महाराष्ट्र में 15 जून से पहले बुवाई न करें किसान, सरकार की चेतावनी; 18 जून के बाद बढ़ेगी बारिश
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र सरकार ने 8 जून 2026 को राज्यभर के किसानों से अपील की है कि वे 15 जून 2026 से पहले खरीफ बुवाई में जल्दबाजी न करें, क्योंकि मानसून की प्रगति अभी धीमी है और बुवाई के लिए पर्याप्त नमी उपलब्ध नहीं है। दक्षिण कोंकण में मानसून दस्तक दे चुका है, लेकिन विदर्भ, मराठवाड़ा और मध्य महाराष्ट्र तक इसके पहुँचने में अभी समय लगेगा।
मौसम विभाग का पूर्वानुमान
मौसम विभाग के अनुसार, विदर्भ, मराठवाड़ा, खानदेश और मध्य महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में 15 जून तक गरज के साथ बारिश और तेज़ हवाएँ चलने की संभावना है, परंतु यह वर्षा व्यापक बुवाई के लिए पर्याप्त नहीं होगी। 18 जून के बाद राज्य के अधिकांश हिस्सों में वर्षा की मात्रा में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है। कोंकण तटीय पट्टी और घाट क्षेत्रों में जून के अंत तक औसत से अधिक वर्षा होने का अनुमान है, और अगले तीन से चार दिनों में इन क्षेत्रों में बारिश की तीव्रता बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री फडणवीस की चेतावनी
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, 'किसान मानसून का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, यह अल नीनो का वर्ष है। औसत वर्षा की 22 प्रतिशत संभावना है, लेकिन हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करने पर है कि मराठवाड़ा और अन्य सूखाग्रस्त क्षेत्रों के किसानों को दोबारा बुवाई करने के लिए मजबूर न होना पड़े। सरकार का जोर कम से कम पानी का उपयोग करके फसल की पैदावार को अधिकतम करने और नुकसान को कम करने पर होगा।' उनका अल नीनो का स्पष्ट उल्लेख महत्वपूर्ण है — अल नीनो प्रभाव भारतीय मानसून को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है, जिससे वर्षा का वितरण असमान हो जाता है और लंबे सूखे की आशंका बढ़ती है।
किसानों पर आर्थिक असर
राज्य सरकार की यह सलाह ऐसे समय में आई है जब सोयाबीन, कपास और दालों की खेती करने वाले किसान पहली बारिश के तुरंत बाद बुवाई शुरू कर देते हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, बुवाई से पहले कम से कम 75 से 100 मिमी वर्षा होना और मिट्टी में पर्याप्त नमी पहुँचना आवश्यक है। यदि शुरुआती बारिश के बाद सूखा पड़ता है — जैसा कि जून मध्य तक अनुमानित है — तो अंकुरित बीज सूखी मिट्टी में नष्ट हो जाते हैं। कृषि विभाग के सूत्रों के अनुसार, इससे गरीब किसानों को महँगे बीज और उर्वरक दोबारा खरीदने पड़ते हैं, जिससे वे कर्ज के जाल में और गहरे फँस जाते हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ और प्रभावित क्षेत्र
मराठवाड़ा (बीड, लातूर, उस्मानाबाद) और विदर्भ जैसे क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से सूखाग्रस्त हैं और शुष्क भूमि कृषि पर अत्यधिक निर्भर हैं। इन क्षेत्रों में बुवाई के मौसम का विफल होना न केवल कृषि उत्पादन को बुरी तरह प्रभावित करता है, बल्कि ग्रामीण आर्थिक संकट को भी गहरा करता है। रविवार देर शाम जारी सरकारी विज्ञप्ति में नागरिकों से बिजली गिरने और मौसम में अचानक होने वाले बदलावों के संबंध में आवश्यक सुरक्षा सावधानियाँ बरतने का भी आग्रह किया गया है।
आगे क्या
कृषि विभाग की सलाह है कि किसान मिट्टी में पर्याप्त नमी की पुष्टि करने के बाद ही बुवाई शुरू करें। 18 जून 2026 के बाद वर्षा की स्थिति स्पष्ट होने पर राज्य सरकार क्षेत्रवार बुवाई संबंधी अद्यतन निर्देश जारी कर सकती है।