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कमजोर मानसून के बावजूद खाद्य कीमतें स्थिर, लेकिन 31% बारिश की कमी से आगे खतरे के संकेत

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कमजोर मानसून के बावजूद खाद्य कीमतें स्थिर, लेकिन 31% बारिश की कमी से आगे खतरे के संकेत

सारांश

जून 2026 एक दशक का सबसे शुष्क जून रहा — दीर्घकालिक औसत से 40% कम बारिश। देश के जलाशय महज 26% भरे हैं। फिलहाल खाद्य कीमतें स्थिर हैं, लेकिन IMD के जुलाई पूर्वानुमान और धीमी खरीफ बुवाई यह संकेत देते हैं कि असली परीक्षा अभी बाकी है।

मुख्य बातें

एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की रिपोर्ट के अनुसार, कमज़ोर मानसून के बावजूद खाद्य वस्तुओं की कीमतें फिलहाल नियंत्रण में हैं।
3 जुलाई 2026 तक देशभर में कुल वर्षा दीर्घकालिक औसत से 31 प्रतिशत कम; जून 2026 पिछले एक दशक का सबसे शुष्क जून रहा ( 40% कमी)।
सालाना आधार पर तेल और फैट की कीमतें सबसे अधिक — 11 प्रतिशत — बढ़ी हैं।
देशभर के जलाशयों में क्षमता का केवल 26 प्रतिशत पानी, जो पिछले वर्ष की तुलना में 39 प्रतिशत कम है।
महाराष्ट्र , गुजरात , मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में मानसून की कमी से खरीफ बुवाई और खाद्य आपूर्ति पर खतरा।
IMD के अनुसार जुलाई 2026 में भी वर्षा सामान्य से कम रहने की संभावना।

एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भारत में इस वर्ष मानसून के कमज़ोर रहने के बावजूद खाद्य वस्तुओं की कीमतें फिलहाल नियंत्रण में हैं। 3 जुलाई 2026 तक देशभर में कुल वर्षा दीर्घकालिक औसत से 31 प्रतिशत कम दर्ज की गई है, जो आने वाले हफ्तों में खाद्य आपूर्ति और मूल्य स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।

साप्ताहिक खुदरा कीमतों का हाल

रिपोर्ट में उद्धृत साप्ताहिक खुदरा आंकड़ों के मुताबिक, सब्जियों की कीमतों में 1.5 प्रतिशत और अंडों में 1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही अनाज में 0.5 प्रतिशत और तेल व फैट में 0.2 प्रतिशत की मामूली वृद्धि देखी गई है। सालाना आधार पर देखें तो तेल और फैट सबसे महंगे हुए हैं — इनकी कीमतें 11 प्रतिशत बढ़ी हैं। इसके बाद अंडे (6 प्रतिशत), सब्जियाँ, दूध और मसाले (प्रत्येक 3 प्रतिशत), अनाज (2 प्रतिशत) और दालें (1 प्रतिशत) का स्थान है।

मानसून की स्थिति और खरीफ बुवाई पर असर

जून 2026 में वर्षा दीर्घकालिक औसत से 40 प्रतिशत कम रही, जिससे यह पिछले एक दशक का सबसे शुष्क जून बन गया। रिपोर्ट के अनुसार इस कमी के कारण खरीफ बुवाई का काम धीमा पड़ गया है। महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख खाद्य-उत्पादक राज्यों में मानसून की लगातार कमी से आने वाले हफ्तों में खाद्य आपूर्ति पर दबाव पड़ सकता है और कीमतें बढ़ सकती हैं।

जलाशयों की स्थिति चिंताजनक

रिपोर्ट के अनुसार, देशभर के जलाशयों में फिलहाल उनकी कुल क्षमता का महज 26 प्रतिशत पानी है, जो पिछले वर्ष इसी अवधि की तुलना में 39 प्रतिशत कम है। क्षेत्रवार देखें तो मध्य भारत में जलस्तर 32 प्रतिशत है, उत्तर भारत में 29 प्रतिशत और पश्चिम भारत में 28 प्रतिशत। सबसे चिंताजनक स्थिति दक्षिण भारत (20 प्रतिशत) और पूर्वी भारत (19 प्रतिशत) में है। यह ऐसे समय में आया है जब खरीफ सीज़न की सिंचाई ज़रूरतें चरम पर होती हैं।

आगे क्या होगा

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुमान के अनुसार जुलाई 2026 में भी वर्षा सामान्य से कम रहने की संभावना है, जिससे मानसून सीज़न और खरीफ उत्पादन को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी। गौरतलब है कि यदि जुलाई में भी बारिश की कमी जारी रही, तो अगस्त-सितंबर में खाद्य महंगाई के आंकड़ों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह तस्वीर का सिर्फ एक हिस्सा है। जून में 40% वर्षा की कमी और जलाशयों का 26% भरा होना यह बताता है कि यह स्थिरता अस्थायी हो सकती है — असली दबाव अगस्त-सितंबर में आएगा जब खरीफ फसलों की कटाई के आंकड़े सामने आएंगे। गौरतलब है कि भारत में खाद्य महंगाई ऐतिहासिक रूप से मानसून की कमी के दो से तीन महीने बाद उभरती है, यानी सितंबर-अक्टूबर 2026 की CPI संख्याएँ असली परीक्षा होंगी। IMD का जुलाई पूर्वानुमान भी कमज़ोर है — ऐसे में सरकार के पास बफर स्टॉक नीति और आयात शुल्क समायोजन जैसे विकल्पों पर अभी से विचार शुरू करने की ज़रूरत है।
RashtraPress
6 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत में कमज़ोर मानसून के बावजूद खाद्य कीमतें स्थिर क्यों हैं?
एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की रिपोर्ट के अनुसार, अभी तक पिछले सीज़न के भंडार और आपूर्ति शृंखला ने कीमतों को थामे रखा है। हालांकि, रिपोर्ट यह भी चेतावनी देती है कि यदि मानसून की कमी जारी रही तो आने वाले हफ्तों में कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
जून 2026 में मानसून कितना कमज़ोर रहा?
जून 2026 में वर्षा दीर्घकालिक औसत से 40 प्रतिशत कम रही, जिससे यह पिछले एक दशक का सबसे शुष्क जून बन गया। 3 जुलाई 2026 तक कुल मौसमी वर्षा भी दीर्घकालिक औसत से 31 प्रतिशत पीछे है।
भारत के जलाशयों की स्थिति कैसी है?
रिपोर्ट के अनुसार, देशभर के जलाशयों में उनकी कुल क्षमता का केवल 26 प्रतिशत पानी बचा है, जो पिछले वर्ष इसी समय की तुलना में 39 प्रतिशत कम है। दक्षिण भारत (20 प्रतिशत) और पूर्वी भारत (19 प्रतिशत) में स्थिति सबसे गंभीर है।
किन राज्यों पर खाद्य आपूर्ति का सबसे अधिक खतरा है?
महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश — ये चारों प्रमुख खाद्य-उत्पादक राज्य हैं जहाँ मानसून की लगातार कमी के कारण खरीफ बुवाई धीमी पड़ी है। रिपोर्ट के अनुसार इन राज्यों में स्थिति सुधरी नहीं तो खाद्य आपूर्ति पर सीधा असर पड़ सकता है।
जुलाई 2026 में मानसून को लेकर क्या अनुमान है?
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार जुलाई 2026 में भी वर्षा सामान्य से कम रहने की संभावना है। इससे खरीफ बुवाई सीज़न और खाद्य उत्पादन को लेकर चिंता और गहरी हो गई है।
राष्ट्र प्रेस
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