1 सितंबर 2026
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भारत की 7.8% GDP वृद्धि 'फ्रैजाइल फाइव' से बड़ा बदलाव: रविशंकर प्रसाद, राहुल गांधी पर साधा निशाना

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भारत की 7.8% GDP वृद्धि 'फ्रैजाइल फाइव' से बड़ा बदलाव: रविशंकर प्रसाद, राहुल गांधी पर साधा निशाना

सारांश

वैश्विक संकट के बीच भारत की 7.8% GDP वृद्धि महज एक आँकड़ा नहीं — भाजपा के लिए यह 2013 के 'फ्रैजाइल फाइव' के दाग को मिटाने का राजनीतिक हथियार भी है। रविशंकर प्रसाद ने इसे मोदी नेतृत्व की जीत बताते हुए राहुल गांधी की 'मृत अर्थव्यवस्था' वाली टिप्पणी पर सीधा पलटवार किया।

मुख्य बातें

भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने 1 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अप्रैल-जून 2026 तिमाही की 7.8% जीडीपी वृद्धि को मोदी सरकार की उपलब्धि बताया।
इसी अवधि में कनाडा 1.5% , जर्मनी 1% , ब्रिटेन 2.1% , अमेरिका 2.1% , दक्षिण कोरिया 3.7% और मलेशिया ~6% की दर से बढ़ा।
प्रसाद ने 2013 के 'फ्रैजाइल फाइव' और 'पॉलिसी पैरालिसिस' के दौर से वर्तमान विकास दर तक के सफर को बड़ा बदलाव करार दिया।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के कथित 'मृत अर्थव्यवस्था' वाले बयान पर प्रसाद ने पलटवार करते हुए उन पर आर्थिक समझ की कमी का आरोप लगाया।
प्रसाद ने PM नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्रालय के आर्थिक प्रबंधन को इस उपलब्धि का प्रमुख आधार बताया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और सांसद रविशंकर प्रसाद ने 1 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अप्रैल-जून 2026 तिमाही की 7.8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि को केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों और स्थिर नेतृत्व की उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि खाड़ी संकट, तेल आपूर्ति की बाधाओं और वैश्विक सप्लाई चेन में व्यवधान के बावजूद भारत ने यह विकास दर हासिल की है।

वैश्विक तुलना में भारत की स्थिति

प्रसाद ने इसी अवधि में प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की विकास दरों का हवाला देते हुए कहा कि कनाडा की वृद्धि दर करीब 1.5 प्रतिशत, जर्मनी की 1 प्रतिशत, ब्रिटेन की 2.1 प्रतिशत, अमेरिका की करीब 2.1 प्रतिशत, मलेशिया की लगभग 6 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया की करीब 3.7 प्रतिशत रही। उनके अनुसार, वैश्विक संकट के बीच भारत की 7.8 प्रतिशत की विकास दर देश की आर्थिक क्षमता और नीतिगत मजबूती को रेखांकित करती है।

उन्होंने यह भी कहा कि खाड़ी क्षेत्र में तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी चुनौतियों और तेल की आवाजाही में संभावित बाधाओं का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ा, फिर भी भारत ने अपनी विकास गति बनाए रखी।

'फ्रैजाइल फाइव' से 7.8% तक का सफर

प्रसाद ने 2013 के भारत और वर्तमान आर्थिक स्थिति की तुलना करते हुए कहा कि उस समय भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'फ्रैजाइल फाइव' — यानी कमजोर मानी जाने वाली पाँच प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं — में गिना जाता था। उन्होंने उस दौर में 'पॉलिसी पैरालिसिस' यानी नीतिगत ठहराव का भी उल्लेख किया।

उन्होंने अपना एक व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि 2013 में जब वे राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता थे, तब न्यूयॉर्क में एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के दौरान कुछ अमेरिकी और भारतीय-अमेरिकी निवेशकों ने उनसे भारत में अपने निवेश की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा कि उन्होंने तब निवेशकों को आश्वस्त किया था कि उनकी पार्टी के सत्ता में आने के बाद स्थिति बदलेगी। प्रसाद के अनुसार, 'फ्रैजाइल फाइव' से निकलकर 7.8 प्रतिशत की विकास दर तक पहुँचना उसी बदलाव का प्रमाण है।

मोदी सरकार की नीतियों की सराहना

भाजपा सांसद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता और नेतृत्व की सराहना की। साथ ही उन्होंने वित्त मंत्रालय और वित्त मंत्री के आर्थिक प्रबंधन को भी भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति में महत्वपूर्ण योगदान देने वाला बताया। उन्होंने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग, व्यापार, निर्माण और सर्विस सेक्टर — सभी क्षेत्रों के समन्वित योगदान ने इस विकास दर को संभव बनाया।

राहुल गांधी पर तीखा हमला

प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रसाद ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने सवाल किया कि क्या राहुल गांधी ने भारत का मनोबल गिराने और देश को कमजोर दिखाने का ठेका ले रखा है। उन्होंने राहुल गांधी के उस कथित बयान का उल्लेख किया जिसमें उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था को 'मृत अर्थव्यवस्था' बताया था।

प्रसाद ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी को आर्थिक प्रबंधन और आर्थिक विकास की पर्याप्त समझ नहीं है। उनके अनुसार, 7.8 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि का ताजा आँकड़ा राहुल गांधी के उस दावे का सीधा जवाब है।

आगे की दिशा

प्रसाद ने कहा कि भारत की मौजूदा आर्थिक स्थिति को केवल एक तिमाही के आँकड़े के रूप में नहीं, बल्कि पिछले वर्षों के व्यापक आर्थिक बदलाव के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि तेज आर्थिक विकास के लिए स्थिर नेतृत्व अनिवार्य है — ऐसा नेतृत्व जो संकट को भी अवसर में बदलने की क्षमता रखता हो। भाजपा नेता ने कहा कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत आज मजबूती के साथ खड़ा है और यह सफर आगे भी जारी रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि स्वतंत्र आर्थिक विश्लेषण — और इसे उसी नजरिए से पढ़ा जाना चाहिए। 7.8% की वृद्धि दर निश्चित रूप से उल्लेखनीय है, लेकिन यह सवाल बना रहता है कि यह वृद्धि किस हद तक रोजगार, वास्तविक आय और असंगठित क्षेत्र तक पहुँची है — जो आँकड़ों में अक्सर दिखती नहीं। 2013 की तुलना एक चुनिंदा बेसलाइन है; उस दौर में वैश्विक परिस्थितियाँ भी भिन्न थीं। राहुल गांधी पर हमला राजनीतिक रूप से स्वाभाविक है, लेकिन विपक्ष की आर्थिक आलोचनाओं का खंडन केवल जीडीपी के एक तिमाही आँकड़े से नहीं होता — उसके लिए रोजगार डेटा, मुद्रास्फीति और आय वितरण की व्यापक तस्वीर भी जरूरी है।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अप्रैल-जून 2026 तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर कितनी रही?
अप्रैल-जून 2026 तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही। भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने इसे वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत की नीतिगत मजबूती का प्रमाण बताया।
रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी पर क्या आरोप लगाए?
रविशंकर प्रसाद ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी को आर्थिक प्रबंधन और आर्थिक विकास की पर्याप्त समझ नहीं है। उन्होंने राहुल गांधी के कथित 'मृत अर्थव्यवस्था' वाले बयान का हवाला देते हुए कहा कि 7.8% की जीडीपी वृद्धि उस दावे का सीधा जवाब है।
'फ्रैजाइल फाइव' क्या था और भारत इससे कैसे बाहर निकला?
'फ्रैजाइल फाइव' वह अंतरराष्ट्रीय पदनाम था जो 2013 के आसपास भारत सहित पाँच कमजोर उभरती अर्थव्यवस्थाओं को दिया गया था। रविशंकर प्रसाद के अनुसार, मोदी सरकार की नीतियों, स्थिर नेतृत्व और मैन्युफैक्चरिंग से लेकर सर्विस सेक्टर तक के समन्वित प्रदर्शन ने भारत को उस दौर से निकालकर 7.8% की वृद्धि दर तक पहुँचाया।
इसी तिमाही में अन्य प्रमुख देशों की विकास दर क्या रही?
रविशंकर प्रसाद के अनुसार, अप्रैल-जून 2026 तिमाही में कनाडा ~1.5%, जर्मनी ~1%, ब्रिटेन ~2.1%, अमेरिका ~2.1%, दक्षिण कोरिया ~3.7% और मलेशिया ~6% की दर से बढ़ा। भारत की 7.8% की दर इन सभी से अधिक रही।
क्या यह जीडीपी वृद्धि दर दीर्घकालिक आर्थिक सुधार का संकेत है?
प्रसाद ने कहा कि इस आँकड़े को केवल एक तिमाही के नतीजे के रूप में नहीं, बल्कि 2013 के 'फ्रैजाइल फाइव' दौर से लेकर अब तक के व्यापक आर्थिक बदलाव के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। हालाँकि, स्वतंत्र विशेषज्ञ रोजगार सृजन, आय वितरण और असंगठित क्षेत्र के प्रदर्शन जैसे पहलुओं को भी दीर्घकालिक मूल्यांकन के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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