खरीफ बुवाई 2026: 17 जुलाई तक रकबा 658.19 लाख हेक्टेयर, पिछले साल से 42 लाख हेक्टेयर कम
सारांश
मुख्य बातें
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा 21 जुलाई 2026 को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, चालू खरीफ सीजन में 17 जुलाई 2026 तक देशभर में फसलों की कुल बुवाई का रकबा 658.19 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 700.47 लाख हेक्टेयर था — यानी इस वर्ष अब तक 42.28 लाख हेक्टेयर की कमी आई है। मंत्रालय के अनुसार, इस गिरावट का प्रमुख कारण एल नीनो मौसमीय प्रभाव से उपजा कमजोर मानसून है।
फसलवार बुवाई का हाल
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, धान की बुवाई इस वर्ष 166.41 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी समय तक 167.83 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी। उड़द और मूंग जैसी दलहनी फसलों का रकबा घटकर 69.23 लाख हेक्टेयर रह गया, जो पिछले वर्ष 81.52 लाख हेक्टेयर था — यानी 12.29 लाख हेक्टेयर की उल्लेखनीय कमी।
ज्वार, बाजरा और रागी सहित मोटे अनाज (श्री अन्न/मिलेट्स) का बुवाई क्षेत्र भी इस सीजन में 98.69 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले वर्ष यह 127.30 लाख हेक्टेयर था। गन्ने का रकबा भी 119.03 लाख हेक्टेयर तक सिमट गया, जो पिछले वर्ष 134.09 लाख हेक्टेयर था।
सरकार की प्रतिक्रिया: MSP में बढ़ोतरी
बुवाई में आई इस कमी के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने विपणन सत्र 2026-27 के लिए 14 खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। यह कदम किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य दिलाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
यह वृद्धि केंद्रीय बजट 2018-19 में की गई उस घोषणा के अनुरूप है जिसमें MSP को अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत का कम से कम 1.5 गुना निर्धारित करने का वादा किया गया था।
किसानों को अनुमानित लाभ
आधिकारिक अनुमानों के अनुसार, उत्पादन लागत की तुलना में किसानों को सबसे अधिक लाभांश मूंग पर 61 प्रतिशत मिलेगा। बाजरा और मक्का पर 56-56 प्रतिशत तथा तूर/अरहर पर 54 प्रतिशत का लाभांश मिलने का अनुमान है। अन्य खरीफ फसलों पर किसानों को उत्पादन लागत पर लगभग 50 प्रतिशत का लाभ मिलने की संभावना जताई गई है।
दलहन-तिलहन को बढ़ावा देने की नीति
गौरतलब है कि सरकार ने हाल के वर्षों में दलहन, तिलहन और पोषक अनाज की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए इन फसलों पर अपेक्षाकृत अधिक MSP देने की नीति अपनाई है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत दलहन के आयात पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है। आने वाले हफ्तों में मानसून की प्रगति यह तय करेगी कि बुवाई का यह अंतर पाटा जा सकता है या नहीं।