SCO शिखर सम्मेलन 2026: CGTN सर्वे में 74.6% ने माना — वैश्विक शासन में SCO की भूमिका अहम
सारांश
मुख्य बातें
शांघाई सहयोग संगठन (SCO) की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित 2026 SCO शिखर सम्मेलन के दौरान चाइना ग्लोबल टेलीविजन नेटवर्क (CGTN) द्वारा कराए गए एक अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षण में 48 देशों के 13,707 उत्तरदाताओं ने भाग लिया। सर्वे के निष्कर्षों के अनुसार, 74.6 प्रतिशत प्रतिभागियों का मानना है कि SCO विभिन्न शासन-व्यवस्थाओं वाले देशों को सहयोग का एक व्यावहारिक मार्ग प्रदान करता है।
सर्वेक्षण के प्रमुख निष्कर्ष
सर्वे में शामिल 89.6 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने यह अपील की कि सभी पक्षों को वैश्विक मामलों में समान भागीदारी के साथ-साथ संयुक्त रूप से अंतरराष्ट्रीय नियम और व्यवस्था निर्मित करनी चाहिए। उत्तरदाताओं ने व्यापार सुविधा, निवेश एवं वित्तपोषण सहयोग, तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान व पर्यटन — इन तीन क्षेत्रों में SCO के अंतरराष्ट्रीय प्रभाव को विशेष रूप से रेखांकित किया।
सर्वेक्षण के अनुसार, उत्तरदाताओं का समान मत है कि क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग, सदस्य देशों के बीच सुरक्षा सहयोग और विकास एवं वित्तीय सहायता प्रदान करने में चीन का योगदान SCO के भीतर सर्वाधिक प्रमुख रहा है। हालाँकि, यह सर्वे चाइना मीडिया ग्रुप (CMG) के अधीन CGTN द्वारा आयोजित किया गया है, इसलिए इसके निष्कर्षों को इस संदर्भ में देखा जाना उचित होगा।
25 वर्षों में व्यापार का विस्तार
SCO की स्थापना के 25 वर्षों में चीन और अन्य SCO सदस्य देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार वर्ष 2001 के 12.1 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वर्ष 2025 तक 5 खरब 23 अरब 50 करोड़ डॉलर तक पहुँच गया। यह वृद्धि SCO क्षेत्र में आर्थिक एकीकरण की गहराती जड़ों को दर्शाती है।
इस दौरान चीन-किर्गिस्तान-उज्बेकिस्तान रेलवे, SCO विकास बैंक और चीन-मध्य एशिया गैस पाइपलाइन जैसी बड़ी बुनियादी ढाँचा परियोजनाएँ आगे बढ़ रही हैं। ये परियोजनाएँ SCO के व्यावहारिक सहयोग का ठोस प्रमाण मानी जा रही हैं।
वैश्विक शासन में SCO की बढ़ती भूमिका
सर्वे के अनुसार, उत्तरदाताओं का मानना है कि SCO सच्चे बहुपक्षवाद का पालन करते हुए एक समान व व्यवस्थित बहुध्रुवीय विश्व को प्रोत्साहित करने और समावेशी आर्थिक वैश्वीकरण को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उत्तरदाताओं ने यह भी आशा व्यक्त की कि SCO बुनियादी अवसंरचना, ऊर्जा, क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में और अधिक प्रभावशाली भूमिका निभाएगा।
भारत और SCO का संदर्भ
गौरतलब है कि भारत भी SCO का एक प्रमुख सदस्य देश है और संगठन के भीतर क्षेत्रीय सहयोग, आतंकवाद-रोधी प्रयासों तथा व्यापार विस्तार में सक्रिय भागीदारी निभाता रहा है। यह सर्वे ऐसे समय में आया है जब वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य में बहुपक्षीय मंचों की प्रासंगिकता पर व्यापक बहस जारी है।
आने वाले समय में SCO के सदस्य देश बुनियादी ढाँचे, ऊर्जा साझेदारी और डिजिटल सहयोग के क्षेत्र में नए समझौतों की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।