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मानसून में सुधार से खरीफ फसलों का संकट टला, 19 अगस्त तक बारिश की कमी घटकर 12.6% पर

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मानसून में सुधार से खरीफ फसलों का संकट टला, 19 अगस्त तक बारिश की कमी घटकर 12.6% पर

सारांश

जून में 35% रही बारिश की कमी अगस्त तक घटकर 12.6% पर आ गई है। मैक्वायरी की रिपोर्ट बताती है कि खरीफ बुवाई और जलाशय स्तर दोनों में सुधार ने फसल संकट का जोखिम कम किया है — हालाँकि बिहार और दक्षिण भारत अभी भी निगरानी में हैं।

मुख्य बातें

19 अगस्त तक संचयी बारिश की कमी 12.6% पर आई, जो जून में 35% थी।
14 अगस्त तक कुल खरीफ बुवाई पिछले साल से केवल 2% पीछे; जून के अंत में यह अंतर 21% था।
धान का रकबा 3.7% और मक्का का रकबा 4% कम; दलहन, तिलहन, गन्ना और कपास लगभग सामान्य स्तर पर।
महाराष्ट्र और गुजरात के जलाशय 10 साल के औसत के बराबर या अधिक; UP, MP, पंजाब में 80-100% भंडारण।
बिहार और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों पर अभी भी करीबी नज़र ज़रूरी।
मानसून सुधार से खाद्य महंगाई के जोखिम भी जून के मुकाबले कम हो रहे हैं।

भारत में मानसून 2026 की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है, जिससे खरीफ फसलों को व्यापक नुकसान की आशंका काफी हद तक कम हो गई है। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म मैक्वायरी की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, 19 अगस्त तक संचयी बारिश की कमी घटकर 12.6 प्रतिशत रह गई है, जो जून में 35 प्रतिशत थी। हालाँकि, रिपोर्ट यह भी स्पष्ट करती है कि बारिश का भौगोलिक वितरण अभी भी निगरानी का विषय बना हुआ है।

बुवाई में सुधार, लेकिन कमी अभी बाकी

सीज़न की कमज़ोर शुरुआत के बावजूद खरीफ बुवाई में तेज़ी से सुधार हुआ है। मैक्वायरी के आँकड़ों के अनुसार, 14 अगस्त तक कुल खरीफ बुवाई पिछले वर्ष के स्तर से केवल 2 प्रतिशत पीछे रही, जबकि जून के अंत में यह अंतर 21 प्रतिशत तक था। यह सुधार दर्शाता है कि किसानों ने मानसून की रफ़्तार पकड़ने के साथ-साथ बुवाई में तेज़ी लाई।

फसल-दर-फसल आँकड़ों पर नज़र डालें तो धान का रकबा पिछले साल की तुलना में 3.7 प्रतिशत कम रहा, जबकि मक्का के रकबे में 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इसके विपरीत, दलहन, तिलहन, गन्ना और कपास का रकबा पिछले साल के स्तर के करीब 1 प्रतिशत के दायरे में रहा। रिपोर्ट के अनुसार, बुवाई में बची हुई कमी मुख्यतः चुनिंदा फसलों तक सीमित है और व्यापक स्तर पर नहीं फैली है।

जलाशयों का जल स्तर बना सुरक्षा कवच

बारिश की कमी के बावजूद देशभर के जलाशयों में पर्याप्त जल भंडारण ने कृषि क्षेत्र को राहत दी है। महाराष्ट्र और गुजरात में जलाशयों का भंडारण 10 वर्षों के औसत के बराबर या उससे अधिक है। प्रमुख कृषि राज्यों — उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पंजाब — में जल भंडारण उनके दीर्घकालिक औसत का करीब 80 से 100 प्रतिशत है। यह स्थिति सिंचाई पर निर्भर फसलों के लिए सकारात्मक संकेत है।

हालाँकि, रिपोर्ट में बिहार और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में जल स्तर पर करीबी नज़र रखने की सलाह दी गई है, जहाँ स्थिति अपेक्षाकृत कमज़ोर बनी हुई है।

महंगाई पर भी पड़ेगा अनुकूल असर

मैक्वायरी की रिपोर्ट के अनुसार, मानसून में सुधार का असर केवल कृषि उत्पादन तक सीमित नहीं है — यह खाद्य महंगाई के मोर्चे पर भी राहत दे सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जून के मुकाबले खाद्य आपूर्ति और महंगाई से जुड़े जोखिम कम हो रहे हैं। गौरतलब है कि खाद्य वस्तुओं की कीमतें भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति के लिए एक संवेदनशील चर रही हैं, इसलिए मानसून की यह प्रगति व्यापक आर्थिक दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण है।

आगे क्या देखना होगा

रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि मानसून में सुधार, बुवाई में सीमित कमी और पर्याप्त सिंचाई भंडार ने मिलकर खरीफ उत्पादन में गिरावट के जोखिम को काफी हद तक कम कर दिया है। बावजूद इसके, बारिश का असमान वितरण — विशेष रूप से बिहार और दक्षिणी राज्यों में — आने वाले हफ्तों में फसल की अंतिम स्थिति तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, सितंबर तक की बारिश धान और दलहन की पैदावार पर सबसे अधिक असर डालेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'जोखिम कम हुआ' और 'जोखिम खत्म हुआ' में फर्क करना ज़रूरी है। बुवाई की कमी जून के 21% से 2% पर आना प्रभावशाली है, मगर धान और मक्के में अभी भी पिछड़ापन है — और ये दोनों खाद्य सुरक्षा के लिहाज़ से सबसे संवेदनशील फसलें हैं। असली चिंता का विषय बिहार और दक्षिण भारत हैं, जहाँ जल भंडारण की स्थिति कमज़ोर है और जहाँ छोटे किसान सिंचाई के वैकल्पिक साधनों पर कम निर्भर हैं। सितंबर की बारिश इस पूरी तस्वीर को बदल सकती है — और तब तक किसी भी निष्कर्ष को अंतिम मानना जल्दबाज़ी होगी।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में मानसून 2026 की मौजूदा स्थिति क्या है?
मैक्वायरी की रिपोर्ट के अनुसार, 19 अगस्त तक संचयी बारिश की कमी घटकर 12.6% रह गई है, जो जून में 35% थी। स्थिति में सुधार हो रहा है, हालाँकि बारिश का वितरण अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं है।
खरीफ बुवाई पर मानसून सुधार का क्या असर पड़ा है?
14 अगस्त तक कुल खरीफ बुवाई पिछले साल के मुकाबले केवल 2% पीछे रही, जबकि जून के अंत में यह कमी 21% थी। धान और मक्के में अभी भी क्रमशः 3.7% और 4% की कमी है, लेकिन दलहन, तिलहन, गन्ना और कपास लगभग सामान्य स्तर पर हैं।
किन राज्यों में जलाशय स्तर ठीक है और कहाँ चिंता बनी है?
महाराष्ट्र और गुजरात में जलाशयों का भंडारण 10 साल के औसत के बराबर या अधिक है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पंजाब में भंडारण औसत का 80-100% है। बिहार और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में स्थिति कमज़ोर है और निगरानी ज़रूरी है।
मानसून सुधार से खाद्य महंगाई पर क्या असर पड़ेगा?
रिपोर्ट के अनुसार, मानसून की बेहतर प्रगति से खाद्य आपूर्ति और महंगाई से जुड़े जोखिम जून के मुकाबले कम हो रहे हैं। यह RBI की मौद्रिक नीति के लिए भी सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
क्या खरीफ 2026 उत्पादन में बड़ी गिरावट का खतरा टल गया है?
मैक्वायरी की रिपोर्ट के अनुसार, मानसून सुधार, सीमित बुवाई कमी और पर्याप्त जल भंडारण ने मिलकर खरीफ उत्पादन में व्यापक गिरावट का जोखिम काफी हद तक कम कर दिया है। हालाँकि, सितंबर की बारिश और बिहार व दक्षिण भारत की स्थिति अंतिम परिणाम तय करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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