कमजोर मानसून के बावजूद खाद्य कीमतें स्थिर, लेकिन 31% बारिश की कमी से आगे खतरे के संकेत
सारांश
मुख्य बातें
एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भारत में इस वर्ष मानसून के कमज़ोर रहने के बावजूद खाद्य वस्तुओं की कीमतें फिलहाल नियंत्रण में हैं। 3 जुलाई 2026 तक देशभर में कुल वर्षा दीर्घकालिक औसत से 31 प्रतिशत कम दर्ज की गई है, जो आने वाले हफ्तों में खाद्य आपूर्ति और मूल्य स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।
साप्ताहिक खुदरा कीमतों का हाल
रिपोर्ट में उद्धृत साप्ताहिक खुदरा आंकड़ों के मुताबिक, सब्जियों की कीमतों में 1.5 प्रतिशत और अंडों में 1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही अनाज में 0.5 प्रतिशत और तेल व फैट में 0.2 प्रतिशत की मामूली वृद्धि देखी गई है। सालाना आधार पर देखें तो तेल और फैट सबसे महंगे हुए हैं — इनकी कीमतें 11 प्रतिशत बढ़ी हैं। इसके बाद अंडे (6 प्रतिशत), सब्जियाँ, दूध और मसाले (प्रत्येक 3 प्रतिशत), अनाज (2 प्रतिशत) और दालें (1 प्रतिशत) का स्थान है।
मानसून की स्थिति और खरीफ बुवाई पर असर
जून 2026 में वर्षा दीर्घकालिक औसत से 40 प्रतिशत कम रही, जिससे यह पिछले एक दशक का सबसे शुष्क जून बन गया। रिपोर्ट के अनुसार इस कमी के कारण खरीफ बुवाई का काम धीमा पड़ गया है। महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे प्रमुख खाद्य-उत्पादक राज्यों में मानसून की लगातार कमी से आने वाले हफ्तों में खाद्य आपूर्ति पर दबाव पड़ सकता है और कीमतें बढ़ सकती हैं।
जलाशयों की स्थिति चिंताजनक
रिपोर्ट के अनुसार, देशभर के जलाशयों में फिलहाल उनकी कुल क्षमता का महज 26 प्रतिशत पानी है, जो पिछले वर्ष इसी अवधि की तुलना में 39 प्रतिशत कम है। क्षेत्रवार देखें तो मध्य भारत में जलस्तर 32 प्रतिशत है, उत्तर भारत में 29 प्रतिशत और पश्चिम भारत में 28 प्रतिशत। सबसे चिंताजनक स्थिति दक्षिण भारत (20 प्रतिशत) और पूर्वी भारत (19 प्रतिशत) में है। यह ऐसे समय में आया है जब खरीफ सीज़न की सिंचाई ज़रूरतें चरम पर होती हैं।
आगे क्या होगा
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुमान के अनुसार जुलाई 2026 में भी वर्षा सामान्य से कम रहने की संभावना है, जिससे मानसून सीज़न और खरीफ उत्पादन को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी। गौरतलब है कि यदि जुलाई में भी बारिश की कमी जारी रही, तो अगस्त-सितंबर में खाद्य महंगाई के आंकड़ों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।