17 जुलाई 2026
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तेलंगाना में अल नीनो से 40% वर्षा की कमी, रेवंत रेड्डी सरकार ने केंद्र से विशेष दल और वित्तीय सहायता माँगी

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तेलंगाना में अल नीनो से 40% वर्षा की कमी, रेवंत रेड्डी सरकार ने केंद्र से विशेष दल और वित्तीय सहायता माँगी

सारांश

तेलंगाना में अल नीनो के चलते 40% वर्षा की कमी ने कृषि, पेयजल और बिजली आपूर्ति को खतरे में डाल दिया है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की कैबिनेट ने केंद्र से विशेष दल और वित्तीय मदद माँगने के साथ-साथ जिला स्तर पर आपातकालीन उपायों के निर्देश दिए हैं।

मुख्य बातें

अल नीनो के प्रभाव से तेलंगाना में 40 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की जा रही है।
रेवंत रेड्डी की अध्यक्षता में 17 जुलाई को हुई कैबिनेट बैठक में केंद्र से विशेष दल और वित्तीय सहायता माँगने का निर्णय लिया गया।
केंद्र को भेजे जाने वाले पत्र में फसल नुकसान, पेयजल संकट, सिंचाई चुनौतियाँ और कृषि श्रमिकों की दुर्दशा का विवरण होगा।
जिला कलेक्टरों को सतर्क रहने और बिना लोड शेडिंग के निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
किसानों से कम जल खपत वाली फसलों को अपनाने की अपील की गई।
राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष चिन्ना रेड्डी के नेतृत्व में कृषि विशेषज्ञों की टीम विशेष रिपोर्ट तैयार करेगी।

तेलंगाना में अल नीनो के प्रभाव से 40 प्रतिशत तक वर्षा की कमी दर्ज की जा रही है, जिसके चलते मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की अध्यक्षता में शुक्रवार, 17 जुलाई को हुई कैबिनेट बैठक में राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से स्थिति का आकलन करने, संकटकालीन योजनाएँ लागू करने और वित्तीय सहायता प्रदान करने हेतु विशेष दल भेजने का अनुरोध करने का निर्णय लिया। मौसम विभाग की चेतावनी के अनुसार आने वाले दिनों में स्थिति और विकट हो सकती है।

केंद्र को पत्र में क्या होगा

राजस्व, सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने मीडिया को बताया कि केंद्र सरकार को भेजे जाने वाले पत्र में फसल उत्पादन और संबद्ध कृषि क्षेत्रों पर पड़ने वाले प्रभाव, पेयजल एवं सिंचाई जल से जुड़ी चुनौतियाँ तथा कृषि श्रमिकों की दुर्दशा का विस्तृत विवरण शामिल किया जाएगा। यह पत्र राज्य की संकटग्रस्त स्थिति को केंद्र के समक्ष औपचारिक रूप से रखने का प्रयास है।

गौरतलब है कि तेलंगाना एक कृषि-प्रधान राज्य है जहाँ खरीफ सीज़न में मानसूनी वर्षा पर निर्भरता बेहद अधिक है। ऐसे में 40% की वर्षा कमी न केवल फसलों बल्कि पेयजल आपूर्ति और ग्रामीण रोज़गार को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।

मुख्यमंत्री के निर्देश और आपातकालीन उपाय

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने अधिकारियों को पेयजल, सिंचाई, कृषि और बिजली आपूर्ति से संबंधित वैकल्पिक कार्य योजनाएँ तत्काल तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने सभी विभागों को सक्रिय उपायों के साथ तैयार रहने को कहा।

कैबिनेट ने जिला कलेक्टरों को पेयजल की कमी रोकने, उचित उपाय करने और जनता की शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के लिए सतर्क रहने का निर्देश दिया। साथ ही, बिना किसी लोड शेडिंग के निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखने का भी निर्णय लिया गया — इसके लिए बिजली उत्पादन और खरीद दोनों की व्यवस्था करने के आदेश दिए गए।

किसानों और जल संसाधनों पर फोकस

कैबिनेट ने किसानों से अधिक जल की खपत वाली फसलों की खेती से परहेज़ करने और कम जल खपत वाली फसलों को अपनाने की अपील की। पेयजल आवश्यकताओं के लिए सभी परियोजनाओं से उपलब्ध जल के आवंटन को प्राथमिकता देने का भी निर्णय लिया गया।

यह ऐसे समय में आया है जब राज्य के कई जलाशयों का जलस्तर सामान्य से नीचे बताया जा रहा है। राज्य सरकार ने अल नीनो के प्रभाव के बारे में राज्यभर में जागरूकता सेमिनार और बैठकें आयोजित करने का भी निर्णय लिया, ताकि जनता को वर्षा की कमी, उपलब्ध जल संसाधनों और किसानों द्वारा बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी मिल सके।

विशेष रिपोर्ट और विशेषज्ञ समिति

मंत्रिमंडल ने निर्देश दिया कि कृषि क्षेत्र पर अल नीनो के प्रभाव पर एक विशेष रिपोर्ट, राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष चिन्ना रेड्डी के नेतृत्व में कृषि विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों द्वारा तैयार की जाए। इस रिपोर्ट में वर्तमान परिस्थितियों के लिए उपयुक्त फसलें, किसानों के लिए सावधानियाँ और फसलों के साथ-साथ पशुधन की देखभाल के उपाय शामिल होंगे।

आने वाले हफ्तों में केंद्र की प्रतिक्रिया और विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट यह तय करेगी कि तेलंगाना इस मौसमी संकट से कितनी तत्परता से निपट पाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि राज्य की अपनी तैयारी कितनी गहरी है — जागरूकता सेमिनार और विशेषज्ञ रिपोर्टें तब ही काम आती हैं जब उनके पीछे ज़मीनी क्रियान्वयन हो। अल नीनो कोई अचानक आई आपदा नहीं है; मौसम विभाग महीनों पहले से इसके संकेत दे रहा था, ऐसे में यह प्रश्न उठता है कि संकटकालीन योजनाएँ अभी क्यों बनाई जा रही हैं। पेयजल आवंटन को प्राथमिकता देने और लोड शेडिंग न करने के निर्णय स्वागतयोग्य हैं, पर इनके लिए संसाधन और वित्त की व्यवस्था केंद्र की प्रतिक्रिया पर निर्भर नहीं होनी चाहिए।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तेलंगाना में अल नीनो का क्या असर हो रहा है?
अल नीनो के प्रभाव से तेलंगाना में लगभग 40 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की जा रही है। इससे फसल उत्पादन, पेयजल आपूर्ति, सिंचाई और कृषि श्रमिकों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है।
तेलंगाना सरकार ने केंद्र से क्या माँगा है?
राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से स्थिति का आकलन करने, संकटकालीन योजनाएँ लागू करने और आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान करने हेतु विशेष दल भेजने का अनुरोध करने का निर्णय लिया है। यह निर्णय 17 जुलाई को मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया।
तेलंगाना कैबिनेट ने किसानों को क्या सलाह दी है?
कैबिनेट ने किसानों से अधिक जल खपत वाली फसलों की खेती से बचने और कम जल खपत वाली फसलों को अपनाने की अपील की है। इसके अलावा राज्यभर में जागरूकता सेमिनार और बैठकें आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया है।
बिजली और पेयजल आपूर्ति के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
कैबिनेट ने बिना किसी लोड शेडिंग के निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है और अधिकारियों को बिजली उत्पादन व खरीद दोनों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। पेयजल आवश्यकताओं के लिए सभी परियोजनाओं से उपलब्ध जल के आवंटन को प्राथमिकता देने का भी फैसला किया गया है।
अल नीनो प्रभाव पर विशेष रिपोर्ट कौन तैयार करेगा?
राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष चिन्ना रेड्डी के नेतृत्व में कृषि विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों की एक टीम यह विशेष रिपोर्ट तैयार करेगी। रिपोर्ट में उपयुक्त फसलें, किसानों के लिए सावधानियाँ और पशुधन देखभाल के उपाय शामिल होंगे।
राष्ट्र प्रेस
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