1 सितंबर 2026
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मेट्टूर बांध से कावेरी डेल्टा के लिए पानी छोड़ा, CM विजय ने खोले स्लुइस गेट; सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 15 सितंबर तक टली

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मेट्टूर बांध से कावेरी डेल्टा के लिए पानी छोड़ा, CM विजय ने खोले स्लुइस गेट; सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 15 सितंबर तक टली

सारांश

तीन महीने की देरी के बाद मुख्यमंत्री विजय ने मेट्टूर बांध खोला — लेकिन राहत अधूरी है। सर्वोच्च न्यायालय में तमिलनाडु-कर्नाटक का कावेरी जल विवाद जारी है और 15 सितंबर की सुनवाई तय करेगी कि डेल्टा किसानों को उनका हिस्सा मिलेगा या नहीं।

मुख्य बातें

जोसेफ विजय ने 1 सितंबर 2026 को मेट्टूर स्थित स्टेनली जलाशय के स्लुइस गेट खोले।
परंपरागत तिथि 12 जून की तुलना में लगभग तीन महीने की देरी से पानी छोड़ा गया; कम वर्षा और अपर्याप्त भंडारण मुख्य कारण।
सरकार की योजना 45 दिनों तक जल-प्रवाह जारी रखने की है, जो जलाशय की आवक पर निर्भर होगा।
सर्वोच्च न्यायालय ने कावेरी जल विवाद में सुनवाई 15 सितंबर तक स्थगित की; न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने दोनों राज्यों से रिकॉर्ड माँगे।
कर्नाटक ने 30 अगस्त को 9,888 क्यूसेक पानी छोड़ा, जो 9,000 क्यूसेक की निर्धारित सीमा से अधिक; तमिलनाडु ने कमी का आरोप जारी रखा।
यह 10 मई को पद संभालने के बाद CM विजय का मेट्टूर का पहला दौरा था।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने मंगलवार, 1 सितंबर को मेट्टूर स्थित स्टेनली जलाशय के स्लुइस गेट खोलकर कावेरी डेल्टा में सिंचाई के लिए पानी छोड़ा। कम वर्षा और जलाशय में अपर्याप्त भंडारण के चलते परंपरागत तिथि से लगभग तीन महीने की देरी के बाद यह कदम उठाया गया, जो डेल्टा जिलों के उन किसानों के लिए राहत लेकर आया है जो खेती के मौसम की शुरुआत के लिए जल-आपूर्ति का इंतज़ार कर रहे थे।

मुख्य घटनाक्रम

सरकार की योजना 1 सितंबर से 45 दिनों तक जलाशय में पानी की आवक और उपलब्धता के आधार पर जल-प्रवाह जारी रखने की है। गौरतलब है कि कावेरी डेल्टा में व्यापक रूप से उगाई जाने वाली अल्पकालिक धान की फसल 'कुरुवई' के लिए मेट्टूर बांध से प्रतिवर्ष 12 जून को पानी छोड़ा जाता है। इस वर्ष नदी के जलग्रहण क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा के कारण यह परंपरागत प्रक्रिया टालनी पड़ी।

यह कार्यक्रम 10 मई को मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद विजय का मेट्टूर का पहला दौरा भी था।

कावेरी जल विवाद की पृष्ठभूमि

यह शुरुआत ऐसे समय में हुई है जब तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच कावेरी जल-बंटवारे को लेकर विवाद गहरा गया है। सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को इस मामले की सुनवाई 15 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी। तमिलनाडु ने अदालत से माँग की थी कि कर्नाटक को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देशों के अनुसार पानी छोड़ने में हुई कमी को पूरा करने के आदेश दिए जाएँ।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने दोनों राज्यों को अगली सुनवाई से पहले की घटनाओं का ब्यौरा रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया।

दोनों राज्यों के तर्क

तमिलनाडु की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सी.एस. वैद्यनाथन ने कहा कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा निर्देश दर्ज किए जाने के बावजूद कर्नाटक कमी की भरपाई करने में विफल रहा है। उन्होंने अदालत को बताया कि राज्य की बड़ी कृषि भूमि कावेरी के जल पर निर्भर है और अनुरोध किया कि तमिलनाडु को उसका उचित हिस्सा सुनिश्चित किया जाए।

कर्नाटक ने इन आरोपों का खंडन किया। कर्नाटक की ओर से अधिवक्ता श्याम दीवान ने पीठ को बताया कि 30 अगस्त को 9,000 क्यूसेक की निर्धारित आवश्यकता के मुकाबले 9,888 क्यूसेक पानी छोड़ा गया और बाद में प्रवाह 11,000 क्यूसेक से अधिक हो गया। पीठ ने यह भी दर्ज किया कि कर्नाटक ने 12 अगस्त से जल-प्रवाह 11,000 से बढ़ाकर 12,000 क्यूसेक कर दिया था।

किसानों पर असर

तमिलनाडु के डेल्टा जिलों — तंजावुर, तिरुवारुर और नागपट्टिनम — के किसान लंबे समय से सिंचाई जल की प्रतीक्षा में थे। कावेरी के पानी की निरंतर अनिश्चितता ने खेती के मौसम की योजना को बाधित किया है। तमिलनाडु ने चेतावनी दी है कि जल-आपूर्ति में लगातार कमी डेल्टा क्षेत्र की कृषि पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।

आगे क्या

सर्वोच्च न्यायालय में अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी, जब दोनों राज्य अपने-अपने जल-प्रवाह के आँकड़े रिकॉर्ड पर रखेंगे। इस बीच, मेट्टूर से जल-प्रवाह की स्थिति जलाशय की आवक पर निर्भर रहेगी और किसानों की नज़रें अगले 45 दिनों की आपूर्ति पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

हर मानसून में यही टकराव नए सिरे से उभरता है। असली सवाल यह है कि क्या कोई स्थायी अंतर-राज्यीय तंत्र बन सकता है जो न्यायालय की दहलीज़ पर जाए बिना डेल्टा किसानों को समय पर पानी सुनिश्चित करे — अभी तक इसका जवाब नहीं मिला है।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेट्टूर बांध से इस साल पानी छोड़ने में इतनी देरी क्यों हुई?
इस साल कावेरी नदी के जलग्रहण क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा और स्टेनली जलाशय में अपर्याप्त भंडारण के कारण परंपरागत तिथि 12 जून की बजाय 1 सितंबर को पानी छोड़ा गया — लगभग तीन महीने की देरी। यह देरी कुरुवई धान की फसल के मौसम को सीधे प्रभावित करती है।
कावेरी जल विवाद में सुप्रीम कोर्ट की क्या भूमिका है?
सर्वोच्च न्यायालय तमिलनाडु की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा है जिसमें कर्नाटक को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देशों के अनुसार पानी छोड़ने में हुई कमी पूरी करने के आदेश देने की माँग की गई है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने अगली सुनवाई 15 सितंबर तय की है।
कर्नाटक ने तमिलनाडु के जल-कमी के आरोपों पर क्या कहा?
कर्नाटक ने आरोपों का खंडन किया। राज्य के अधिवक्ता श्याम दीवान ने अदालत को बताया कि 30 अगस्त को 9,000 क्यूसेक की ज़रूरत के मुकाबले 9,888 क्यूसेक पानी छोड़ा गया और बाद में प्रवाह 11,000 क्यूसेक से अधिक हो गया। पीठ ने यह भी दर्ज किया कि 12 अगस्त से प्रवाह 12,000 क्यूसेक तक बढ़ाया गया।
कुरुवई फसल क्या है और इस पर कावेरी जल का क्या असर है?
कुरुवई कावेरी डेल्टा में उगाई जाने वाली अल्पकालिक धान की फसल है, जो सिंचाई के लिए पूरी तरह मेट्टूर बांध से छोड़े जाने वाले पानी पर निर्भर है। सामान्यतः 12 जून को पानी छोड़ा जाता है, लेकिन इस वर्ष तीन महीने की देरी ने फसल चक्र को बाधित किया है।
CM विजय का मेट्टूर दौरा क्यों महत्वपूर्ण था?
10 मई 2026 को मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद यह सी. जोसेफ विजय का मेट्टूर का पहला दौरा था। इस दौरे में उन्होंने स्वयं स्लुइस गेट खोलकर डेल्टा किसानों को सिंचाई जल उपलब्ध कराने की प्रतीकात्मक और प्रशासनिक पहल की।
राष्ट्र प्रेस
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