। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब अल नीनो वर्षों में फसल नुकसान का ऐतिहासिक जोखिम अधिक रहता है। नियुक्त अधिकारी राज्य स्तर पर स्थिति की नियमित समीक्षा कर रहे हैं और आगामी हफ्तों में मानसून की प्रगति के आधार पर रणनीति में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे।