महाराष्ट्र में खरीफ बुआई 1.36 करोड़ हेक्टेयर पर, मराठवाड़ा में सूखे का संकट गहराया
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र में खरीफ सीजन 2026-27 की बुआई 31 अगस्त 2026 तक 1.36 करोड़ हेक्टेयर तक पहुँच गई, जो पाँच वर्षीय औसत बुआई क्षेत्र का 95 प्रतिशत है। कृषि विभाग के आँकड़ों के अनुसार, कमज़ोर मानसून और अगस्त में लंबे सूखे के कारण पाँच साल के औसत (1.44 करोड़ हेक्टेयर) की तुलना में करीब 8 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है। विशेष रूप से मराठवाड़ा में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, जहाँ पानी की कमी से फसलें मुरझाने लगी हैं।
बुआई का क्षेत्रवार प्रदर्शन
राज्य में बुआई का प्रदर्शन संभागवार काफी असमान रहा। पुणे संभाग ने 12.66 लाख हेक्टेयर के साथ 101 प्रतिशत बुआई कर राज्य में शीर्ष स्थान हासिल किया। इसमें सोलापुर 104 प्रतिशत, पुणे 100 प्रतिशत और अहिल्यानगर 99 प्रतिशत पर रहे।
नासिक संभाग ने 19.85 लाख हेक्टेयर में 98 प्रतिशत कवरेज हासिल किया, जिसमें नासिक जिला 101 प्रतिशत के साथ आगे रहा। धुले 98 प्रतिशत, जलगाँव 97 प्रतिशत और नंदुरबार 90 प्रतिशत पर रहे।
विदर्भ में अमरावती संभाग ने 29.83 लाख हेक्टेयर के साथ 94 प्रतिशत लक्ष्य पूरा किया। नागपुर संभाग में भी कुल 94 प्रतिशत बुआई हुई, जिसमें गोंदिया जिले ने 113 प्रतिशत के साथ औसत पार किया, जबकि चंद्रपुर 88 प्रतिशत पर पिछड़ा।
मराठवाड़ा के छत्रपति संभाजीनगर संभाग में 93 प्रतिशत और लातूर संभाग में 94 प्रतिशत बुआई हुई। लातूर के भीतर नांदेड़ 97 प्रतिशत पर रहा, जबकि हिंगोली मात्र 81 प्रतिशत पर काफी पीछे रहा।
तटीय कोंकण क्षेत्र में राज्य की सबसे कम बुआई दर्ज हुई — केवल 83 प्रतिशत (3.23 लाख हेक्टेयर)। रायगढ़ सर्वाधिक प्रभावित रहा जहाँ मात्र 67 प्रतिशत बुआई हुई, उसके बाद रत्नागिरी 71 प्रतिशत और सिंधुदुर्ग 84 प्रतिशत पर रहे। ठाणे और पालघर ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए दोनों 96 प्रतिशत हासिल किया।
मराठवाड़ा में सूखे का संकट
अगस्त माह में पड़े सूखे ने मराठवाड़ा को सबसे बुरी तरह प्रभावित किया है। पानी की भारी कमी के कारण खड़ी फसलें मुरझाने लगी हैं और किसानों में गहरी चिंता व्याप्त है। किसानों के अनुसार, यदि एक सप्ताह के भीतर पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो बड़े पैमाने पर फसल बर्बादी की आशंका है।
गौरतलब है कि मानसून की शुरुआत जून में धीमी रही। जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश से बुआई में तेज़ी आई, किंतु अगस्त में मानसून के कमज़ोर पड़ने से प्रगति थम गई। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, खरीफ बुआई सामान्यतः अगस्त के अंत तक पूरी हो जाती है, इसलिए इन आँकड़ों में अब अधिक सुधार की संभावना नहीं है।
सरकार की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में मंगलवार को होने वाली साप्ताहिक कैबिनेट बैठक में इस संकट की व्यापक समीक्षा की जाएगी। बैठक में बुआई की स्थिति, राज्य के 3,000 से अधिक सिंचाई जलाशयों में जल स्तर, मराठवाड़ा की उभरती सूखे जैसी परिस्थितियाँ और पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता सहित राहत उपायों पर विचार-विमर्श होगा।
पिछले वर्ष से तुलना
राज्य कृषि विभाग के आँकड़ों के अनुसार, इस वर्ष 31 अगस्त तक की बुआई पिछले वर्ष 29 अगस्त तक दर्ज 1.42 करोड़ हेक्टेयर से कम है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य के कई हिस्सों में जलाशयों का स्तर भी चिंताजनक बना हुआ है। पश्चिमी महाराष्ट्र में कुल 6.72 लाख हेक्टेयर में 93 प्रतिशत बुआई हुई, जिसमें सतारा 99 प्रतिशत के साथ आगे रहा, लेकिन सांगली 89 प्रतिशत और कोल्हापुर 87 प्रतिशत पर रहे।
यदि आगामी दिनों में मानसून की वापसी नहीं होती, तो मराठवाड़ा समेत कई क्षेत्रों में फसल नुकसान की आधिकारिक घोषणा और सरकारी राहत पैकेज की माँग तेज़ हो सकती है।