जलवायु परिवर्तन अस्तित्वगत संकट: मेघालय CM संगमा ने अल नीनो से निपटने के लिए तत्काल कार्रवाई का आह्वान किया
सारांश
मुख्य बातें
मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने शुक्रवार, 3 जुलाई को शिलांग में जलवायु परिवर्तन को 'अस्तित्वगत संकट' करार देते हुए अल नीनो के संभावित प्रभावों से निपटने के लिए तत्काल और समन्वित कार्रवाई का आह्वान किया। उन्होंने चेतावनी दी कि जून 2026 में मेघालय में सामान्य से 80 प्रतिशत से अधिक की चिंताजनक वर्षा कमी दर्ज की गई है, जो कृषि और जल सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है।
मुख्यमंत्री का संबोधन और मुख्य चेतावनी
संगमा 'अल नीनो की तैयारी के लिए राज्य की प्रतिक्रिया विकसित करना: खाद्य और जल सुरक्षा को मजबूत करना' विषय पर आयोजित एक कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की चुनौती नहीं है; यह हमारी वर्तमान वास्तविकता है। पूर्वानुमान भले ही बदल जाएं, लेकिन तैयारी में देरी नहीं की जा सकती।'
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि शमन उपायों को लागू करते समय लचीला, डेटा-आधारित और अनुकूल दृष्टिकोण अपनाया जाए। मुख्यमंत्री ने जोर देते हुए कहा, 'हम परिपूर्ण योजनाओं का इंतजार नहीं कर सकते। हमें अभी कार्रवाई करनी होगी। आज उठाया गया हर कदम आने वाली पीढ़ियों की सहनशीलता को आकार देगा।'
कृषि और जल सुरक्षा पर असर
जून माह में दर्ज की गई 80 प्रतिशत से अधिक वर्षा की कमी को रेखांकित करते हुए संगमा ने कहा कि कृषि उत्पादन, पेयजल उपलब्धता और ग्रामीण आजीविका पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को कम करने के लिए सक्रिय योजना अनिवार्य है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर-पूर्व भारत के कई राज्य मानसून की अनियमितता से जूझ रहे हैं।
गौरतलब है कि मेघालय, जो अपनी अत्यधिक वर्षा के लिए विश्वविख्यात है, में इस स्तर की वर्षा कमी असाधारण मानी जा रही है। जल संरक्षण, जल स्रोतों के पुनरुद्धार, बांधों और जलाशयों के निर्माण तथा अन्य जल-संरक्षण संरचनाओं जैसे एकीकृत उपायों की आवश्यकता पर मुख्यमंत्री ने विशेष बल दिया।
प्राकृतिक खेती और राष्ट्रीय पहचान
जलवायु अनुकूलन के एक प्रमुख घटक के रूप में सतत कृषि पर प्रकाश डालते हुए संगमा ने कहा कि मेघालय की प्राकृतिक खेती संबंधी पहलों को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने का एक व्यावहारिक मार्ग प्रदान करती है, लेकिन मेघालय की अनूठी भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल कृषि पद्धतियों में नवाचार की भी आवश्यकता है।
समुदाय की भागीदारी का आह्वान
संगमा ने निर्वाचित प्रतिनिधियों, पारंपरिक संस्थाओं, स्वयं सहायता समूहों, वैज्ञानिकों, छात्रों और युवा संगठनों से जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयासों में सक्रिय योगदान देने का आग्रह किया। उनका यह संदेश स्पष्ट था कि जलवायु संकट से लड़ाई केवल सरकारी तंत्र तक सीमित नहीं रह सकती।
आगे की राह
इस कार्यशाला से निकलने वाले सुझाव और कार्य-योजना मेघालय की अल नीनो तैयारी रणनीति का आधार बनेंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, राज्य को अल्पकालिक राहत उपायों के साथ-साथ दीर्घकालिक जल प्रबंधन और कृषि विविधीकरण पर ध्यान केंद्रित करना होगा, ताकि भविष्य में इस तरह की जलवायु चुनौतियों का सामना अधिक सक्षमता से किया जा सके।