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अल नीनो की चेतावनी: श्रीलंका ने किसानों से कहा — जल संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करें

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अल नीनो की चेतावनी: श्रीलंका ने किसानों से कहा — जल संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करें

सारांश

अल नीनो बनने की संभावना 80-90 प्रतिशत तक पहुँचने के बीच श्रीलंका ने किसानों को सतर्क किया है। जुलाई-अगस्त में सामान्य से कम वर्षा, सूखे का खतरा और फरवरी 2027 तक प्रभाव बने रहने की आशंका — कृषि से लेकर पेयजल और ऊर्जा उत्पादन तक सब दाँव पर है।

मुख्य बातें

श्रीलंका के कृषि मंत्रालय ने 11 जून 2026 को किसानों को अल नीनो के मद्देनज़र जल संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की सलाह दी।
महानिदेशक तुषारा विक्रमाराच्ची ने किसानों से कम अवधि की फसलें अपनाने और कृषि अधिकारियों के निर्देशों का पालन करने का आग्रह किया।
मौसम विभाग के अनुसार जुलाई-अगस्त में सामान्य से काफी कम वर्षा संभव; प्रभाव फरवरी 2027 तक बने रहने की आशंका।
WMO के अनुसार जून-अगस्त में अल नीनो बनने की संभावना 80% , बाद में 90% ; मज़बूत रूप लेने की संभावना 40% ।
कृषि, सिंचाई, पेयजल, ऊर्जा उत्पादन और जनस्वास्थ्य सभी पर प्रतिकूल असर पड़ने की चेतावनी।

श्रीलंका के कृषि मंत्रालय ने 11 जून 2026 को किसानों को अल नीनो के संभावित दुष्प्रभावों के मद्देनज़र जल संसाधनों का अत्यंत सतर्कता से उपयोग करने की सलाह जारी की है। कृषि विभाग ने आगाह किया है कि आने वाले महीनों में वर्षा में उल्लेखनीय कमी और सूखे जैसी परिस्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं, जिससे कृषि और जनजीवन दोनों प्रभावित होंगे।

कृषि विभाग का किसानों को निर्देश

कृषि मंत्रालय के महानिदेशक तुषारा विक्रमाराच्ची ने किसानों से एहतियात के तौर पर कम अवधि में तैयार होने वाली फसलों की खेती अपनाने का आग्रह किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि याला कृषि मौसम के दौरान किसानों को घबराने की आवश्यकता नहीं है, परंतु जल संसाधनों का सोच-समझकर उपयोग करना और कृषि अधिकारियों के दिशा-निर्देशों का पालन करना ज़रूरी है। कृषि विभाग ने यह भी बताया कि वह मौसम की स्थिति पर निरंतर निगरानी बनाए हुए है और परिस्थितियों में बदलाव होने पर किसानों को तुरंत आवश्यक सलाह दी जाएगी।

मौसम विज्ञान विभाग की चेतावनी

मौसम विज्ञान विभाग के कार्यवाहक महानिदेशक अजीत विजेमन्ना ने बुधवार को कहा कि यदि अल नीनो विकसित होता है, तो जुलाई और अगस्त में श्रीलंका में सामान्य से काफी कम वर्षा हो सकती है, जिससे सूखे का खतरा बढ़ जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि कम बारिश का असर कृषि, सिंचाई, पेयजल आपूर्ति, ऊर्जा उत्पादन और जनस्वास्थ्य — सभी क्षेत्रों पर पड़ सकता है। विजेमन्ना के अनुसार, यदि इस वर्ष अल नीनो की स्थिति बनती है, तो इसका प्रभाव फरवरी 2027 तक बना रह सकता है।

वैश्विक मौसम संगठन की भविष्यवाणी

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने कहा है कि जून से अगस्त के बीच अल नीनो बनने की आशंका 80 प्रतिशत है, जबकि इसके बाद यह संभावना 90 प्रतिशत तक पहुँच जाती है। मौसम विभाग के अनुमानों के अनुसार, नवंबर, दिसंबर और जनवरी के दौरान अल नीनो के एक मज़बूत रूप लेने की संभावना लगभग 40 प्रतिशत है। WMO के महासचिव सेलेस्टे साउलो ने हाल ही में चेतावनी दी कि दुनिया को एक मज़बूत अल नीनो के लिए तैयार रहना चाहिए — यह घटना सूखे और अत्यधिक वर्षा दोनों को बढ़ा सकती है तथा भूमि और महासागरों में हीटवेव के जोखिम को भी तेज़ करेगी।

आम जनता और कृषि पर असर

साउलो ने इस बात पर ज़ोर दिया कि समय रहते जारी किए गए मौसम पूर्वानुमान और चेतावनियाँ लोगों की जान बचाने और अल नीनो के प्रभाव को कम करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अल नीनो का प्रभाव अपेक्षा के अनुसार बढ़ता है, तो दक्षिण एशिया के अन्य देशों की तरह श्रीलंका को भी जल प्रबंधन और कृषि योजना पर विशेष ध्यान देना होगा, ताकि संभावित नुकसान को सीमित किया जा सके।

आगे क्या होगा

कृषि विभाग ने संकेत दिया है कि मौसम की स्थिति के आधार पर किसानों को चरणबद्ध तरीके से अद्यतन दिशा-निर्देश जारी किए जाते रहेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब श्रीलंका अभी भी हाल के आर्थिक संकट के बाद अपनी कृषि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है — ऐसे में अल नीनो का संभावित प्रकोप देश की खाद्य सुरक्षा के लिए एक नई चुनौती बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस देश से आ रही है जो हाल ही में गंभीर आर्थिक संकट से उबरा है और जिसकी कृषि अर्थव्यवस्था अभी नाज़ुक दौर में है। WMO की 80-90 प्रतिशत संभावना को देखते हुए, महज़ सलाह जारी करना पर्याप्त नहीं — सवाल यह है कि क्या सरकार के पास सूखा-राहत के लिए पर्याप्त बजटीय और संस्थागत तैयारी है। दक्षिण एशिया में अल नीनो के पिछले चक्रों में श्रीलंका को खाद्य आयात पर निर्भर होना पड़ा था; इस बार यदि समन्वित जल-प्रबंधन नीति नहीं बनी, तो किसानों को सलाह देना महज़ कागज़ी कवायद बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्रीलंका में अल नीनो का कृषि पर क्या असर पड़ सकता है?
अल नीनो के कारण जुलाई-अगस्त में सामान्य से काफी कम वर्षा होने की आशंका है, जिससे सूखे जैसी स्थिति बन सकती है। इससे कृषि उत्पादन, सिंचाई जल की उपलब्धता और खाद्य सुरक्षा सीधे प्रभावित हो सकती है।
श्रीलंका के कृषि विभाग ने किसानों को क्या सलाह दी है?
कृषि मंत्रालय के महानिदेशक तुषारा विक्रमाराच्ची ने किसानों से कम अवधि में तैयार होने वाली फसलें उगाने और जल संसाधनों का सोच-समझकर उपयोग करने को कहा है। साथ ही कृषि अधिकारियों के दिशा-निर्देशों का पालन करने का आग्रह किया गया है।
अल नीनो का प्रभाव कब तक रह सकता है?
मौसम विज्ञान विभाग के कार्यवाहक महानिदेशक अजीत विजेमन्ना के अनुसार, यदि इस वर्ष अल नीनो विकसित होता है तो इसका प्रभाव फरवरी 2027 तक बना रह सकता है। नवंबर-जनवरी के दौरान इसके मज़बूत रूप लेने की संभावना लगभग 40 प्रतिशत बताई गई है।
WMO ने अल नीनो को लेकर क्या चेतावनी दी है?
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के अनुसार जून से अगस्त के बीच अल नीनो बनने की संभावना 80 प्रतिशत है, जो बाद में 90 प्रतिशत तक पहुँच सकती है। WMO महासचिव सेलेस्टे साउलो ने कहा कि यह घटना सूखे, अत्यधिक वर्षा और हीटवेव — तीनों के जोखिम को बढ़ा सकती है।
अल नीनो से श्रीलंका के किन क्षेत्रों पर असर पड़ेगा?
मौसम विभाग के अनुसार अल नीनो का प्रतिकूल असर कृषि, सिंचाई, पेयजल आपूर्ति, ऊर्जा उत्पादन और जनस्वास्थ्य — सभी पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों ने जल प्रबंधन और कृषि योजना पर विशेष ध्यान देने की सिफारिश की है।
राष्ट्र प्रेस
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