अल नीनो पर PMO की उच्चस्तरीय बैठक: 15+ मंत्रालय अलर्ट, वर्षा कमी घटकर -12% पर
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में 7 जुलाई 2026 को खरीफ सीजन की प्रगति और अल नीनो के संभावित प्रभावों की समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई। प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा की अध्यक्षता में सेवा तीर्थ, नई दिल्ली में आयोजित इस बैठक में 15 से अधिक मंत्रालयों के सचिव और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब जुलाई में देश की कुल मानसून वर्षा का 30 प्रतिशत से अधिक हिस्सा होता है।
मौसम की स्थिति और IMD का आकलन
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के महानिदेशक ने बैठक में जानकारी दी कि गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में मानसून लगभग 10 दिन की देरी से पहुँचा। हालाँकि, 7 जुलाई तक हुई बारिश के बाद देशभर में वर्षा की कमी घटकर माइनस 12 प्रतिशत रह गई है। जुलाई के पहले सप्ताह में सामान्य से बेहतर बारिश दर्ज की गई।
IMD के अनुसार, जुलाई और अगस्त के दौरान कमजोर से मध्यम स्तर का अल नीनो प्रभाव देखने को मिल सकता है। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि अल नीनो वर्ष में हर बार सामान्य से कम बारिश होना अनिवार्य नहीं होता — स्थिति पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है।
कृषि क्षेत्र की तैयारियाँ
कृषि सचिव ने खरीफ फसलों की सुरक्षा के लिए की गई तैयारियों का विस्तृत ब्यौरा दिया। राज्यों के साथ क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप की साप्ताहिक बैठकें आयोजित की जा रही हैं, जिनमें वर्षा, जलाशयों का जलस्तर, बुआई, कृषि इनपुट, बाजार की स्थिति और कीट-रोग निगरानी शामिल है।
देश के 262 संवेदनशील जिलों के लिए जिला कृषि आकस्मिक योजना को अद्यतन किया गया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने कृषि विज्ञान केंद्रों के लिए 'भारतीय कृषि में एल नीनो जोखिम प्रबंधन' संबंधी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है। गौरतलब है कि जलवायु-अनुकूल फसल किस्मों और नई तकनीकों की बदौलत कम वर्षा के बावजूद पिछले वर्षों में खाद्यान्न उत्पादन स्थिर बना रहा है।
किसानों के लिए निर्देश और योजनाएँ
बैठक में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और किसान क्रेडिट कार्ड का दायरा संवेदनशील राज्यों में तेजी से बढ़ाने के निर्देश दिए गए। कृषि, वित्तीय सेवाएं और सहकारिता विभाग को समयबद्ध तरीके से अधिकतम किसानों को इन योजनाओं से जोड़ने का निर्देश दिया गया। पशुपालन एवं डेयरी विभाग को सूखे चारे, हरे चारे और पशु आहार की उपलब्धता का राज्य और जिला स्तर पर आकलन करने को कहा गया।
जल, स्वास्थ्य और अन्य क्षेत्रों की निगरानी
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने बताया कि संवेदनशील जिलों में स्थिति पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है और जिला स्तर पर सूक्ष्म योजना मजबूत करने के निर्देश दिए गए। जल संसाधन विभाग ने भूजल और जलाशयों की स्थिति सामान्य बताई, लेकिन पूरे मानसून के दौरान सतत निगरानी पर जोर दिया।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने हीटवेव, अधिक आर्द्रता और डेंगू के संभावित प्रकोप को लेकर एडवाइजरी जारी की है। निर्देश दिए गए कि सभी अलर्ट और सलाह जिला एवं स्थानीय स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुँचाई जाएँ। यह बैठक आने वाले हफ्तों में सरकार की मानसून-प्रबंधन रणनीति की दिशा तय करने वाली साबित हो सकती है।