अल नीनो की चेतावनी: श्रीलंका ने किसानों से कहा — जल संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करें
सारांश
मुख्य बातें
श्रीलंका के कृषि मंत्रालय ने 11 जून 2026 को किसानों को अल नीनो के संभावित दुष्प्रभावों के मद्देनज़र जल संसाधनों का अत्यंत सतर्कता से उपयोग करने की सलाह जारी की है। कृषि विभाग ने आगाह किया है कि आने वाले महीनों में वर्षा में उल्लेखनीय कमी और सूखे जैसी परिस्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं, जिससे कृषि और जनजीवन दोनों प्रभावित होंगे।
कृषि विभाग का किसानों को निर्देश
कृषि मंत्रालय के महानिदेशक तुषारा विक्रमाराच्ची ने किसानों से एहतियात के तौर पर कम अवधि में तैयार होने वाली फसलों की खेती अपनाने का आग्रह किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि याला कृषि मौसम के दौरान किसानों को घबराने की आवश्यकता नहीं है, परंतु जल संसाधनों का सोच-समझकर उपयोग करना और कृषि अधिकारियों के दिशा-निर्देशों का पालन करना ज़रूरी है। कृषि विभाग ने यह भी बताया कि वह मौसम की स्थिति पर निरंतर निगरानी बनाए हुए है और परिस्थितियों में बदलाव होने पर किसानों को तुरंत आवश्यक सलाह दी जाएगी।
मौसम विज्ञान विभाग की चेतावनी
मौसम विज्ञान विभाग के कार्यवाहक महानिदेशक अजीत विजेमन्ना ने बुधवार को कहा कि यदि अल नीनो विकसित होता है, तो जुलाई और अगस्त में श्रीलंका में सामान्य से काफी कम वर्षा हो सकती है, जिससे सूखे का खतरा बढ़ जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि कम बारिश का असर कृषि, सिंचाई, पेयजल आपूर्ति, ऊर्जा उत्पादन और जनस्वास्थ्य — सभी क्षेत्रों पर पड़ सकता है। विजेमन्ना के अनुसार, यदि इस वर्ष अल नीनो की स्थिति बनती है, तो इसका प्रभाव फरवरी 2027 तक बना रह सकता है।
वैश्विक मौसम संगठन की भविष्यवाणी
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने कहा है कि जून से अगस्त के बीच अल नीनो बनने की आशंका 80 प्रतिशत है, जबकि इसके बाद यह संभावना 90 प्रतिशत तक पहुँच जाती है। मौसम विभाग के अनुमानों के अनुसार, नवंबर, दिसंबर और जनवरी के दौरान अल नीनो के एक मज़बूत रूप लेने की संभावना लगभग 40 प्रतिशत है। WMO के महासचिव सेलेस्टे साउलो ने हाल ही में चेतावनी दी कि दुनिया को एक मज़बूत अल नीनो के लिए तैयार रहना चाहिए — यह घटना सूखे और अत्यधिक वर्षा दोनों को बढ़ा सकती है तथा भूमि और महासागरों में हीटवेव के जोखिम को भी तेज़ करेगी।
आम जनता और कृषि पर असर
साउलो ने इस बात पर ज़ोर दिया कि समय रहते जारी किए गए मौसम पूर्वानुमान और चेतावनियाँ लोगों की जान बचाने और अल नीनो के प्रभाव को कम करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अल नीनो का प्रभाव अपेक्षा के अनुसार बढ़ता है, तो दक्षिण एशिया के अन्य देशों की तरह श्रीलंका को भी जल प्रबंधन और कृषि योजना पर विशेष ध्यान देना होगा, ताकि संभावित नुकसान को सीमित किया जा सके।
आगे क्या होगा
कृषि विभाग ने संकेत दिया है कि मौसम की स्थिति के आधार पर किसानों को चरणबद्ध तरीके से अद्यतन दिशा-निर्देश जारी किए जाते रहेंगे। यह ऐसे समय में आया है जब श्रीलंका अभी भी हाल के आर्थिक संकट के बाद अपनी कृषि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है — ऐसे में अल नीनो का संभावित प्रकोप देश की खाद्य सुरक्षा के लिए एक नई चुनौती बन सकता है।