SCO समिट में PM मोदी का कड़ा संदेश: आतंकवाद के पूरे तंत्र को ध्वस्त करना होगा, दोहरे रवैये की कोई जगह नहीं
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 सितंबर को बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में आतंकवाद, ड्रग तस्करी और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भारत का स्पष्ट रुख रखा। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सहित 10 शीर्ष नेताओं के सामने मोदी ने वैश्विक उन्नति के लिए भारत के विजन को प्रस्तुत किया।
आतंकवाद पर भारत का कड़ा रुख
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की उपस्थिति में प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद के विरुद्ध सामूहिक और निर्णायक कार्रवाई की पुरज़ोर वकालत की। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल आतंकियों के विरुद्ध जवाबी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है — बल्कि आतंकवाद की फंडिंग, भर्ती प्रक्रिया, कट्टरपंथ और सुरक्षित पनाहगाहों को जड़ से समाप्त करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर सभी सदस्य देशों को एकस्वर में बोलना होगा और दोहरे रवैये की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
SCO के तीन स्तंभ: सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर
मोदी ने SCO को लेकर भारत की सोच के तीन मुख्य स्तंभ दोहराए — S यानी सिक्योरिटी (सुरक्षा), C यानी कनेक्टिविटी और O यानी ऑपर्च्युनिटी (अवसर)। उन्होंने ज़ोर दिया कि अब इन तीनों स्तंभों को विजन से आगे ले जाकर ठोस परिणामों में बदलना होगा, जिसकी पहली आवश्यकता शांति और सुरक्षा है।
SCO के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर मोदी ने कहा, 'पिछले पच्चीस वर्षों में एससीओ ने यूरेशिया के विशाल भूभाग में संवाद और सहयोग की एक मजबूत परंपरा विकसित की है। अब आने वाले पच्चीस वर्षों में हमारा लक्ष्य इस सहयोग को स्पष्ट परिणामों में बदलने का होना चाहिए।'
ड्रग तस्करी और क्षेत्रीय सुरक्षा
प्रधानमंत्री ने नशीले पदार्थों की तस्करी को केवल अपराध नहीं, बल्कि युवा पीढ़ी और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने SCO के अंतर्गत सुरक्षा संबंधी खतरों, संगठित अपराध, सूचना सुरक्षा और नार्कोटिक्स जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए स्थापित किए जा रहे केंद्रों को सकारात्मक कदम करार दिया।
संवाद और कूटनीति: शांति का एकमात्र रास्ता
वैश्विक मंच से मोदी ने पश्चिम एशिया संकट का उदाहरण देते हुए कहा कि किसी एक क्षेत्र का संघर्ष वहीं तक सीमित नहीं रहता — उसका असर पूरे विश्व की ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर पड़ता है। इसका सबसे अधिक खामियाजा ग्लोबल साउथ के देशों को उठाना पड़ता है। भारत का आह्वान है कि सभी तनावों और युद्धों का समाधान युद्ध के मैदान पर नहीं, बल्कि संवाद और कूटनीति से ही संभव है।
मोदी ने संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत उन सभी प्रयासों का समर्थन करता है जो बाजारों को जोड़ते हैं और व्यापार को सुगम बनाते हैं, किंतु इन प्रयासों में सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान अत्यंत आवश्यक है — यही SCO चार्टर की मूल भावना है।
SCO की असली 'पूंजी' और युवाओं पर फोकस
मोदी ने कहा कि SCO की सबसे बड़ी पूंजी सदस्य देशों के लोगों के बीच आपसी संबंध हैं। उनके अनुसार, भारत के लिए SCO महान सभ्यताओं, संस्कृतियों और विचारों का संगम है। उन्होंने अगले 25 वर्षों में पीपुल-टू-पीपुल कनेक्ट को सहयोग के केंद्र में रखने का आग्रह किया।
किर्गिस्तान की अध्यक्षता में SCO में यूथ एंगेजमेंट पर दिए गए बल की सराहना करते हुए मोदी ने बताया कि भारत ने SCO में स्टार्ट-अप फोरम, यंग ऑथर्स कॉन्कलेव और यंग साइंटिस्ट्स फोरम जैसी पहल की हैं। उन्होंने यह भी बताया कि SCO सिविलाइजेशनल डायलॉग फोरम का पहला सत्र इस वर्ष भारत में आयोजित होगा। मोदी के अनुसार, सफलता की वास्तविक कसौटी युवाओं को मिलने वाले अवसर, उद्यमियों के लिए खुलने वाले नए बाजार, किसानों को प्रौद्योगिकी का लाभ और नागरिकों का बेहतर होता जीवन होनी चाहिए।