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खरीफ बुवाई 2026: 17 जुलाई तक रकबा 658.19 लाख हेक्टेयर, पिछले साल से 42 लाख हेक्टेयर कम

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खरीफ बुवाई 2026: 17 जुलाई तक रकबा 658.19 लाख हेक्टेयर, पिछले साल से 42 लाख हेक्टेयर कम

सारांश

एल नीनो की मार से इस खरीफ सीजन में 17 जुलाई तक बुवाई रकबा 658.19 लाख हेक्टेयर पर सिमट गया — पिछले साल से 42 लाख हेक्टेयर कम। धान, दलहन, मोटे अनाज और गन्ना — सभी पिछड़े। सरकार ने MSP बढ़ाकर किसानों को राहत देने की कोशिश की है, लेकिन असली परीक्षा मानसून की आगे की चाल पर निर्भर है।

मुख्य बातें

चालू खरीफ सीजन में 17 जुलाई 2026 तक कुल बुवाई रकबा 658.19 लाख हेक्टेयर — पिछले वर्ष के 700.47 लाख हेक्टेयर से 42.28 लाख हेक्टेयर कम।
धान की बुवाई 166.41 लाख हेक्टेयर ; पिछले वर्ष 167.83 लाख हेक्टेयर थी।
दलहन (उड़द, मूंग) का रकबा घटकर 69.23 लाख हेक्टेयर ; पिछले वर्ष 81.52 लाख हेक्टेयर था।
मोटे अनाज (मिलेट्स) का रकबा 98.69 लाख हेक्टेयर ; पिछले वर्ष 127.30 लाख हेक्टेयर ।
CCEA ने विपणन सत्र 2026-27 के लिए 14 खरीफ फसलों के MSP में बढ़ोतरी को मंजूरी दी।
किसानों को उत्पादन लागत पर सर्वाधिक लाभांश मूंग पर 61% , इसके बाद बाजरा और मक्का पर 56% ।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा 21 जुलाई 2026 को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, चालू खरीफ सीजन में 17 जुलाई 2026 तक देशभर में फसलों की कुल बुवाई का रकबा 658.19 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 700.47 लाख हेक्टेयर था — यानी इस वर्ष अब तक 42.28 लाख हेक्टेयर की कमी आई है। मंत्रालय के अनुसार, इस गिरावट का प्रमुख कारण एल नीनो मौसमीय प्रभाव से उपजा कमजोर मानसून है।

फसलवार बुवाई का हाल

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, धान की बुवाई इस वर्ष 166.41 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी समय तक 167.83 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। उड़द और मूंग जैसी दलहनी फसलों का रकबा घटकर 69.23 लाख हेक्टेयर रह गया, जो पिछले वर्ष 81.52 लाख हेक्टेयर था — यानी 12.29 लाख हेक्टेयर की उल्लेखनीय कमी।

ज्वार, बाजरा और रागी सहित मोटे अनाज (श्री अन्न/मिलेट्स) का बुवाई क्षेत्र भी इस सीजन में 98.69 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले वर्ष यह 127.30 लाख हेक्टेयर था। गन्ने का रकबा भी 119.03 लाख हेक्टेयर तक सिमट गया, जो पिछले वर्ष 134.09 लाख हेक्टेयर था।

सरकार की प्रतिक्रिया: MSP में बढ़ोतरी

बुवाई में आई इस कमी के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने विपणन सत्र 2026-27 के लिए 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। यह कदम किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

यह वृद्धि केंद्रीय बजट 2018-19 में की गई उस घोषणा के अनुरूप है जिसमें MSP को अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत का कम से कम 1.5 गुना निर्धारित करने का वादा किया गया था।

किसानों को अनुमानित लाभ

आधिकारिक अनुमानों के अनुसार, उत्पादन लागत की तुलना में किसानों को सबसे अधिक लाभांश मूंग पर 61 प्रतिशत मिलेगा। बाजरा और मक्का पर 56-56 प्रतिशत तथा तूर/अरहर पर 54 प्रतिशत का लाभांश मिलने का अनुमान है। अन्य खरीफ फसलों पर किसानों को उत्पादन लागत पर लगभग 50 प्रतिशत का लाभ मिलने की संभावना जताई गई है।

दलहन-तिलहन को बढ़ावा देने की नीति

गौरतलब है कि सरकार ने हाल के वर्षों में दलहन, तिलहन और पोषक अनाज की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए इन फसलों पर अपेक्षाकृत अधिक MSP देने की नीति अपनाई है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत दलहन के आयात पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। आने वाले हफ्तों में मानसून की प्रगति यह तय करेगी कि बुवाई का यह अंतर पाटा जा सकता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो विडंबनापूर्ण है क्योंकि सरकार पिछले कई वर्षों से इन्हीं फसलों को बढ़ावा देने की नीति अपना रही है। MSP में बढ़ोतरी राहत देती है, लेकिन यदि उत्पादन ही कम रहा तो लाभांश का प्रतिशत बेमानी हो जाता है। असली सवाल यह है कि क्या मानसून की आगे की प्रगति इस कमी की भरपाई कर पाएगी, या खरीफ 2026 आयात बिल और खुदरा महंगाई दोनों पर भारी पड़ेगा।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खरीफ सीजन 2026 में अब तक बुवाई का रकबा कितना है?
कृषि मंत्रालय के अनुसार, 17 जुलाई 2026 तक खरीफ फसलों की कुल बुवाई 658.19 लाख हेक्टेयर में हुई है। यह पिछले वर्ष की इसी अवधि के 700.47 लाख हेक्टेयर से करीब 42.28 लाख हेक्टेयर कम है।
इस वर्ष खरीफ बुवाई में कमी क्यों आई है?
मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों में एल नीनो मौसमीय प्रभाव के कारण कमजोर मानसून को इस कमी का मुख्य कारण बताया गया है। कमजोर बारिश के चलते धान, दलहन, मोटे अनाज और गन्ने — सभी प्रमुख खरीफ फसलों का रकबा पिछले वर्ष से पीछे है।
खरीफ 2026-27 के लिए MSP में कितनी बढ़ोतरी हुई है?
CCEA ने विपणन सत्र 2026-27 के लिए 14 खरीफ फसलों के MSP में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। किसानों को उत्पादन लागत पर सर्वाधिक 61% लाभांश मूंग पर, बाजरा और मक्का पर 56-56%, तथा तूर/अरहर पर 54% मिलने का अनुमान है।
दलहन और मोटे अनाज की बुवाई पर क्या असर पड़ा है?
उड़द और मूंग जैसी दलहनी फसलों का रकबा घटकर 69.23 लाख हेक्टेयर रह गया, जो पिछले वर्ष 81.52 लाख हेक्टेयर था। मोटे अनाज (ज्वार, बाजरा, रागी) का रकबा भी 127.30 से घटकर 98.69 लाख हेक्टेयर पर आ गया।
सरकार दलहन और तिलहन की खेती को क्यों बढ़ावा दे रही है?
सरकार ने हाल के वर्षों में दलहन, तिलहन और पोषक अनाज पर अपेक्षाकृत अधिक MSP देने की नीति अपनाई है ताकि इन फसलों की खेती को प्रोत्साहन मिले और आयात निर्भरता कम हो। यह नीति घरेलू उत्पादन बढ़ाकर खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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