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महाराष्ट्र में खरीफ बुआई 1.36 करोड़ हेक्टेयर पर, मराठवाड़ा में सूखे का संकट गहराया

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महाराष्ट्र में खरीफ बुआई 1.36 करोड़ हेक्टेयर पर, मराठवाड़ा में सूखे का संकट गहराया

सारांश

महाराष्ट्र में खरीफ बुआई 95% पर पहुँची, लेकिन पाँच साल के औसत से 8 लाख हेक्टेयर पीछे है। मराठवाड़ा में अगस्त का सूखा फसलों को तबाह कर रहा है और किसानों को एक हफ्ते में बारिश न होने पर बड़े नुकसान की आशंका है। मुख्यमंत्री फडणवीस की कैबिनेट बैठक में राहत उपायों की समीक्षा होगी।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र में खरीफ बुआई 31 अगस्त 2026 तक 1.36 करोड़ हेक्टेयर ( 95 प्रतिशत ) पर पहुँची।
पाँच वर्षीय औसत ( 1.44 करोड़ हेक्टेयर ) की तुलना में करीब 8 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज।
मराठवाड़ा में अगस्त के सूखे से फसलें मुरझाईं; किसानों को एक सप्ताह में बारिश न होने पर बड़े नुकसान की आशंका।
कोंकण में सबसे कम बुआई — मात्र 83 प्रतिशत ; रायगढ़ में केवल 67 प्रतिशत ।
पुणे संभाग ने 101 प्रतिशत बुआई के साथ राज्य में शीर्ष स्थान हासिल किया।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में 3,000 से अधिक जलाशयों की समीक्षा और राहत उपायों पर विचार होगा।

महाराष्ट्र में खरीफ सीजन 2026-27 की बुआई 31 अगस्त 2026 तक 1.36 करोड़ हेक्टेयर तक पहुँच गई, जो पाँच वर्षीय औसत बुआई क्षेत्र का 95 प्रतिशत है। कृषि विभाग के आँकड़ों के अनुसार, कमज़ोर मानसून और अगस्त में लंबे सूखे के कारण पाँच साल के औसत (1.44 करोड़ हेक्टेयर) की तुलना में करीब 8 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है। विशेष रूप से मराठवाड़ा में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, जहाँ पानी की कमी से फसलें मुरझाने लगी हैं।

बुआई का क्षेत्रवार प्रदर्शन

राज्य में बुआई का प्रदर्शन संभागवार काफी असमान रहा। पुणे संभाग ने 12.66 लाख हेक्टेयर के साथ 101 प्रतिशत बुआई कर राज्य में शीर्ष स्थान हासिल किया। इसमें सोलापुर 104 प्रतिशत, पुणे 100 प्रतिशत और अहिल्यानगर 99 प्रतिशत पर रहे।

नासिक संभाग ने 19.85 लाख हेक्टेयर में 98 प्रतिशत कवरेज हासिल किया, जिसमें नासिक जिला 101 प्रतिशत के साथ आगे रहा। धुले 98 प्रतिशत, जलगाँव 97 प्रतिशत और नंदुरबार 90 प्रतिशत पर रहे।

विदर्भ में अमरावती संभाग ने 29.83 लाख हेक्टेयर के साथ 94 प्रतिशत लक्ष्य पूरा किया। नागपुर संभाग में भी कुल 94 प्रतिशत बुआई हुई, जिसमें गोंदिया जिले ने 113 प्रतिशत के साथ औसत पार किया, जबकि चंद्रपुर 88 प्रतिशत पर पिछड़ा।

मराठवाड़ा के छत्रपति संभाजीनगर संभाग में 93 प्रतिशत और लातूर संभाग में 94 प्रतिशत बुआई हुई। लातूर के भीतर नांदेड़ 97 प्रतिशत पर रहा, जबकि हिंगोली मात्र 81 प्रतिशत पर काफी पीछे रहा।

तटीय कोंकण क्षेत्र में राज्य की सबसे कम बुआई दर्ज हुई — केवल 83 प्रतिशत (3.23 लाख हेक्टेयर)। रायगढ़ सर्वाधिक प्रभावित रहा जहाँ मात्र 67 प्रतिशत बुआई हुई, उसके बाद रत्नागिरी 71 प्रतिशत और सिंधुदुर्ग 84 प्रतिशत पर रहे। ठाणे और पालघर ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए दोनों 96 प्रतिशत हासिल किया।

मराठवाड़ा में सूखे का संकट

अगस्त माह में पड़े सूखे ने मराठवाड़ा को सबसे बुरी तरह प्रभावित किया है। पानी की भारी कमी के कारण खड़ी फसलें मुरझाने लगी हैं और किसानों में गहरी चिंता व्याप्त है। किसानों के अनुसार, यदि एक सप्ताह के भीतर पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो बड़े पैमाने पर फसल बर्बादी की आशंका है।

गौरतलब है कि मानसून की शुरुआत जून में धीमी रही। जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश से बुआई में तेज़ी आई, किंतु अगस्त में मानसून के कमज़ोर पड़ने से प्रगति थम गई। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, खरीफ बुआई सामान्यतः अगस्त के अंत तक पूरी हो जाती है, इसलिए इन आँकड़ों में अब अधिक सुधार की संभावना नहीं है।

सरकार की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में मंगलवार को होने वाली साप्ताहिक कैबिनेट बैठक में इस संकट की व्यापक समीक्षा की जाएगी। बैठक में बुआई की स्थिति, राज्य के 3,000 से अधिक सिंचाई जलाशयों में जल स्तर, मराठवाड़ा की उभरती सूखे जैसी परिस्थितियाँ और पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता सहित राहत उपायों पर विचार-विमर्श होगा।

पिछले वर्ष से तुलना

राज्य कृषि विभाग के आँकड़ों के अनुसार, इस वर्ष 31 अगस्त तक की बुआई पिछले वर्ष 29 अगस्त तक दर्ज 1.42 करोड़ हेक्टेयर से कम है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य के कई हिस्सों में जलाशयों का स्तर भी चिंताजनक बना हुआ है। पश्चिमी महाराष्ट्र में कुल 6.72 लाख हेक्टेयर में 93 प्रतिशत बुआई हुई, जिसमें सतारा 99 प्रतिशत के साथ आगे रहा, लेकिन सांगली 89 प्रतिशत और कोल्हापुर 87 प्रतिशत पर रहे।

यदि आगामी दिनों में मानसून की वापसी नहीं होती, तो मराठवाड़ा समेत कई क्षेत्रों में फसल नुकसान की आधिकारिक घोषणा और सरकारी राहत पैकेज की माँग तेज़ हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 8 लाख हेक्टेयर की कमी और मराठवाड़ा में खड़ी फसलों पर मँडराता सूखा यह स्पष्ट करता है कि असली संकट अभी सामने आना बाकी है। गौरतलब है कि मराठवाड़ा पहले से ही जल-संकट के लिए संवेदनशील क्षेत्र है और यहाँ बार-बार के सूखे के बाद भी दीर्घकालिक सिंचाई ढाँचे में सुधार की गति सवालों के घेरे में रही है। कैबिनेट की साप्ताहिक समीक्षा बैठक ज़रूरी कदम है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि राहत उपाय कितनी तेज़ी से ज़मीन पर पहुँचते हैं — क्योंकि किसानों के पास प्रतीक्षा का समय नहीं है।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र में 2026-27 की खरीफ बुआई की स्थिति क्या है?
राज्य कृषि विभाग के आँकड़ों के अनुसार, 31 अगस्त 2026 तक कुल 1.36 करोड़ हेक्टेयर में बुआई हुई, जो पाँच वर्षीय औसत का 95 प्रतिशत है। यह पिछले वर्ष की इसी अवधि के 1.42 करोड़ हेक्टेयर से कम है।
मराठवाड़ा में सूखे का किसानों पर क्या असर पड़ रहा है?
अगस्त में लंबे सूखे के कारण मराठवाड़ा में पानी की कमी से खड़ी फसलें मुरझाने लगी हैं। किसानों के अनुसार यदि एक सप्ताह के भीतर पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो बड़े पैमाने पर फसल बर्बाद होने की आशंका है।
महाराष्ट्र में सबसे कम और सबसे अधिक बुआई कहाँ हुई?
पुणे संभाग ने 101 प्रतिशत बुआई के साथ राज्य में शीर्ष स्थान हासिल किया, जबकि कोंकण क्षेत्र में सबसे कम 83 प्रतिशत बुआई दर्ज हुई। रायगढ़ जिला सर्वाधिक प्रभावित रहा जहाँ केवल 67 प्रतिशत बुआई हो सकी।
सरकार सूखे की स्थिति से निपटने के लिए क्या कदम उठा रही है?
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में बुआई की स्थिति, 3,000 से अधिक जलाशयों में जल स्तर, मराठवाड़ा की सूखे जैसी स्थिति और पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता सहित राहत उपायों की समीक्षा की जाएगी।
पाँच साल के औसत की तुलना में इस साल बुआई कितनी कम रही?
राज्य का पाँच वर्षीय औसत खरीफ क्षेत्र (2019-20 से 2023-24) 1.44 करोड़ हेक्टेयर है, जबकि इस वर्ष 1.36 करोड़ हेक्टेयर बुआई हुई — यानी करीब 8 लाख हेक्टेयर की कमी। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार अब इन आँकड़ों में अधिक सुधार की संभावना नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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