29 जुलाई 2026
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कावेरी जल विवाद: कर्नाटक के पास सिर्फ 46 टीएमसी पानी, सीडब्ल्यूएमए में अपील का फैसला

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कावेरी जल विवाद: कर्नाटक के पास सिर्फ 46 टीएमसी पानी, सीडब्ल्यूएमए में अपील का फैसला

सारांश

कर्नाटक के जलाशयों में केवल 46 टीएमसी पानी और बेसिन में 66% वर्षा की कमी — फिर भी सीडब्ल्यूआरसी ने 15 दिन तक 3,500 क्यूसेक छोड़ने का आदेश दे दिया। राज्य ने निर्देश मानने से इनकार करते हुए सीडब्ल्यूएमए में अपील का रास्ता चुना। दोनों राज्यों के बीच यह जल-टकराव अब प्राधिकरण के दरवाजे पर है।

मुख्य बातें

कर्नाटक ने 29 जुलाई 2026 को सीडब्ल्यूएमए में सीडब्ल्यूआरसी के 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने के निर्देश के खिलाफ अपील का फैसला किया।
राज्य के जलाशयों में अभी केवल 46 टीएमसी पानी उपलब्ध है; 10 जिलों की पेयजल जरूरत के लिए ही 12 टीएमसी चाहिए।
कावेरी बेसिन में इस वर्ष सामान्य से 66 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है।
जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने कहा — तमिलनाडु के मेट्टूर जलाशय में करीब 41 टीएमसी पानी मौजूद है और वहाँ पेयजल संकट नहीं है।
अशोक के आरोपों को खारिज करते हुए रेड्डी ने कहा — तकनीकी सलाहकार श्रीरामैय्या पिछले 30 वर्षों से कर्नाटक का पक्ष रख रहे हैं।
सीडब्ल्यूएमए जल्द बैठक बुला सकता है; तब तक कर्नाटक ने तमिलनाडु के लिए कोई पानी नहीं छोड़ा है।

कर्नाटक सरकार ने बुधवार, 29 जुलाई 2026 को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) के समक्ष अपील दायर करने का निर्णय लिया, जिसमें कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) के उस निर्देश को चुनौती दी जाएगी जिसमें तमिलनाडु के लिए 3,500 क्यूसेक पानी 15 दिनों तक छोड़ने को कहा गया था। राज्य के जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने स्पष्ट किया कि जलाशयों में महज 46 टीएमसी पानी शेष होने और वर्षा में 66 प्रतिशत की कमी के चलते कर्नाटक फिलहाल यह निर्देश मानने की स्थिति में नहीं है।

मुख्य घटनाक्रम

बेंगलुरु के विधान सौधा में जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, कावेरी बेसिन के प्रतिनिधियों और कानूनी विशेषज्ञों के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद मंत्री रेड्डी ने प्रेस वार्ता में यह जानकारी दी। सीडब्ल्यूआरसी ने कर्नाटक को गुरुवार सुबह से अगले 15 दिनों तक तमिलनाडु के लिए 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया था।

रेड्डी ने कहा, 'कावेरी जल विनियमन समिति ने कर्नाटक को गुरुवार सुबह से अगले 15 दिनों तक तमिलनाडु के लिए 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया है, लेकिन फिलहाल राज्य की स्थिति ऐसी नहीं है कि हम पानी छोड़ सकें। इसलिए हमने आज ही कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के समक्ष इस निर्देश के खिलाफ अपील करने का फैसला किया है।'

जलाशयों की स्थिति और वर्षा का संकट

मंत्री रेड्डी ने बताया कि कावेरी बेसिन में इस वर्ष सामान्य से 66 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। राज्य के जलाशयों में अभी केवल 46 टीएमसी पानी उपलब्ध है, जबकि कर्नाटक के 10 जिलों में पेयजल आपूर्ति बनाए रखने के लिए ही करीब 12 टीएमसी पानी की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा, 'फिलहाल हमारे जलाशयों में केवल 46 टीएमसी पानी है। वहीं, राज्य के 10 जिलों में पीने के पानी की जरूरत पूरी करने के लिए करीब 12 टीएमसी पानी चाहिए। ऐसे में कावेरी जल विनियमन समिति के निर्देश का पालन करना हमारे लिए संभव नहीं है।' गौरतलब है कि तय व्यवस्था के अनुसार इस सीजन में कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए 39 टीएमसी पानी छोड़ना था, जो सामान्य वर्षा की स्थिति में संभव होता।

तमिलनाडु की जल स्थिति पर कर्नाटक का दावा

मंत्री रेड्डी ने दावा किया कि पड़ोसी राज्य तमिलनाडु की जल स्थिति कर्नाटक के मुकाबले बेहतर है। उन्होंने कहा कि आंकड़ों के अनुसार, तमिलनाडु के मेट्टूर जलाशय में करीब 41 टीएमसी पानी मौजूद है और वहाँ जल भंडारण की स्थिति बेहतर है। इसके अतिरिक्त, वर्षा से भी करीब 36 टीएमसी पानी उपलब्ध हुआ है और राज्य में पेयजल का कोई संकट नहीं है।

विपक्ष के आरोपों पर पलटवार

विपक्ष के नेता आर. अशोक के इस आरोप को कि कर्नाटक सीडब्ल्यूआरसी के समक्ष अपना पक्ष प्रभावी ढंग से नहीं रख सका, मंत्री रेड्डी ने सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा, 'अंतरराज्यीय जल विवादों के मुख्य तकनीकी सलाहकार श्रीरामैय्या ने कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण के सामने हमेशा कर्नाटक का पक्ष मजबूती से रखा है। उन्होंने सिर्फ हमारी सरकार ही नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार के दौरान भी राज्य के कानूनी सलाहकार के रूप में काम किया था। पिछले करीब 30 वर्षों से अलग-अलग सरकारें उनकी विशेषज्ञता पर भरोसा करती रही हैं।'

रेड्डी ने यह भी स्पष्ट किया कि पानी छोड़ने से जुड़े सभी फैसलों और उनकी निगरानी की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक ने अभी तक तमिलनाडु के लिए कोई पानी नहीं छोड़ा है और वह केवल अपील दायर कर रहा है।

आगे क्या होगा

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के कर्नाटक दौरे की खबरों पर रेड्डी ने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है, हालाँकि डी.के. शिवकुमार और मुख्यमंत्री विजय के बीच बातचीत हुई है। मंत्री ने बताया कि सीडब्ल्यूएमए कर्नाटक की अपील पर विचार के लिए जल्द बैठक बुला सकता है और राज्य उस बैठक के फैसले का इंतजार करेगा। यह विवाद उस समय और पेचीदा हो गया है जब मानसून की अनिश्चितता के बीच दोनों राज्यों की जल-जरूरतें आपस में टकरा रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

कर्नाटक अपील करता है, और दोनों राज्य राजनीतिक बयानबाजी में उलझ जाते हैं। असली सवाल यह है कि जब कावेरी बेसिन में वर्षा 66% कम हो, तो क्या मौजूदा जल-बँटवारे का फॉर्मूला सूखे की परिस्थितियों के लिए पर्याप्त लचीला है? दशकों पुराना ट्रिब्यूनल फैसला औसत वर्षा मानकर बना था — जलवायु परिवर्तन के दौर में यह मानक ही विवाद की जड़ बन गया है। जब तक केंद्र सरकार जलवायु-संवेदनशील जल-बँटवारे का कोई स्थायी तंत्र नहीं बनाती, यह विवाद हर सूखे मानसून में दोहराया जाता रहेगा।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक ने सीडब्ल्यूएमए में अपील क्यों करने का फैसला किया?
कर्नाटक के जलाशयों में केवल 46 टीएमसी पानी शेष है और कावेरी बेसिन में इस वर्ष 66% वर्षा की कमी है। इन परिस्थितियों में राज्य ने सीडब्ल्यूआरसी के 3,500 क्यूसेक पानी 15 दिनों तक छोड़ने के निर्देश को चुनौती देने के लिए सीडब्ल्यूएमए में अपील करने का निर्णय लिया।
कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) ने क्या आदेश दिया था?
सीडब्ल्यूआरसी ने कर्नाटक को गुरुवार सुबह से अगले 15 दिनों तक तमिलनाडु के लिए 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया था। कर्नाटक ने इस निर्देश को मानने में असमर्थता जताते हुए सीडब्ल्यूएमए में अपील का रास्ता चुना।
कर्नाटक के जलाशयों में अभी कितना पानी है और 10 जिलों को कितनी जरूरत है?
राज्य के जलाशयों में अभी केवल 46 टीएमसी पानी उपलब्ध है। इसमें से कर्नाटक के 10 जिलों की पेयजल जरूरत पूरी करने के लिए ही करीब 12 टीएमसी पानी चाहिए, जिससे तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
तमिलनाडु के मेट्टूर जलाशय की स्थिति क्या है?
जल संसाधन मंत्री रामलिंगा रेड्डी के अनुसार, आंकड़ों के अनुसार तमिलनाडु के मेट्टूर जलाशय में करीब 41 टीएमसी पानी मौजूद है और वर्षा से करीब 36 टीएमसी अतिरिक्त पानी मिला है। राज्य में पेयजल का कोई संकट नहीं है।
अब आगे क्या होगा — सीडब्ल्यूएमए कब बैठक करेगा?
मंत्री रेड्डी ने बताया कि कर्नाटक की अपील पर विचार के लिए सीडब्ल्यूएमए जल्द बैठक बुला सकता है। राज्य उस बैठक और उसके फैसले का इंतजार करेगा; तब तक कर्नाटक ने तमिलनाडु के लिए कोई पानी नहीं छोड़ा है।
राष्ट्र प्रेस
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