कावेरी जल विवाद: 22 जुलाई को CWMA की बैठक, तमिलनाडु को 21 TMC पानी की कमी, कर्नाटक पर दबाव
सारांश
मुख्य बातें
कावेरी नदी जल विवाद एक बार फिर गंभीर मोड़ पर आ गया है। कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) की एक अहम बैठक 22 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होने जा रही है, जिसमें तमिलनाडु को हो रही पानी की गंभीर कमी और कर्नाटक द्वारा जल प्रवाह का मुद्दा केंद्र में रहेगा। मौजूदा जल वर्ष में तमिलनाडु को उसके निर्धारित हिस्से से लगभग 21 टीएमसी कम पानी मिला है, जिससे कावेरी डेल्टा क्षेत्र में कृषि संकट गहराता जा रहा है।
पानी की कमी के आंकड़े
आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 19 जुलाई के बीच दोनों राज्यों की सीमा पर स्थित आधिकारिक जल मापन केंद्र बिलिगुंडलु पर तमिलनाडु को केवल करीब 3.44 टीएमसी पानी प्राप्त हुआ है। कावेरी जल बंटवारा व्यवस्था के तहत इस अवधि में राज्य को इससे करीब 21 टीएमसी अधिक पानी मिलना चाहिए था। यह अंतर तमिलनाडु के किसानों और जल विशेषज्ञों दोनों के लिए चिंता का गंभीर विषय बन गया है।
चेन्नई के जल संसाधन विशेषज्ञों का कहना है कि कर्नाटक के जलाशयों में पानी का प्रवाह संतोषजनक है, लेकिन तमिलनाडु की ओर जल प्रवाह अपेक्षाकृत बहुत कम रखा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा जल वर्ष की शुरुआत से अब तक कर्नाटक के कावेरी बेसिन के चार प्रमुख बांधों में करीब 30 टीएमसी पानी आया है, जबकि इसी अवधि में तमिलनाडु को 4 टीएमसी से भी कम पानी मिला है।
कर्नाटक के जलाशयों की स्थिति
कर्नाटक राज्य प्राकृतिक आपदा निगरानी केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक, सोमवार तक कर्नाटक के चारों प्रमुख जलाशयों में कुल 31.61 टीएमसी पानी का प्रवाह दर्ज किया गया, जबकि वहां से केवल 5.26 टीएमसी पानी ही छोड़ा गया। फिलहाल इन जलाशयों में करीब 59 टीएमसी पानी संग्रहीत है, जबकि उनकी कुल भंडारण क्षमता 114.57 टीएमसी है।
यह स्थिति ऐसे समय सामने आई है जब एक सप्ताह पहले हुई कावेरी जल विनियमन समिति की बैठक में दोनों राज्यों ने अपने-अपने पक्ष रखे थे। गौरतलब है कि उस बैठक में कोई निर्णय नहीं लिया गया और मामले की समीक्षा 28 जुलाई को होने वाली अगली बैठक तक के लिए टाल दी गई थी।
मेट्टूर बांध की चिंताजनक स्थिति
तमिलनाडु के सबसे महत्वपूर्ण सिंचाई स्रोत मेट्टूर बांध का जलस्तर भी गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। मंगलवार सुबह बांध का जलस्तर 75.14 फीट दर्ज किया गया, जबकि इसकी पूर्ण क्षमता 120 फीट है। बांध में इस समय करीब 37.3 टीएमसी पानी मौजूद है, जबकि इसकी कुल भंडारण क्षमता 93.47 टीएमसी है। कावेरी डेल्टा में सिंचाई का पूरा तंत्र मेट्टूर बांध पर निर्भर है, इसलिए इसका घटता जलस्तर किसानों के लिए सीधा खतरा है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और विपक्ष का हमला
बढ़ती जल संकट की पृष्ठभूमि में अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) के महासचिव पलानीस्वामी ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार तमिलनाडु के हिस्से का कावेरी जल दिलाने में विफल रही है। पलानीस्वामी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के साथ न तो प्रभावी ढंग से बातचीत की और न ही पर्याप्त दबाव बनाया।
पलानीस्वामी ने यह भी आरोप लगाया कि कर्नाटक सरकार कावेरी विवाद पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि कावेरी डेल्टा के किसान सिंचाई के लिए पानी का इंतजार कर रहे हैं और पानी नहीं मिलने से बड़ी संख्या में कृषि मजदूरों के सामने रोजगार का संकट पैदा हो गया है। उन्होंने तमिलनाडु सरकार से मांग की कि वह कर्नाटक पर और अधिक दबाव बनाए।
आगे क्या होगा
22 जुलाई की CWMA बैठक में दोनों राज्यों की स्थिति की समीक्षा होने की उम्मीद है। इसके बाद 28 जुलाई को होने वाली अगली बैठक में कोई ठोस निर्णय लिए जाने की संभावना है। कावेरी जल विवाद का यह नया अध्याय दशकों पुराने अंतर-राज्यीय जल संघर्ष की उस कड़ी में जुड़ता है, जिसे सर्वोच्च न्यायालय और केंद्रीय प्राधिकरण बार-बार सुलझाने की कोशिश करते रहे हैं। खरीफ सीजन की फसल पर मंडराता खतरा इस विवाद को और अधिक तात्कालिक बना देता है।