8 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

अल नीनो से खरीफ बुवाई में 91.95 लाख हेक्टेयर का अंतर, शिवराज सिंह चौहान बोले — रणनीति तैयार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
अल नीनो से खरीफ बुवाई में 91.95 लाख हेक्टेयर का अंतर, शिवराज सिंह चौहान बोले — रणनीति तैयार

सारांश

अल नीनो की आशंका के बीच खरीफ बुवाई में पिछले साल के मुकाबले 91.95 लाख हेक्टेयर का अंतर आ गया है। लेकिन सरकार ने अप्रैल से ही मोर्चा संभाला — ICAR के कंटिंजेंसी प्लान, 80 लाख किसानों तक सीधी पहुँच और 1.75 लाख क्विंटल बीज भंडार के साथ। असली परीक्षा जुलाई की बारिश तय करेगी।

मुख्य बातें

जून में 33% कम बारिश के बाद जुलाई में कमी घटकर 24% पर आई; कम वर्षा वाले जिले 262 से घटकर 178 हुए।
खरीफ बुवाई अब तक 350.85 लाख हेक्टेयर में हुई — पिछले साल से 91.95 लाख हेक्टेयर कम।
महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात सहित 13 राज्यों में विशेष निगरानी जारी।
'खेत बचाओ अभियान' के तहत 1.24 लाख कार्यक्रम, 80 लाख से अधिक किसानों तक पहुँच।
राष्ट्रीय बीज भंडार में 1.75 लाख क्विंटल बीज उपलब्ध; किसान क्रेडिट कार्ड के 94 हजार आवेदन स्वीकृत।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 8 जुलाई को नई दिल्ली में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद स्पष्ट किया कि अल नीनो के संभावित प्रभाव से उत्पन्न मानसून की अनिश्चितता के बावजूद केंद्र सरकार पूरी तरह सतर्क है और ठोस कदम उठाए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि जून में 33 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई थी, जो जुलाई में घटकर 24 प्रतिशत की कमी पर आ गई है।

बुवाई की स्थिति और फसलों पर असर

चौहान ने बताया कि अभी तक देश में 350.85 लाख हेक्टेयर में खरीफ बुवाई हो चुकी है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 91.95 लाख हेक्टेयर कम है। मानसून में देरी का सर्वाधिक असर सोयाबीन और कपास की फसलों पर पड़ा है। इससे निपटने के लिए किसानों को मक्का, बाजरा और मूंग जैसी कम अवधि एवं कम सिंचाई वाली फसलों की बुवाई की सलाह दी गई है।

हाल के दिनों में देश के अनेक हिस्सों में हुई अच्छी बारिश के चलते कम वर्षा वाले जिलों की संख्या 262 से घटकर 178 रह गई है। उम्मीद जताई जा रही है कि जुलाई में वर्षा की गति और तेज होगी, जिससे बुवाई में आई कमी को काफी हद तक पूरा किया जा सकेगा।

विशेष निगरानी में कौन-से राज्य

चौहान ने बताया कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पंजाब, पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे राज्यों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। इन राज्यों में अल-नीनो मॉनिटरिंग सेल, क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप और राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम के माध्यम से मानसून, बुवाई, फसल और बाजार की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

सरकार की अग्रिम तैयारी और कंटिंजेंसी प्लान

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने इस चुनौती के लिए अप्रैल से ही तैयारी शुरू कर दी थी। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के सहयोग से संभावित रूप से प्रभावित जिलों के लिए कंटिंजेंसी प्लान तैयार कर राज्यों के साथ साझा किए गए हैं। जून महीने में चलाए गए 'खेत बचाओ अभियान' के अंतर्गत 1.24 लाख से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए और 80 लाख से अधिक किसानों तक सीधे पहुँच बनाई गई।

बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 1.75 लाख क्विंटल का राष्ट्रीय बीज भंडार तैयार रखा गया है। किसान क्रेडिट कार्ड अभियान के तहत 30 जून तक प्राप्त 1.14 लाख आवेदनों में से 94 हजार से अधिक को स्वीकृति दी जा चुकी है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की भूमिका

चौहान ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों की भागीदारी बढ़ाने के प्रयास जारी हैं, ताकि किसी भी संभावित नुकसान की स्थिति में किसानों को आर्थिक सुरक्षा मिल सके। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब अल नीनो वर्षों में फसल नुकसान का ऐतिहासिक जोखिम अधिक रहता है। नियुक्त अधिकारी राज्य स्तर पर स्थिति की नियमित समीक्षा कर रहे हैं और आगामी हफ्तों में मानसून की प्रगति के आधार पर रणनीति में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

80 लाख किसानों तक पहुँच और बीज भंडार — लेकिन 91.95 लाख हेक्टेयर की बुवाई में कमी एक गंभीर संकेत है जिसे महज प्रशासनिक सक्रियता से नहीं ढका जा सकता। अल नीनो वर्षों में भारत का कृषि उत्पादन ऐतिहासिक रूप से 5-8% तक गिरा है, और सोयाबीन-कपास जैसी नकदी फसलों पर असर किसानों की आय को सीधे चोट पहुँचाता है। असली सवाल यह है कि क्या फसल बीमा की भागीदारी इस बार वाकई उन सीमांत किसानों तक पहुँचेगी जो सबसे अधिक जोखिम में हैं — क्योंकि पिछले वर्षों में बीमा दावों के निपटारे में देरी एक बड़ी शिकायत रही है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अल नीनो का इस साल खरीफ बुवाई पर क्या असर पड़ा है?
अल नीनो के कारण मानसून में देरी से खरीफ बुवाई पिछले साल के मुकाबले 91.95 लाख हेक्टेयर कम रही है और अब तक 350.85 लाख हेक्टेयर में ही बुवाई हो सकी है। सोयाबीन और कपास सर्वाधिक प्रभावित फसलें हैं।
सरकार ने अल नीनो की चुनौती से निपटने के लिए क्या तैयारी की है?
केंद्र सरकार ने अप्रैल से ही ICAR के सहयोग से कंटिंजेंसी प्लान तैयार कर राज्यों को सौंपे हैं। 'खेत बचाओ अभियान' के तहत 80 लाख किसानों तक पहुँच बनाई गई, 1.75 लाख क्विंटल का राष्ट्रीय बीज भंडार तैयार रखा गया है और 13 राज्यों में विशेष निगरानी तंत्र सक्रिय है।
मानसून की कमी से कौन-से राज्य सबसे ज्यादा प्रभावित हैं?
महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पंजाब, पश्चिम बंगाल और ओडिशा इन 13 राज्यों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। इन राज्यों में राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम सक्रिय हैं।
किसानों को कम बारिश में कौन-सी फसलें बोने की सलाह दी गई है?
सरकार ने किसानों को मक्का, बाजरा और मूंग जैसी कम अवधि और कम पानी की जरूरत वाली फसलें बोने की सलाह दी है। ये फसलें मानसून की देरी या कमी की स्थिति में भी बेहतर उपज दे सकती हैं।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अल नीनो के संदर्भ में कैसे मददगार होगी?
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों की भागीदारी बढ़ाई जा रही है ताकि अल नीनो से होने वाले संभावित फसल नुकसान की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा मिल सके। इसके साथ ही किसान क्रेडिट कार्ड के 94 हजार से अधिक आवेदनों को 30 जून तक स्वीकृति दी जा चुकी है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 18 घंटे पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 10 महीने पहले
  8. 11 महीने पहले