वित्त वर्ष 27 की शुरुआत में खाद्य मांग स्थिर, मध्य पूर्व संकट से इनपुट लागत पर दबाव: JM Financial
सारांश
मुख्य बातें
जेएम फाइनेंशियल रिसर्च की 27 मई 2026 को जारी रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत में अधिकांश बड़ी खाद्य कंपनियों की मांग स्थिर बनी हुई है। हालांकि, मध्य पूर्व संकट के कारण इनपुट लागत में वृद्धि और सप्लाई चेन पर दबाव के चलते निकट अवधि में मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है।
मुख्य घटनाक्रम
रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम एशिया तनाव के कारण मार्च 2026 में कच्चे माल, पैकेजिंग और पाम तेल की कीमतों में उल्लेखनीय इजाफा हुआ। मुद्रा और सप्लाई चेन पर भी इस संकट का सीधा असर देखा गया। इन परिस्थितियों में अधिक कंपनियों ने अपने उत्पादों की कीमतों में 3 से 7 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की है।
रिपोर्ट में कहा गया है, 'वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के शुरुआती रुझान मूल्य वृद्धि के बाद स्थिर मात्रा की ओर इशारा करते हैं। हालांकि, मांग पर बारीकी से नज़र रखने की ज़रूरत है।'
चौथी तिमाही का प्रदर्शन
जनवरी-मार्च 2026 तिमाही (वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही) में समग्र उपभोक्ता मांग में व्यापक स्थिरता देखी गई। इसका मुख्य कारण कम महंगाई और जीएसटी दरों में कटौती का उपभोक्ताओं को मिला लाभ रहा।
रिपोर्ट के अनुसार, 'खाद्य एवं पेय पदार्थ ने उच्च गुणवत्ता वाले खाद्य पदार्थों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन जारी रखा है। अधिकांश कंपनियों में बिक्री वृद्धि में मात्रा-आधारित तेजी देखी गई है, मार्जिन प्रोफाइल मोटे तौर पर स्थिर है, जो कम मूल्य वृद्धि और उत्पादन से समर्थित है।'
ग्रामीण और शहरी खपत का रुख
रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि घरेलू खपत भारत की अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख स्तंभ बन चुकी है। देश का बढ़ता मध्यम वर्ग ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्वास्थ्य सेवा और आवास जैसे क्षेत्रों में मांग को गति दे रहा है।
कृषि और गैर-कृषि गतिविधियों से सकारात्मक संकेत मिलने के कारण ग्रामीण खपत मज़बूत बनी हुई है। वहीं, राजकोषीय प्रोत्साहन के सहारे शहरी खपत में पिछले त्योहारी सीज़न से लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। सरकार द्वारा जीएसटी के ज़रिए खपत को बढ़ावा देने के साथ-साथ ऋण वृद्धि भी जारी है।
आम जनता और उद्योग पर असर
कंपनियों द्वारा की गई 3-7% मूल्य वृद्धि का सीधा असर आम उपभोक्ता की जेब पर पड़ सकता है, विशेषकर खाद्य तेल और पैकेज्ड खाद्य पदार्थों के मामले में। यह ऐसे समय में आया है जब महंगाई में नरमी के बाद उपभोक्ता राहत महसूस कर रहे थे।
आगे क्या
रिपोर्ट के अनुसार प्रबंधन की टिप्पणियाँ 'स्थिर से बेहतर' मांग के रुझान का संकेत देती हैं, लेकिन मध्य पूर्व संकट के दीर्घकालिक प्रभाव और वैश्विक कमोडिटी कीमतों की दिशा पर नज़र बनाए रखना ज़रूरी होगा। विश्लेषकों का मानना है कि अगली तिमाही के नतीजे इस तस्वीर को और स्पष्ट करेंगे।