सितंबर 2026 में सामान्य से कम बारिश का अनुमान: आईएमडी ने मजबूत अल-नीनो को बताया वजह
सारांश
मुख्य बातें
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने 31 अगस्त 2026 को जारी अपने मासिक पूर्वानुमान में चेतावनी दी है कि सितंबर 2026 में देश भर में बारिश लॉन्ग पीरियड एवरेज (एलपीए) के 91 प्रतिशत से कम रहने की सबसे अधिक संभावना है। 1971–2020 के आँकड़ों पर आधारित सितंबर का एलपीए लगभग 167.9 मिमी है, और इस बार वर्षा इससे नीचे रहने का अनुमान है। भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में सक्रिय मजबूत अल-नीनो स्थितियाँ इस कमी की प्रमुख वजह बताई जा रही हैं।
क्षेत्रवार वर्षा का अनुमान
आईएमडी के अनुसार देश के अधिकांश भागों में सामान्य से कम वर्षा होने की आशंका है। हालाँकि, उत्तर-पश्चिम, उत्तर-पूर्व, पूर्व, पूर्व-मध्य और दक्षिण-पूर्व प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य या सामान्य से अधिक वर्षा की संभावना बनी हुई है। संभावना-आधारित श्रेणी-विश्लेषण (सामान्य से अधिक, सामान्य और सामान्य से कम) से भी यही संकेत मिलता है कि व्यापक स्तर पर वर्षा की कमी रहेगी।
तापमान का हाल
वर्षा की कमी के साथ-साथ गर्मी का भी दबाव बने रहने का अनुमान है। देश के अधिकांश हिस्सों में मासिक औसत अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। मासिक औसत न्यूनतम तापमान भी ज़्यादातर इलाकों में सामान्य से ऊपर रहेगा — अपवाद केवल उत्तर-पश्चिम, पश्चिम-मध्य और उत्तर-पूर्व भारत के कुछ क्षेत्र हैं, जहाँ तापमान सामान्य या सामान्य से कम रह सकता है।
अल-नीनो और आईओडी की भूमिका
आईएमडी के अनुसार, इस समय भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में मजबूत अल-नीनो की स्थिति बनी हुई है और मध्य व पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक है। आने वाले महीनों में इन स्थितियों के और प्रबल होने की आशंका है। फिलहाल हिंद महासागर में न्यूट्रल इंडियन ओशन डाइपोल (आईओडी) की स्थिति है। आईएमडी के मानसून मिशन कपल्ड फोरकास्ट सिस्टम (एमएमसीएफएस) के अनुमान बताते हैं कि सितंबर तक आईओडी न्यूट्रल ही बना रहेगा। हालाँकि, कुछ अंतरराष्ट्रीय जलवायु केंद्र संकेत दे रहे हैं कि सितंबर से पॉजिटिव आईओडी की स्थिति उभर सकती है।
आम जनता और खेती पर असर
आईएमडी ने स्पष्ट किया है कि सामान्य से कम वर्षा का सीधा असर कृषि, जल संसाधनों, पनबिजली उत्पादन, पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता और पेयजल उपलब्धता पर पड़ सकता है। इसके साथ ही कई क्षेत्रों में हीट स्ट्रेस यानी गर्मी से उत्पन्न स्वास्थ्य जोखिम बढ़ने की भी आशंका है। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई हिस्सों में पहले से ही जलाशयों का स्तर चिंताजनक बना हुआ है।
सरकार और एजेंसियों के लिए सलाह
आईएमडी ने संबंधित सरकारी एजेंसियों और हितधारकों को समय रहते तैयारी करने की सलाह दी है। इसमें जल संरक्षण, संसाधनों का सुव्यवस्थित प्रबंधन और कृषि आपातकालीन योजना बनाना शामिल है। विभाग सितंबर के अंत में उत्तर-पूर्वी मानसून सीज़न (अक्टूबर से दिसंबर 2026) के लिए पूर्वानुमान और अक्टूबर के लिए वर्षा व तापमान का आउटलुक जारी करेगा।