बिश्केक SCO समिट: पुतिन ने 1 सितंबर को द्वितीय विश्व युद्ध से जोड़ा, SCO को बताया दुनिया का सबसे बड़ा क्षेत्रीय संगठन
सारांश
मुख्य बातें
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 1 सितंबर को बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट में द्वितीय विश्व युद्ध की स्मृति को ताज़ा करते हुए वैश्विक शांति का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि 1 सितंबर की तारीख का ऐतिहासिक संयोग हमें याद दिलाता है कि सशस्त्र संघर्ष को रोकना आज भी उतना ही ज़रूरी है। पुतिन ने SCO को उभरते बहुध्रुवीय विश्व का एक स्वतंत्र और प्रभावशाली केंद्र बताया।
1 सितंबर का ऐतिहासिक संयोग और पुतिन का संदेश
समिट को संबोधित करते हुए पुतिन ने कहा, 'प्यारे दोस्तों, मैं आपको याद दिलाना चाहता हूँ कि आज, 1 सितंबर को ही दूसरे विश्व युद्ध की शुरुआत हुई थी। हमें दुनिया भर में ऐसी किसी भी उकसावे वाली हरकत को खत्म करने के लिए हर संभव कोशिश करनी चाहिए, जिससे सशस्त्र संघर्ष की स्थिति पैदा हो। मुझे पूरा भरोसा है कि हमारा काम ठीक इसी मकसद को हासिल करने के लिए है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया के कई हिस्सों में भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है।
SCO की बढ़ती ताकत और वैश्विक प्रतिनिधित्व
पुतिन ने SCO की विस्तार-यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि 2001 में रूस, चीन, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान, किर्गिस्तान और उज्बेकिस्तान की पहल पर स्थापित यह संगठन अब दुनिया का सबसे बड़ा क्षेत्रीय संगठन बन चुका है। उनके अनुसार, SCO के सदस्य देशों में विश्व की करीब आधी आबादी निवास करती है और ये देश वैश्विक GDP के लगभग एक-तिहाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं। गौरतलब है कि महज़ दो दशकों में SCO का यह विस्तार इसे संयुक्त राष्ट्र के बाद सबसे व्यापक भू-राजनीतिक मंचों में से एक बनाता है।
SCO डेवलपमेंट बैंक और वित्तीय स्वायत्तता की माँग
पुतिन ने समिट में SCO डेवलपमेंट बैंक के प्रस्ताव को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सदस्य देशों के नेतृत्व को संबोधित करते हुए कहा कि यह प्रस्तावित बैंक उन वित्तीय प्रणालियों से पूरी तरह स्वतंत्र होना चाहिए जिनका उपयोग 'आर्थिक हथियार' के रूप में किया जाता है — एक स्पष्ट संकेत पश्चिमी प्रतिबंध-तंत्र की ओर। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष SCO सदस्य देशों के साथ रूस का कुल व्यापार 400 अरब डॉलर से अधिक रहा, जो इस संगठन के आर्थिक महत्व को रेखांकित करता है।
भारत और SCO की प्रासंगिकता
भारत SCO का एक प्रमुख सदस्य है और यह समिट ऐसे समय में हो रहा है जब नई दिल्ली अपनी 'बहु-संरेखण' (multi-alignment) नीति के तहत रूस, चीन और पश्चिमी देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की कोशिश कर रही है। SCO मंच भारत को एशियाई-यूरेशियाई भू-राजनीति में सक्रिय भागीदारी का अवसर देता है।
आगे की राह
26वें SCO समिट के निर्णय और घोषणाएँ आने वाले हफ्तों में सदस्य देशों की विदेश नीति को प्रभावित करेंगी। SCO डेवलपमेंट बैंक के प्रस्ताव पर सदस्य देशों की सहमति और उसकी संरचना पर आगे की बातचीत होनी बाकी है। पुतिन का शांति-आह्वान वैश्विक कूटनीतिक बहस में एक नया आयाम जोड़ता है।