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गढ़चिरौली हिंसा: सुरेंद्र गाडलिंग की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 14 अक्टूबर तक स्थगित

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गढ़चिरौली हिंसा: सुरेंद्र गाडलिंग की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 14 अक्टूबर तक स्थगित

सारांश

सुप्रीम कोर्ट में गढ़चिरौली हिंसा मामले में वकील सुरेंद्र गाडलिंग की जमानत याचिका पर सुनवाई 14 अक्टूबर तक टल गई। साढ़े सात साल से जेल में बंद गाडलिंग के वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि उसी मामले में दोनों अन्य आरोपियों को जमानत मिल चुकी है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय में 1 सितंबर को सुरेंद्र गाडलिंग की जमानत याचिका पर सुनवाई टली; अगली तारीख 14 अक्टूबर ।
गाडलिंग जनवरी 2019 से हिरासत में हैं — कुल सात साल सात महीने से अधिक।
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि ट्रक जलाने के मामले में दोनों अन्य आरोपियों को जमानत मिल चुकी है।
गाडलिंग को भीमा कोरेगांव मामले में पहले ही जमानत मिल चुकी है।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले NIA विशेष अदालत में न्यायाधीश की तैनाती को लेकर चिंता जताई थी।
दिसंबर 2016 की घटना में माओवादियों ने गढ़चिरौली के सुरजागढ़ में 76-80 वाहन जलाए थे।

सर्वोच्च न्यायालय में 1 सितंबर को गढ़चिरौली हिंसा मामले में गिरफ्तार वकील सुरेंद्र गाडलिंग की जमानत याचिका पर सुनवाई टल गई। अब इस मामले में अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को निर्धारित की गई है। गाडलिंग दिसंबर 2016 में महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के एटापल्ली तहसील में हुई हिंसा और आगजनी के मामले में जनवरी 2019 से न्यायिक हिरासत में हैं।

कोर्ट में क्या हुआ

सुनवाई के दौरान गाडलिंग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि उनके मुवक्किल को भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में पहले ही जमानत मिल चुकी है। सिब्बल ने तर्क दिया कि गढ़चिरौली मामले में गाडलिंग पर एक ट्रक जलाने का आरोप है, जबकि उसी घटना में शामिल दोनों अन्य आरोपियों को जमानत दी जा चुकी है। उन्होंने न्यायालय का ध्यान इस तथ्य की ओर दिलाया कि गाडलिंग पिछले सात साल सात महीने से जेल में बंद हैं।

ट्रायल में देरी पर पहले जता चुका है चिंता

पिछली सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले के ट्रायल में हो रही देरी पर गंभीर चिंता व्यक्त की थी। न्यायालय ने कहा था कि वह बॉम्बे उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से यह जानकारी लेगा कि संबंधित राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत में न्यायाधीश तैनात है या नहीं। यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में लंबित विचाराधीन कैदियों की संख्या को लेकर बहस तेज़ हो रही है।

गढ़चिरौली हिंसा की पृष्ठभूमि

दिसंबर 2016 में प्रतिबंधित कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) के एक बड़े सशस्त्र समूह ने एटापल्ली तहसील के सुरजागढ़ पहाड़ी क्षेत्र पर हमला किया था। माओवादियों ने वहाँ खड़े लगभग 76 से 80 वाहनों और मशीनों — जिनमें ट्रक, टिपर और जेसीबी शामिल थे — को आग के हवाले कर दिया था। रिपोर्टों के अनुसार, माओवादी और कुछ स्थानीय संगठन उस क्षेत्र में चल रही व्यावसायिक खनन गतिविधियों का विरोध कर रहे थे।

गाडलिंग की कानूनी स्थिति

वकील सुरेंद्र गाडलिंग को गढ़चिरौली हिंसा मामले में जनवरी 2019 में गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले वे 2018 के चर्चित एल्गार परिषद-भीमा कोरेगांव मामले में भी सह-आरोपी के रूप में जेल में रह चुके हैं, जिसमें उन्हें बाद में जमानत मिली। गौरतलब है कि यह मामला उन कई मामलों में से एक है जिनमें आरोपी वर्षों से विचाराधीन कैदी के रूप में हिरासत में हैं और ट्रायल अभी भी अधूरा है।

आगे क्या होगा

सर्वोच्च न्यायालय में अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को होगी। NIA अदालत में न्यायाधीश की तैनाती और ट्रायल की गति पर न्यायालय का रुख इस मामले की दिशा तय करेगा। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, सह-आरोपियों को जमानत मिलना गाडलिंग की याचिका को मज़बूत आधार देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

अधूरा ट्रायल, और NIA अदालत में न्यायाधीश की तैनाती तक पर अनिश्चितता। जब उसी मामले के सह-आरोपी जमानत पर बाहर हों और मुख्य आरोपी जेल में हो, तो यह समानता के सिद्धांत पर गंभीर सवाल उठाता है। सुप्रीम कोर्ट की चिंता दर्ज है, लेकिन हर बार सुनवाई टलना यह भी दर्शाता है कि संस्थागत ढाँचा अभी भी इस तरह के मामलों में त्वरित न्याय देने में पिछड़ रहा है।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुरेंद्र गाडलिंग कौन हैं और उन पर क्या आरोप है?
सुरेंद्र गाडलिंग एक वकील हैं जिन्हें दिसंबर 2016 में महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में हुई हिंसा और आगजनी के मामले में जनवरी 2019 में गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने एटापल्ली तहसील के सुरजागढ़ इलाके में एक ट्रक को आग लगाई थी।
गढ़चिरौली हिंसा मामले में अगली सुनवाई कब होगी?
सर्वोच्च न्यायालय में इस मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को निर्धारित की गई है। 1 सितंबर को होने वाली सुनवाई स्थगित कर दी गई थी।
गाडलिंग कितने समय से जेल में हैं?
सुरेंद्र गाडलिंग जनवरी 2019 से न्यायिक हिरासत में हैं, यानी सात साल सात महीने से अधिक समय से। उनके वकील कपिल सिब्बल ने इसी आधार पर जमानत की माँग की है।
दिसंबर 2016 की गढ़चिरौली हिंसा क्या थी?
दिसंबर 2016 में प्रतिबंधित कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) के एक सशस्त्र समूह ने गढ़चिरौली के एटापल्ली तहसील के सुरजागढ़ पहाड़ी इलाके में हमला किया था। माओवादियों ने वहाँ मौजूद 76 से 80 वाहनों और मशीनों — ट्रक, टिपर और जेसीबी — को आग लगा दी थी, कथित तौर पर क्षेत्र में चल रही खनन गतिविधियों के विरोध में।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पहले क्या कहा था?
पिछली सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रायल में हो रही देरी पर चिंता जताई थी और कहा था कि वह बॉम्बे उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से यह पता करेगा कि संबंधित NIA विशेष अदालत में न्यायाधीश तैनात है या नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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