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IMD का अनुमान: 2025 में सामान्य से कम बारिश, अल नीनो से मानसून की रफ्तार पड़ेगी धीमी

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IMD का अनुमान: 2025 में सामान्य से कम बारिश, अल नीनो से मानसून की रफ्तार पड़ेगी धीमी

सारांश

IMD ने चेतावनी दी है कि 2025 में मानसून सामान्य का केवल 98% रहेगा — अल नीनो के सक्रिय होने से रफ्तार धीमी है। महाराष्ट्र तक पहुँचा मानसून आगे की ओर सुस्त है, जबकि उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ से बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी है।

मुख्य बातें

IMD के अनुसार इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन में सामान्य वर्षा का 98% — यानी सामान्य से कम — बारिश होने की संभावना है।
अल नीनो प्रभाव सक्रिय हो चुका है और पूरे मानसून सीजन इसके बने रहने की आशंका है।
मानसून महाराष्ट्र, दक्षिणी प्रायद्वीप, पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों तक पहुँचा; आगे की प्रगति धीमी।
अगले 2-3 दिनों में बिहार, ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ तक पहुँचने का अनुमान।
दिल्ली-एनसीआर के लिए येलो अलर्ट ; राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों के लिए ऑरेंज अलर्ट ।
पश्चिमी विक्षोभ से उत्तर भारत में तापमान 6-8 डिग्री सेल्सियस गिरा; आने वाले दिनों में 4-6 डिग्री की वापसी संभव।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 13 जून 2025 को घोषणा की कि इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन में देशभर में सामान्य वर्षा का लगभग 98 प्रतिशत — यानी सामान्य से कम — बारिश होने की संभावना है। विभाग के अनुसार, अल नीनो का प्रभाव अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है और पूरे मानसून सीजन के दौरान इसके बने रहने की आशंका है।

मानसून की मौजूदा स्थिति

IMD के अनुसार, मानसून अब तक दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत के अधिकांश हिस्सों, महाराष्ट्र, पूर्वोत्तर राज्यों और पूर्वी भारत के कुछ क्षेत्रों तक पहुँच चुका है। हालाँकि, इसके आगे बढ़ने की गति फिलहाल धीमी पड़ गई है।

अगले दो से तीन दिनों में मानसून के बिहार, ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ के अधिक हिस्सों तक पहुँचने की संभावना जताई गई है, हालाँकि उसके बाद इसकी प्रगति धीमी ही रहने का अनुमान है।

अल नीनो का असर और विशेषज्ञ की राय

IMD के वैज्ञानिक प्रदीप शर्मा ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'दक्षिण-पश्चिम मानसून के दीर्घकालिक पूर्वानुमान के अनुसार इस साल पूरे देश में सामान्य वर्षा का लगभग 98 प्रतिशत यानी सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि अल नीनो प्रभाव सक्रिय हो चुका है और पूरे सीजन इसके बने रहने की आशंका है।

यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई हिस्सों में खरीफ फसल की बुवाई का मौसम शुरू होने वाला है और किसान समुदाय मानसून की चाल पर बारीकी से नजर रख रहा है।

उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव

IMD के वैज्ञानिक नरेश कुमार ने बताया कि पिछले दो दिनों से पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के कारण उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश और गरज-चमक की गतिविधियाँ देखी जा रही हैं। उन्होंने कहा, 'फिलहाल पश्चिमी विक्षोभ उत्तर हरियाणा और उससे सटे क्षेत्रों में सक्रिय है। इसके प्रभाव से पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर और हिमालयी क्षेत्रों में बारिश और गरज-चमक जारी रहने की संभावना है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएँ चल सकती हैं।'

नरेश कुमार ने यह भी बताया कि पश्चिमी विक्षोभ के असर से उत्तर भारत के तापमान में पिछले दिनों 6 से 8 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है। आने वाले दिनों में तापमान 4 से 6 डिग्री तक बढ़ सकता है, लेकिन यह सामान्य या सामान्य से कम स्तर पर ही बना रहेगा।

अलर्ट की स्थिति

दिल्ली-एनसीआर के लिए शनिवार, 13 जून को येलो अलर्ट जारी किया गया है, जबकि राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों के लिए ऑरेंज अलर्ट लागू है। इससे पहले उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ क्षेत्रों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया था।

आगे क्या होगा

IMD के अनुमान के अनुसार, मानसून की धीमी रफ्तार और अल नीनो का संयुक्त प्रभाव देश के मध्य और उत्तरी हिस्सों में वर्षा को प्रभावित कर सकता है। कृषि विशेषज्ञों की नजर इस बात पर है कि क्या मानसून जुलाई तक अपनी रफ्तार पकड़ पाता है, जो खरीफ उत्पादन के लिए निर्णायक महीना माना जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका वितरण ही असली चिंता है — कम बारिश यदि कृषि-निर्भर मध्य और उत्तरी राज्यों में केंद्रित रही, तो खरीफ उत्पादन पर असर गंभीर हो सकता है। अल नीनो के वर्षों में भारत का ऐतिहासिक अनुभव बताता है कि औसत आँकड़े क्षेत्रीय सूखे की भयावहता को छुपा लेते हैं। सरकार को अभी से आकस्मिक फसल योजना और जल संरक्षण उपायों को सक्रिय करना चाहिए — मानसून के पूरी तरह कमज़ोर पड़ने का इंतजार करना नीतिगत चूक होगी।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

IMD ने 2025 में मानसून के बारे में क्या कहा है?
IMD ने 13 जून 2025 को बताया कि इस वर्ष देशभर में सामान्य वर्षा का लगभग 98 प्रतिशत बारिश होने की संभावना है, जो सामान्य से कम मानी जाती है। इसकी मुख्य वजह अल नीनो का सक्रिय होना बताई गई है।
अल नीनो का मानसून पर क्या असर पड़ता है?
अल नीनो एक जलवायु घटना है जो प्रशांत महासागर की सतह के गर्म होने से जुड़ी है और भारतीय उपमहाद्वीप में मानसूनी वर्षा को कमज़ोर करती है। IMD के वैज्ञानिक प्रदीप शर्मा के अनुसार, इस बार अल नीनो पूरे मानसून सीजन के दौरान सक्रिय रहने की संभावना है।
अभी तक मानसून कहाँ-कहाँ पहुँचा है?
IMD के अनुसार मानसून दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत के अधिकांश हिस्सों, महाराष्ट्र, पूर्वोत्तर राज्यों और पूर्वी भारत के कुछ क्षेत्रों तक पहुँच चुका है। अगले 2-3 दिनों में यह बिहार, ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ के अधिक हिस्सों तक पहुँच सकता है।
दिल्ली-एनसीआर में किस तरह का मौसम अलर्ट जारी है?
13 जून 2025 को दिल्ली-एनसीआर के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है, जिसमें हल्की बारिश और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं की संभावना है। राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों के लिए ऑरेंज अलर्ट लागू है।
उत्तर भारत में तापमान पर क्या असर पड़ा है?
पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से उत्तर भारत के तापमान में पिछले दिनों 6 से 8 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई है। IMD के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान 4 से 6 डिग्री तक बढ़ सकता है, लेकिन यह सामान्य या सामान्य से कम स्तर पर ही रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
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