मेघालय: CM कॉनराड संगमा ने अल नीनो से निपटने के लिए सभी विभागों को तैयारी तेज करने के निर्देश दिए
सारांश
मुख्य बातें
मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने मंगलवार, 23 जून 2026 को सभी सरकारी विभागों को संभावित अल नीनो घटना के प्रभावों से निपटने के लिए तैयारियों में तेज़ी लाने और आकस्मिक योजनाओं को ठोस कार्रवाई में बदलने के निर्देश दिए। संगमा ने स्पष्ट किया कि संकट की प्रतीक्षा करने के बजाय पूर्व-तैयारी ही जलवायु अनिश्चितताओं से बचाव का सबसे प्रभावी मार्ग है।
मेघालय जलवायु परिषद की बैठक में समीक्षा
शिलांग स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में आयोजित मेघालय जलवायु परिषद की बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री संगमा ने राज्य की तैयारियों और प्रतिक्रिया रणनीति की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में राज्यभर में वर्षा के रुझान, भूजल पुनर्भरण, मिट्टी में नमी के स्तर, संवेदनशील कृषि क्षेत्रों और जल उपलब्धता के आकलन पर विचार-विमर्श हुआ।
गौरतलब है कि अल नीनो एक वैश्विक जलवायु घटना है जो प्रायः मानसून के पैटर्न में व्यवधान, कम वर्षा, दीर्घकालिक सूखे और जल संसाधनों तथा कृषि पर अतिरिक्त दबाव से जुड़ी होती है। पूर्वानुमानों के अनुसार आने वाले महीनों में अल नीनो की स्थिति विकसित होने की आशंका है।
मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश: पहले से तैयारी ज़रूरी
संगमा ने स्वीकार किया कि मेघालय पर अल नीनो के सटीक प्रभाव को लेकर अभी अनिश्चितता बनी हुई है, परंतु उन्होंने कहा कि सरकार प्रतिकूल मौसम की स्थिति उत्पन्न होने का इंतज़ार नहीं कर सकती। उन्होंने कहा, 'हमें पहले से तैयारी करनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रत्येक विभाग की जिम्मेदारियाँ और समयसीमा स्पष्ट रूप से निर्धारित हों।' मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सभी क्षेत्रों में समन्वय और निगरानी तंत्र को और मज़बूत करने का निर्देश दिया।
जल सुरक्षा पर विशेष ज़ोर
संगमा ने जल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता वाला क्षेत्र बताते हुए मृदा एवं जल संरक्षण परियोजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन का आह्वान किया। उन्होंने विभागों को अगले छह से बारह महीनों में निम्नलिखित कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए — तालाबों और जलाशयों का गाद निष्कासन एवं जीर्णोद्धार, जल संचयन संरचनाओं का निर्माण, भूजल पुनर्भरण पहलों का विस्तार, और जलग्रहण क्षेत्र संरक्षण उपाय।
सामुदायिक भागीदारी को जन आंदोलन बनाने की पुकार
मुख्यमंत्री संगमा ने जलवायु तैयारी को केवल सरकारी अभ्यास तक सीमित न रखते हुए इसे एक व्यापक जन आंदोलन में बदलने पर बल दिया। उन्होंने ग्राम संस्थाओं, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता पर ज़ोर दिया और नागरिकों से जल संरक्षण तथा पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया।
कृषि क्षेत्र की तैयारियों की समीक्षा
बैठक में कृषि क्षेत्र की तैयारियों की भी विस्तृत समीक्षा की गई। संगमा ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बीजों और रोपण सामग्री की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, सिंचाई सहायता को मज़बूत किया जाए और जलवायु परिवर्तन के अनुकूल कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित किया जाए। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर-पूर्व भारत के कई राज्य मानसून की अनिश्चितता से जूझ रहे हैं और कृषि-निर्भर आबादी पर जलवायु जोखिम बढ़ता जा रहा है।