6 जुलाई 2026
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कमजोर मानसून के बावजूद खाद्य कीमतें स्थिर, लेकिन जलाशय 26% क्षमता पर — MK ग्लोबल रिपोर्ट

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कमजोर मानसून के बावजूद खाद्य कीमतें स्थिर, लेकिन जलाशय 26% क्षमता पर — MK ग्लोबल रिपोर्ट

सारांश

मानसून की कमी के बावजूद खाद्य कीमतें अभी काबू में हैं — लेकिन यह राहत अस्थायी हो सकती है। जलाशय 26% क्षमता पर हैं, जून दशक का सबसे सूखा महीना रहा, और IMD का जुलाई पूर्वानुमान भी चिंताजनक है। खरीफ बुवाई पर खतरा मंडरा रहा है।

मुख्य बातें

MK ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की रिपोर्ट के अनुसार, कमजोर मानसून के बावजूद अभी खाद्य कीमतें नियंत्रण में हैं।
साप्ताहिक आधार पर सब्जियाँ 1.5% , अंडे 1% , अनाज 0.5% और तेल व फैट 0.2% महंगे हुए।
सालाना आधार पर तेल व फैट 11% और अंडे 6% महंगे — सर्वाधिक वृद्धि इन्हीं श्रेणियों में।
3 जुलाई 2026 तक कुल वर्षा दीर्घकालिक औसत से 31% कम; जून 2026 में 40% कम — दशक का सबसे खराब जून।
देशभर के जलाशयों में जलस्तर कुल क्षमता का 26% , पिछले वर्ष की तुलना में 39% कम।
IMD के अनुसार जुलाई 2026 में भी वर्षा सामान्य से कम रहने की आशंका, खरीफ बुवाई पर संकट बरकरार।

एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कमजोर मानसून के बावजूद अभी तक खाद्य वस्तुओं की कीमतें नियंत्रण में हैं — हालाँकि आने वाले हफ्तों में आपूर्ति पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। 6 जुलाई 2026 को जारी इस रिपोर्ट में साप्ताहिक खुदरा आँकड़ों और जलाशय स्तरों का विस्तृत विश्लेषण किया गया है।

साप्ताहिक खुदरा कीमतों का हाल

रिपोर्ट में दिए गए साप्ताहिक खुदरा आँकड़ों के अनुसार, सब्जियों की कीमतों में 1.5% और अंडों की कीमतों में 1% की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। इसके साथ ही अनाज की कीमतों में 0.5% और तेल व फैट में 0.2% की मामूली वृद्धि देखी गई है। फिलहाल यह बढ़ोतरी सीमित दायरे में है, लेकिन विश्लेषकों का ध्यान सालाना रुझानों पर भी है।

सालाना आधार पर महंगाई के संकेत

सालाना तुलना में तस्वीर कुछ अधिक चिंताजनक है। तेल और फैट की कीमतें साल-दर-साल 11% बढ़ी हैं — जो सभी श्रेणियों में सबसे अधिक है। अंडों में 6%, सब्जियों, दूध और मसालों में 3-3%, अनाज में 2% और दालों में 1% की वार्षिक वृद्धि आँकड़ों के अनुसार दर्ज है।

मानसून की स्थिति और जलाशयों पर असर

रिपोर्ट के अनुसार, 3 जुलाई 2026 तक देशभर में कुल वर्षा दीर्घकालिक औसत से 31% कम रही। जून 2026 में बारिश दीर्घकालिक औसत से 40% कम रही, जिसे रिपोर्ट में पिछले एक दशक का सबसे खराब जून बताया गया है। इस सूखे मानसून का सीधा असर जलाशयों पर पड़ा है — देशभर के जलाशयों में पानी का स्तर उनकी कुल क्षमता का महज 26% है, जो पिछले वर्ष इसी अवधि की तुलना में 39% कम है।

क्षेत्रवार देखें तो मध्य भारत में जलाशय क्षमता 32% है, उत्तर भारत में 29% और पश्चिम भारत में 28%। सबसे चिंताजनक स्थिति दक्षिण भारत (20%) और पूर्वी भारत (19%) की है।

प्रमुख कृषि राज्यों में बुवाई पर खतरा

महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे मुख्य खाद्य-उत्पादक राज्यों में मानसून की लगातार कमी के कारण बुवाई का काम धीमा पड़ गया है। रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि यदि स्थिति नहीं सुधरी, तो आने वाले हफ्तों में खाद्य आपूर्ति बाधित हो सकती है और कीमतों पर ऊपर की ओर दबाव बन सकता है।

आगे क्या उम्मीद है

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के अनुसार, जुलाई 2026 में भी वर्षा सामान्य से कम रहने की संभावना है। यह स्थिति खरीफ फसल की बुवाई के मौसम के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। गौरतलब है कि खरीफ सीजन भारत की खाद्य सुरक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण है और मानसून की दीर्घकालिक कमी अंततः खुदरा कीमतों में परिलक्षित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि मजबूत घरेलू उत्पादन पर। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में बुवाई की धीमी रफ्तार का असर अगस्त-सितंबर में खुदरा बाजार में दिखेगा — तब तक नीति-निर्माताओं के पास प्रतिक्रिया की खिड़की बेहद संकरी होगी।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कमजोर मानसून के बावजूद खाद्य कीमतें स्थिर क्यों हैं?
MK ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की रिपोर्ट के अनुसार, अभी खाद्य महंगाई काबू में है क्योंकि मानसून की कमी का असर खरीफ फसल पर अभी पूरी तरह नहीं पड़ा है। हालाँकि आने वाले हफ्तों में आपूर्ति पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई गई है।
जून 2026 में मानसून कितना कमजोर रहा?
रिपोर्ट के अनुसार जून 2026 में वर्षा दीर्घकालिक औसत से 40% कम रही, जिसे पिछले एक दशक का सबसे खराब जून बताया गया है। 3 जुलाई 2026 तक कुल वर्षा दीर्घकालिक औसत से 31% कम दर्ज हुई।
भारत के जलाशयों में अभी कितना पानी है?
रिपोर्ट के अनुसार, देशभर के जलाशयों में जलस्तर उनकी कुल क्षमता का केवल 26% है और पिछले वर्ष इसी समय की तुलना में 39% कम है। सबसे कम स्तर पूर्वी भारत (19%) और दक्षिण भारत (20%) में है।
खरीफ बुवाई पर कमजोर मानसून का क्या असर होगा?
महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख कृषि राज्यों में बुवाई धीमी पड़ गई है। IMD का अनुमान है कि जुलाई 2026 में भी वर्षा सामान्य से कम रहेगी, जिससे खरीफ उत्पादन प्रभावित होने और आगे कीमतें बढ़ने की आशंका है।
किन खाद्य वस्तुओं की कीमतें सालाना आधार पर सबसे ज्यादा बढ़ी हैं?
रिपोर्ट के अनुसार सालाना आधार पर तेल व फैट की कीमतें 11% बढ़ी हैं — जो सर्वाधिक है। इसके बाद अंडों में 6%, सब्जियों, दूध और मसालों में 3-3%, अनाज में 2% और दालों में 1% की वृद्धि दर्ज हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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