कावेरी जल बंटवारे पर ईपीएस का तमिलनाडु सरकार को अल्टीमेटम, 22 जुलाई की CWMA बैठक से पहले बढ़ा दबाव
सारांश
मुख्य बातें
अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) के महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी ने 20 जुलाई को तमिलनाडु सरकार से आग्रह किया कि वह 22 जुलाई को होने वाली कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) की बैठक में कर्नाटक पर कड़ा दबाव बनाए, ताकि राज्य को जून और जुलाई दोनों महीनों का कावेरी नदी का पूरा जल-हिस्सा मिल सके। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ सरकार किसानों के हितों और राज्य के जल अधिकारों की रक्षा करने में विफल रही है।
जल आवंटन में भारी कमी
पलानीस्वामी ने अपने बयान में आँकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि कर्नाटक पर प्रतिवर्ष तमिलनाडु को 177.25 हजार मिलियन घन फुट (TMC फीट) पानी छोड़ने का दायित्व है। उन्होंने दावा किया कि जून में देय 9.19 TMC फीट में से केवल 2.91 TMC फीट पानी ही छोड़ा गया — यानी तय मात्रा का एक-तिहाई से भी कम। इसके अतिरिक्त, जुलाई में 31.24 TMC फीट पानी छोड़ा जाना था, लेकिन जून की कमी और जुलाई का आवंटन दोनों ही काफी हद तक लंबित हैं।
सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की अनदेखी का आरोप
पलानीस्वामी ने कहा कि CWMA और कावेरी जल विनियमन समिति का गठन सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत इसीलिए किया गया था ताकि कर्नाटक निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार हर महीने तमिलनाडु को पानी छोड़े। उन्होंने आरोप लगाया कि यद्यपि प्राधिकरण ने पिछले महीने कर्नाटक को मासिक आवंटन जारी करने का निर्देश दिया था, न तो प्राधिकरण ने उस आदेश का पालन कराया और न ही तमिलनाडु सरकार ने इसके क्रियान्वयन के लिए पर्याप्त दबाव बनाया।
उन्होंने कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के उस हालिया बयान की भी कड़ी आलोचना की, जिसमें उन्होंने कहा था कि कर्नाटक के जलाशयों के भर जाने के बाद ही पानी छोड़ा जाएगा। पलानीस्वामी ने इस रुख को सर्वोच्च न्यायालय के फैसले और अंतर-राज्यीय जल बंटवारे को नियंत्रित करने वाले स्थापित दिशानिर्देशों के विपरीत बताया और कहा कि ऐसा दृष्टिकोण कानून के शासन को कमजोर करता है।
किसानों और आम जनता पर असर
AIADMK नेता ने रेखांकित किया कि कावेरी डेल्टा के किसानों की आजीविका और 20 से अधिक जिलों में लाखों लोगों की पेयजल आवश्यकताएँ इस नदी पर प्रत्यक्ष रूप से निर्भर हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी और देरी से कुरुवाई की खेती और हजारों किसान परिवारों तथा कृषि श्रमिकों की आजीविका बुरी तरह प्रभावित होगी। गौरतलब है कि कुरुवाई तमिलनाडु की एक प्रमुख अल्पकालिक धान फसल है, जो जून-जुलाई में बोई जाती है और जल-आपूर्ति पर पूरी तरह निर्भर रहती है।
सरकार पर राजनीतिक हमला
पलानीस्वामी ने तमिलनाडु की सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि उसने सत्ता संभालने के बाद सहकारी कृषि ऋण माफी के अपने चुनावी वादे को कमजोर कर दिया — घोषित राहत को सीमित करके, जिससे कई किसान असंतुष्ट हैं। उनके अनुसार, लंबित जल निकासी के लिए कर्नाटक पर दबाव न डालना डेल्टा क्षेत्र के किसानों के साथ विश्वासघात है।
आगे क्या होगा
22 जुलाई को होने वाली CWMA की बैठक इस विवाद में एक महत्वपूर्ण पड़ाव होगी। पलानीस्वामी ने राज्य सरकार से माँग की है कि वह इस बैठक में कर्नाटक पर कड़ा दबाव बनाए और जून तथा जुलाई दोनों महीनों का बकाया जल-हिस्सा सुनिश्चित करे। यह ऐसे समय में आया है जब कावेरी जल विवाद दशकों से तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है, और सर्वोच्च न्यायालय के बार-बार के हस्तक्षेप के बावजूद ज़मीनी स्तर पर अनुपालन अधूरा रहा है।