वित्त मंत्रालय की मासिक समीक्षा: मध्य पूर्व तनाव के बावजूद भारत की घरेलू मांग मजबूत, व्यापार घाटा बढ़कर $333.2 अरब
सारांश
Key Takeaways
वित्त मंत्रालय की 30 अप्रैल 2026 को जारी मासिक आर्थिक समीक्षा के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से आपूर्ति श्रृंखलाओं में बड़ी रुकावटें पैदा हुई हैं, लेकिन मजबूत घरेलू मांग, नीतिगत बफर, लचीली वित्तीय प्रणाली और सरकारी निवेश मिलकर भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान कर रहे हैं। रिपोर्ट में मार्च 2026 में वाहनों और ट्रैक्टरों की खुदरा बिक्री को मांग की मजबूती का प्रमाण बताया गया है।
मांग और आर्थिक गतिविधियों का ताज़ा हाल
समीक्षा में कहा गया है कि आने वाले समय में मांग और आर्थिक गतिविधियाँ मुख्यतः इनपुट मूल्यों और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर पड़ने वाले दबाव से तय होंगी। रिपोर्ट के अनुसार, मध्य पूर्व में 2026 की दूसरी छमाही तक स्थिति में सुधार की संभावना है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर आपूर्ति श्रृंखलाएँ पहले से ही दबाव में हैं।
राजकोषीय स्थिति और सरकार की तैयारी
समीक्षा में रेखांकित किया गया कि उभरती चुनौतियों के बावजूद केंद्र सरकार वित्त वर्ष 2026-27 में विवेकपूर्ण राजकोषीय स्थिति के साथ प्रवेश कर रही है। बजट में सकल कर राजस्व में 0.8% वृद्धि का अनुमान लगाया गया है, जो ऐतिहासिक औसत से कम है। साथ ही, सार्वजनिक खाते में आर्थिक स्थिरीकरण कोष का निर्माण राजकोषीय हस्तक्षेपों के लिए गुंजाइश बनाता है। पश्चिम एशिया संघर्ष के लंबे समय तक जारी रहने की स्थिति में 2026-27 में राजस्व प्राप्ति और व्यय प्रतिबद्धताओं दोनों पर सीधा असर पड़ने की चेतावनी भी दी गई है।
व्यापार घाटे में उल्लेखनीय वृद्धि
बाह्य क्षेत्र के आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर $333.2 अरब हो गया, जो वित्त वर्ष 2025 में $283.5 अरब था। कुल व्यापार घाटा भी इसी अवधि में $94.7 अरब से बढ़कर $119.3 अरब हो गया। समीक्षा में स्पष्ट किया गया है कि यह प्रवृत्ति वित्त वर्ष 2027 में भी जारी रहने की संभावना है और घाटा तथा चालू खाता घाटा और अधिक बढ़ सकता है।
ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति के जोखिम
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि मध्य पूर्व संघर्ष के लंबे समय तक चलने की स्थिति में ऊर्जा और उर्वरक आपूर्ति में अनिश्चितता बढ़ेगी। इससे मुद्रास्फीति, राजकोषीय घाटे और बाह्य घाटे के जोखिम बढ़ने की संभावना है, जबकि आर्थिक विकास दर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। राज्यों की राजकोषीय स्थिति का आकलन भी इस संदर्भ में जरूरी बताया गया है, क्योंकि कुल सार्वजनिक व्यय में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है।
युवाओं के लिए एआई-सुरक्षित कौशल पर जोर
समीक्षा में यह भी कहा गया कि युवाओं में एआई-सुरक्षित और टिकाऊ व्यापार कौशल को बढ़ावा देने से घरेलू विनिर्माण और सेवा क्षेत्र को समर्थन मिलेगा और निर्यात के नए अवसर पैदा होंगे। नीति से मध्यम अवधि की राजकोषीय और बाह्य स्थिरता की रक्षा करने की उम्मीद जताई गई है। आने वाले महीनों में सरकार की नीतिगत प्रतिक्रिया इस बात का संकेत देगी कि वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत अपनी विकास गति को किस हद तक बनाए रख सकता है।