24 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

महाराष्ट्र में 15 जून से पहले बुवाई न करें किसान, सरकार की चेतावनी; 18 जून के बाद बढ़ेगी बारिश

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
महाराष्ट्र में 15 जून से पहले बुवाई न करें किसान, सरकार की चेतावनी; 18 जून के बाद बढ़ेगी बारिश

सारांश

महाराष्ट्र सरकार ने किसानों को 15 जून से पहले बुवाई न करने की सख्त हिदायत दी है। अल नीनो वर्ष में मानसून की धीमी प्रगति और सूखे की आशंका के बीच समय से पहले बुवाई से बीज नष्ट होने और कर्ज बढ़ने का खतरा है। 18 जून के बाद वर्षा बढ़ने का अनुमान है।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र सरकार ने 8 जून 2026 को किसानों को 15 जून से पहले बुवाई न करने की अपील की।
दक्षिण कोंकण में मानसून आ चुका है, लेकिन विदर्भ, मराठवाड़ा, खानदेश में अभी पर्याप्त वर्षा नहीं।
18 जून 2026 के बाद राज्य के अधिकांश हिस्सों में वर्षा बढ़ने का अनुमान।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अल नीनो का हवाला देते हुए औसत वर्षा की 22% संभावना बताई।
कृषि विशेषज्ञों की सलाह — बुवाई से पहले कम से कम 75–100 मिमी वर्षा और मिट्टी में पर्याप्त नमी जरूरी।
समय से पहले बुवाई से बीज नष्ट होने पर किसानों को महँगे बीज-उर्वरक दोबारा खरीदने पड़ते हैं, कर्ज का बोझ बढ़ता है।

महाराष्ट्र सरकार ने 8 जून 2026 को राज्यभर के किसानों से अपील की है कि वे 15 जून 2026 से पहले खरीफ बुवाई में जल्दबाजी न करें, क्योंकि मानसून की प्रगति अभी धीमी है और बुवाई के लिए पर्याप्त नमी उपलब्ध नहीं है। दक्षिण कोंकण में मानसून दस्तक दे चुका है, लेकिन विदर्भ, मराठवाड़ा और मध्य महाराष्ट्र तक इसके पहुँचने में अभी समय लगेगा।

मौसम विभाग का पूर्वानुमान

मौसम विभाग के अनुसार, विदर्भ, मराठवाड़ा, खानदेश और मध्य महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में 15 जून तक गरज के साथ बारिश और तेज़ हवाएँ चलने की संभावना है, परंतु यह वर्षा व्यापक बुवाई के लिए पर्याप्त नहीं होगी। 18 जून के बाद राज्य के अधिकांश हिस्सों में वर्षा की मात्रा में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है। कोंकण तटीय पट्टी और घाट क्षेत्रों में जून के अंत तक औसत से अधिक वर्षा होने का अनुमान है, और अगले तीन से चार दिनों में इन क्षेत्रों में बारिश की तीव्रता बढ़ेगी।

मुख्यमंत्री फडणवीस की चेतावनी

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, 'किसान मानसून का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, यह अल नीनो का वर्ष है। औसत वर्षा की 22 प्रतिशत संभावना है, लेकिन हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करने पर है कि मराठवाड़ा और अन्य सूखाग्रस्त क्षेत्रों के किसानों को दोबारा बुवाई करने के लिए मजबूर न होना पड़े। सरकार का जोर कम से कम पानी का उपयोग करके फसल की पैदावार को अधिकतम करने और नुकसान को कम करने पर होगा।' उनका अल नीनो का स्पष्ट उल्लेख महत्वपूर्ण है — अल नीनो प्रभाव भारतीय मानसून को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है, जिससे वर्षा का वितरण असमान हो जाता है और लंबे सूखे की आशंका बढ़ती है।

किसानों पर आर्थिक असर

राज्य सरकार की यह सलाह ऐसे समय में आई है जब सोयाबीन, कपास और दालों की खेती करने वाले किसान पहली बारिश के तुरंत बाद बुवाई शुरू कर देते हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, बुवाई से पहले कम से कम 75 से 100 मिमी वर्षा होना और मिट्टी में पर्याप्त नमी पहुँचना आवश्यक है। यदि शुरुआती बारिश के बाद सूखा पड़ता है — जैसा कि जून मध्य तक अनुमानित है — तो अंकुरित बीज सूखी मिट्टी में नष्ट हो जाते हैं। कृषि विभाग के सूत्रों के अनुसार, इससे गरीब किसानों को महँगे बीज और उर्वरक दोबारा खरीदने पड़ते हैं, जिससे वे कर्ज के जाल में और गहरे फँस जाते हैं।

ऐतिहासिक संदर्भ और प्रभावित क्षेत्र

मराठवाड़ा (बीड, लातूर, उस्मानाबाद) और विदर्भ जैसे क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से सूखाग्रस्त हैं और शुष्क भूमि कृषि पर अत्यधिक निर्भर हैं। इन क्षेत्रों में बुवाई के मौसम का विफल होना न केवल कृषि उत्पादन को बुरी तरह प्रभावित करता है, बल्कि ग्रामीण आर्थिक संकट को भी गहरा करता है। रविवार देर शाम जारी सरकारी विज्ञप्ति में नागरिकों से बिजली गिरने और मौसम में अचानक होने वाले बदलावों के संबंध में आवश्यक सुरक्षा सावधानियाँ बरतने का भी आग्रह किया गया है।

आगे क्या

कृषि विभाग की सलाह है कि किसान मिट्टी में पर्याप्त नमी की पुष्टि करने के बाद ही बुवाई शुरू करें। 18 जून 2026 के बाद वर्षा की स्थिति स्पष्ट होने पर राज्य सरकार क्षेत्रवार बुवाई संबंधी अद्यतन निर्देश जारी कर सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि केवल एहतियाती सलाह। मराठवाड़ा और विदर्भ में किसान आत्महत्याओं का इतिहास और बार-बार की दोबारा बुवाई की त्रासदी बताती है कि यह सलाह देना काफी नहीं — राज्य को बीज प्रतिस्थापन योजना और तत्काल कर्ज राहत का स्पष्ट खाका भी पेश करना होगा। केवल चेतावनी जारी करना और क्रियान्वयन तंत्र न बताना उसी पुरानी प्रशासनिक लिपि को दोहराना है जो संकट के बाद राहत पर निर्भर रहती है, रोकथाम पर नहीं।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र सरकार ने किसानों को 15 जून से पहले बुवाई न करने की सलाह क्यों दी?
क्योंकि मानसून की प्रगति धीमी है और 15 जून तक विदर्भ, मराठवाड़ा व मध्य महाराष्ट्र में बुवाई के लिए पर्याप्त वर्षा नहीं होगी। समय से पहले बुवाई करने पर बीज सूखी मिट्टी में नष्ट हो सकते हैं, जिससे किसानों को दोबारा बीज-उर्वरक खरीदने का आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है।
महाराष्ट्र में मानसून कब तक पहुँचेगा और बारिश कब बढ़ेगी?
दक्षिण कोंकण में मानसून आ चुका है, लेकिन राज्य के बाकी हिस्सों में 18 जून 2026 के बाद वर्षा में उल्लेखनीय वृद्धि होने का अनुमान है। कोंकण और घाट क्षेत्रों में जून के अंत तक औसत से अधिक वर्षा की संभावना है।
अल नीनो का महाराष्ट्र की खेती पर क्या असर पड़ता है?
अल नीनो प्रभाव भारतीय मानसून की धाराओं को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है, जिससे वर्षा का वितरण असमान हो जाता है और लंबे सूखे की आशंका बढ़ती है। मराठवाड़ा और विदर्भ जैसे पहले से सूखाग्रस्त क्षेत्रों में इसका असर सबसे गंभीर होता है, जहाँ शुष्क भूमि कृषि पर निर्भरता अधिक है।
बुवाई के लिए कितनी बारिश जरूरी है?
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, बुवाई शुरू करने से पहले कम से कम 75 से 100 मिमी वर्षा होना और मिट्टी में पर्याप्त नमी पहुँचना आवश्यक है, ताकि बीजों का सही अंकुरण हो सके। इससे कम वर्षा में बुवाई करने पर सूखे की स्थिति में बीज नष्ट हो जाते हैं।
कौन से किसान सबसे ज़्यादा प्रभावित होंगे?
सोयाबीन, कपास और दालों की खेती करने वाले किसान — विशेष रूप से मराठवाड़ा (बीड, लातूर, उस्मानाबाद) और विदर्भ के — सबसे अधिक जोखिम में हैं। ये क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से सूखाग्रस्त हैं और बुवाई मौसम की विफलता से यहाँ ग्रामीण आर्थिक संकट गहरा जाता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 4 महीने पहले