कावेरी जल विवाद: कर्नाटक के पास सिर्फ 46 टीएमसी पानी, सीडब्ल्यूएमए में अपील का फैसला
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक सरकार ने बुधवार, 29 जुलाई 2026 को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) के समक्ष अपील दायर करने का निर्णय लिया, जिसमें कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) के उस निर्देश को चुनौती दी जाएगी जिसमें तमिलनाडु के लिए 3,500 क्यूसेक पानी 15 दिनों तक छोड़ने को कहा गया था। राज्य के जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने स्पष्ट किया कि जलाशयों में महज 46 टीएमसी पानी शेष होने और वर्षा में 66 प्रतिशत की कमी के चलते कर्नाटक फिलहाल यह निर्देश मानने की स्थिति में नहीं है।
मुख्य घटनाक्रम
बेंगलुरु के विधान सौधा में जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, कावेरी बेसिन के प्रतिनिधियों और कानूनी विशेषज्ञों के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद मंत्री रेड्डी ने प्रेस वार्ता में यह जानकारी दी। सीडब्ल्यूआरसी ने कर्नाटक को गुरुवार सुबह से अगले 15 दिनों तक तमिलनाडु के लिए 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया था।
रेड्डी ने कहा, 'कावेरी जल विनियमन समिति ने कर्नाटक को गुरुवार सुबह से अगले 15 दिनों तक तमिलनाडु के लिए 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया है, लेकिन फिलहाल राज्य की स्थिति ऐसी नहीं है कि हम पानी छोड़ सकें। इसलिए हमने आज ही कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के समक्ष इस निर्देश के खिलाफ अपील करने का फैसला किया है।'
जलाशयों की स्थिति और वर्षा का संकट
मंत्री रेड्डी ने बताया कि कावेरी बेसिन में इस वर्ष सामान्य से 66 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। राज्य के जलाशयों में अभी केवल 46 टीएमसी पानी उपलब्ध है, जबकि कर्नाटक के 10 जिलों में पेयजल आपूर्ति बनाए रखने के लिए ही करीब 12 टीएमसी पानी की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा, 'फिलहाल हमारे जलाशयों में केवल 46 टीएमसी पानी है। वहीं, राज्य के 10 जिलों में पीने के पानी की जरूरत पूरी करने के लिए करीब 12 टीएमसी पानी चाहिए। ऐसे में कावेरी जल विनियमन समिति के निर्देश का पालन करना हमारे लिए संभव नहीं है।' गौरतलब है कि तय व्यवस्था के अनुसार इस सीजन में कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए 39 टीएमसी पानी छोड़ना था, जो सामान्य वर्षा की स्थिति में संभव होता।
तमिलनाडु की जल स्थिति पर कर्नाटक का दावा
मंत्री रेड्डी ने दावा किया कि पड़ोसी राज्य तमिलनाडु की जल स्थिति कर्नाटक के मुकाबले बेहतर है। उन्होंने कहा कि आंकड़ों के अनुसार, तमिलनाडु के मेट्टूर जलाशय में करीब 41 टीएमसी पानी मौजूद है और वहाँ जल भंडारण की स्थिति बेहतर है। इसके अतिरिक्त, वर्षा से भी करीब 36 टीएमसी पानी उपलब्ध हुआ है और राज्य में पेयजल का कोई संकट नहीं है।
विपक्ष के आरोपों पर पलटवार
विपक्ष के नेता आर. अशोक के इस आरोप को कि कर्नाटक सीडब्ल्यूआरसी के समक्ष अपना पक्ष प्रभावी ढंग से नहीं रख सका, मंत्री रेड्डी ने सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा, 'अंतरराज्यीय जल विवादों के मुख्य तकनीकी सलाहकार श्रीरामैय्या ने कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण के सामने हमेशा कर्नाटक का पक्ष मजबूती से रखा है। उन्होंने सिर्फ हमारी सरकार ही नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार के दौरान भी राज्य के कानूनी सलाहकार के रूप में काम किया था। पिछले करीब 30 वर्षों से अलग-अलग सरकारें उनकी विशेषज्ञता पर भरोसा करती रही हैं।'
रेड्डी ने यह भी स्पष्ट किया कि पानी छोड़ने से जुड़े सभी फैसलों और उनकी निगरानी की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक ने अभी तक तमिलनाडु के लिए कोई पानी नहीं छोड़ा है और वह केवल अपील दायर कर रहा है।
आगे क्या होगा
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के कर्नाटक दौरे की खबरों पर रेड्डी ने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है, हालाँकि डी.के. शिवकुमार और मुख्यमंत्री विजय के बीच बातचीत हुई है। मंत्री ने बताया कि सीडब्ल्यूएमए कर्नाटक की अपील पर विचार के लिए जल्द बैठक बुला सकता है और राज्य उस बैठक के फैसले का इंतजार करेगा। यह विवाद उस समय और पेचीदा हो गया है जब मानसून की अनिश्चितता के बीच दोनों राज्यों की जल-जरूरतें आपस में टकरा रही हैं।