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खरीफ बुआई 2026: अल नीनो और कमजोर मानसून से रकबा घटकर 1016.57 लाख हेक्टेयर, धान 14.37% पिछड़ा

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खरीफ बुआई 2026: अल नीनो और कमजोर मानसून से रकबा घटकर 1016.57 लाख हेक्टेयर, धान 14.37% पिछड़ा

सारांश

अल नीनो और कमजोर मानसून की दोहरी मार से इस साल खरीफ बुआई 1,016.57 लाख हेक्टेयर पर सिमट गई — पिछले साल से करीब 21 लाख हेक्टेयर कम। धान का रकबा 14.37% घटा, जिससे आगामी महीनों में चावल की कीमतों और खाद्य सुरक्षा पर दबाव की आशंका बढ़ गई है।

मुख्य बातें

14 अगस्त 2026 तक खरीफ बुआई का कुल रकबा 1,016.57 लाख हेक्टेयर — पिछले साल के 1,037.52 लाख हेक्टेयर से करीब 21 लाख हेक्टेयर कम।
धान का रकबा 379.07 लाख हेक्टेयर — पिछले साल के मुकाबले 14.37 प्रतिशत की गिरावट; कारण मानसून की कमी और अल नीनो ।
दालें (उड़द, मूंग) : 108.14 लाख हेक्टेयर — लगभग स्थिर; मोटे अनाज : 172.96 लाख हेक्टेयर ; कपास : 107.30 लाख हेक्टेयर ।
CCEA ने मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए 14 खरीफ फसलों के MSP में बढ़ोतरी को मंजूरी दी।
मूंग पर किसानों को उत्पादन लागत पर 61% का सर्वाधिक मार्जिन अनुमानित; अन्य फसलों पर न्यूनतम 50% ।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा सोमवार, 17 अगस्त 2026 को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, चालू खरीफ सीजन में 14 अगस्त 2026 तक देशभर में फसलों की कुल बुआई का रकबा 1,016.57 लाख हेक्टेयर रहा — जो पिछले साल की समान अवधि के 1,037.52 लाख हेक्टेयर से करीब 21 लाख हेक्टेयर कम है। मंत्रालय के अनुसार, इस गिरावट की मुख्य वजह इस साल मानसून की कमी और अल नीनो मौसम पैटर्न का प्रतिकूल प्रभाव है।

धान का रकबा सबसे ज़्यादा प्रभावित

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में धान की बुआई का क्षेत्रफल 379.07 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 393.44 लाख हेक्टेयर था। यह 14.37 प्रतिशत की उल्लेखनीय कमी है। धान एक जल-गहन फसल है और मानसून की अनिश्चितता का सबसे सीधा असर इसी पर पड़ता है। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई प्रमुख धान उत्पादक राज्यों — जैसे पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ — में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है।

दलहन, मोटे अनाज और नकदी फसलों की स्थिति

उड़द और मूंग जैसी दालों का बुआई रकबा 108.14 लाख हेक्टेयर पर लगभग स्थिर रहा — पिछले साल यह 108.49 लाख हेक्टेयर था। कम सिंचाई की ज़रूरत के कारण ये फसलें अपेक्षाकृत कम प्रभावित हुईं।

ज्वार, बाजरा और रागी सहित मोटे अनाजों (मिलेट्स) का रकबा 172.96 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल के 177.13 लाख हेक्टेयर से कम है। गन्ने की बुआई 58.31 लाख हेक्टेयर पर पहुंची, जबकि पिछले साल यह 58.62 लाख हेक्टेयर थी। कपास का रकबा 107.30 लाख हेक्टेयर रहा — पिछले साल के 108.26 लाख हेक्टेयर के लगभग बराबर।

सरकार की प्रतिक्रिया: MSP में बढ़ोतरी

बुआई में गिरावट की पृष्ठभूमि में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। यह बढ़ोतरी केंद्रीय बजट 2018-19 की उस प्रतिबद्धता के अनुरूप है, जिसमें MSP को अखिल भारतीय औसत उत्पादन लागत के कम से कम 1.5 गुना पर तय करने का वादा किया गया था।

एक सरकारी बयान के अनुसार, उत्पादन लागत पर किसानों को मिलने वाला अनुमानित मार्जिन मूंग (61%) के मामले में सर्वाधिक है, इसके बाद बाजरा (56%), मक्का (56%) और तुअर/अरहर (54%) का स्थान है। शेष फसलों पर कम से कम 50 प्रतिशत मार्जिन का अनुमान है।

आम जनता और किसानों पर असर

धान के रकबे में कमी से आगामी महीनों में चावल की उपलब्धता और कीमतों पर दबाव पड़ सकता है — विशेषकर तब, जब सरकारी बफर स्टॉक की स्थिति पहले से ही निगरानी में है। गौरतलब है कि खाद्य मुद्रास्फीति पहले से ही आम उपभोक्ता के बजट पर असर डाल रही है। हालांकि, दालों और कपास के रकबे में स्थिरता कुछ राहत देती है।

हाल के वर्षों में सरकार ने दालों, तिलहन और न्यूट्री-सीरियल्स की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए ऊंचे MSP की पेशकश की है — और इस सीजन के आंकड़े बताते हैं कि यह नीति आंशिक रूप से काम कर रही है।

आगे क्या

मानसून की प्रगति और अल नीनो के असर पर नज़र रखते हुए कृषि मंत्रालय अगले कुछ हफ्तों में अद्यतन आंकड़े जारी करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगस्त के अंत तक मानसून की स्थिति अंतिम खरीफ उत्पादन अनुमान को निर्णायक रूप से प्रभावित करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो पहले से ही आम उपभोक्ता की थाली पर असर डाल रही है। अल नीनो की आवृत्ति बढ़ रही है, लेकिन भारत की फसल बीमा और सिंचाई योजनाओं की ज़मीनी पहुंच अब भी सीमित है — यही वह अंतर है जो हर बार संकट को और गहरा करता है। MSP में बढ़ोतरी किसानों को आंशिक राहत देती है, पर जब बुआई ही नहीं हुई तो समर्थन मूल्य का लाभ किसे मिलेगा? असली सवाल यह है कि जलवायु-अनुकूल कृषि नीति कब तक प्रतीक्षा सूची में रहेगी।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 के खरीफ सीजन में बुआई का रकबा कितना रहा?
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, 14 अगस्त 2026 तक खरीफ बुआई का कुल रकबा 1,016.57 लाख हेक्टेयर रहा — जो पिछले साल की समान अवधि के 1,037.52 लाख हेक्टेयर से करीब 21 लाख हेक्टेयर कम है।
धान की बुआई में इस साल इतनी कमी क्यों आई?
इस साल मानसून की कमी और अल नीनो मौसम पैटर्न के प्रतिकूल प्रभाव के कारण धान का रकबा 379.07 लाख हेक्टेयर रहा — पिछले साल के 393.44 लाख हेक्टेयर से 14.37 प्रतिशत कम। धान जल-गहन फसल है, इसलिए कम बारिश का असर सबसे पहले इसी पर पड़ता है।
खरीफ MSP 2026-27 में किस फसल पर सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी हुई?
CCEA द्वारा मंजूर MSP के अनुसार, मूंग पर किसानों को उत्पादन लागत पर 61% का सर्वाधिक मार्जिन मिलने का अनुमान है। इसके बाद बाजरा और मक्का (56%-56%) और तुअर/अरहर (54%) का स्थान है; शेष फसलों पर कम से कम 50% मार्जिन अनुमानित है।
अल नीनो का खरीफ फसलों पर क्या असर पड़ता है?
अल नीनो एक मौसम पैटर्न है जो भारतीय मानसून को कमजोर करता है — जिससे कम और अनियमित वर्षा होती है। इसका सीधा असर जल-निर्भर खरीफ फसलों जैसे धान, मोटे अनाज और गन्ने पर पड़ता है, जिससे बुआई और उत्पादन दोनों घटते हैं।
खरीफ रकबे में कमी से आम उपभोक्ता पर क्या असर पड़ेगा?
धान के रकबे में गिरावट से आगामी महीनों में चावल की आपूर्ति पर दबाव पड़ सकता है और कीमतें बढ़ सकती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब खाद्य मुद्रास्फीति पहले से ही उपभोक्ताओं के बजट को प्रभावित कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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