29 जुलाई 2026
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कावेरी विवाद: भाजपा नेता आर. अशोक का आरोप — ₹300 करोड़ फीस के बावजूद कर्नाटक सरकार विफल, तमिलनाडु को 3,500 क्यूसेक पानी

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कावेरी विवाद: भाजपा नेता आर. अशोक का आरोप — ₹300 करोड़ फीस के बावजूद कर्नाटक सरकार विफल, तमिलनाडु को 3,500 क्यूसेक पानी

सारांश

कावेरी विवाद में भाजपा नेता आर. अशोक ने कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर सीधा हमला बोला — ₹300 करोड़ वकील फीस के बावजूद CWRC ने तमिलनाडु को 3,500 क्यूसेक पानी देने का आदेश दिया। बेंगलुरु की पेयजल सुरक्षा दांव पर, और सरकार CWMA में चुनौती की तैयारी में।

मुख्य बातें

अशोक ने 29 जुलाई को दावणगेरे में कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पर कावेरी विवाद में विफलता का आरोप लगाया।
CWRC ने कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश दिया।
अशोक का आरोप — वकीलों को ₹300 करोड़ फीस देने के बावजूद सरकार राज्य के हितों की रक्षा करने में नाकाम रही।
बेंगलुरु समेत कावेरी पर निर्भर क्षेत्रों की पेयजल सुरक्षा पर संकट की चेतावनी।
कर्नाटक सरकार ने CWRC के आदेश को CWMA में चुनौती देने का फैसला किया; राज्य में बारिश की कमी और जलाशयों में अपर्याप्त भंडार का हवाला दिया।

कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने 29 जुलाई को दावणगेरे में पत्रकारों से बातचीत में कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि वकीलों को ₹300 करोड़ की फीस चुकाने के बावजूद राज्य सरकार कावेरी जल-बंटवारा विवाद में कर्नाटक के हितों की रक्षा करने में नाकाम रही, जिसके परिणामस्वरूप कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) ने तमिलनाडु को 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश दिया।

मुख्य आरोप और घटनाक्रम

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता अशोक ने कहा कि CWRC का यह आदेश कर्नाटक सरकार की लापरवाही और कानूनी मामले की अपर्याप्त तैयारी का सीधा नतीजा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'कानूनी विशेषज्ञों के साथ उचित सलाह-मशविरा नहीं किया गया। ₹300 करोड़ की फीस देने के बावजूद सरकार राज्य के हितों की रक्षा करने में विफल रही है।'

अशोक ने यह भी माँग की कि यदि आवश्यक हो तो सरकार को अपनी कानूनी टीम बदलनी चाहिए और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) में अपील को और अधिक प्रभावी तरीके से लड़ना चाहिए।

पेयजल सुरक्षा पर चिंता

अशोक ने बेंगलुरु और कावेरी नदी पर निर्भर अन्य क्षेत्रों की पेयजल सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जताई। उनके अनुसार, इस आदेश से लाखों लोगों के लिए पीने के पानी का भविष्य खतरे में पड़ सकता है। उन्होंने कहा, 'सरकार को तुरंत कानूनी लड़ाई को मजबूत करना चाहिए और कर्नाटक के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए।'

किसानों और खर्च की प्राथमिकताओं पर सवाल

भाजपा नेता ने कांग्रेस सरकार पर जन-कल्याण की अनदेखी का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब सूखे और फसल के नुकसान से जूझ रहे किसानों को राहत देने की बात आती है, तो सरकार कहती है कि उसके पास पैसे नहीं हैं — जबकि राजनीतिक गतिविधियों और प्रचार-प्रसार पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। उन्होंने इसे 'बेहद निंदनीय' करार दिया।

कर्नाटक सरकार का पक्ष

कर्नाटक सरकार ने राज्य में बारिश की भारी कमी और जलाशयों में अपर्याप्त जलभंडार का हवाला देते हुए CWRC के आदेश को CWMA के समक्ष चुनौती देने का निर्णय लिया है। सरकार का तर्क है कि मौजूदा जल-संकट की स्थिति में इतनी बड़ी मात्रा में पानी छोड़ना राज्य के हितों के विरुद्ध है।

आगे क्या होगा

यह विवाद ऐसे समय में और गहरा हो गया है जब कर्नाटक में मानसून अपेक्षा से कमज़ोर रहा है और कावेरी बेसिन के जलाशयों में जलस्तर चिंताजनक रूप से नीचे है। CWMA में राज्य सरकार की अपील पर आने वाले हफ्तों में सुनवाई अपेक्षित है, जो इस अंतर-राज्यीय जल विवाद की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या खर्च और परिणाम के बीच सीधा संबंध है — या यह आंकड़ा महज़ विपक्षी बयानबाज़ी है। कावेरी विवाद दशकों पुराना है और किसी एक सरकार की 'लापरवाही' से नहीं, बल्कि संरचनात्मक जल-असंतुलन और न्यायिक जटिलताओं से उपजा है। मानसून की कमी के बीच CWRC का आदेश कर्नाटक की राजनीति में संवेदनशील मोड़ है — और भाजपा इसे चुनावी पूंजी में बदलने की कोशिश में है। असल जवाबदेही तब बनेगी जब CWMA की सुनवाई में सरकार की कानूनी तैयारी सार्वजनिक होगी।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कावेरी जल विवाद में CWRC का ताज़ा आदेश क्या है?
कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) ने कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश दिया है। कर्नाटक सरकार ने इस आदेश को CWMA के समक्ष चुनौती देने का फैसला किया है।
भाजपा नेता आर. अशोक ने कर्नाटक सरकार पर क्या आरोप लगाए?
आर. अशोक ने आरोप लगाया कि वकीलों को ₹300 करोड़ की फीस देने के बावजूद सरकार कावेरी विवाद में कर्नाटक के हितों की रक्षा करने में विफल रही। उन्होंने कानूनी तैयारी में लापरवाही और विशेषज्ञों से उचित सलाह न लेने का भी आरोप लगाया।
इस आदेश से बेंगलुरु की पेयजल आपूर्ति पर क्या असर पड़ेगा?
अशोक ने चेतावनी दी है कि बेंगलुरु समेत कावेरी नदी पर निर्भर क्षेत्रों के लाखों लोगों के लिए पेयजल सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। हालाँकि, इसका वास्तविक प्रभाव जलाशयों के मौजूदा स्तर और मानसून की स्थिति पर निर्भर करेगा।
कर्नाटक सरकार CWRC के आदेश को कहाँ चुनौती दे रही है?
कर्नाटक सरकार ने CWRC के आदेश को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के समक्ष चुनौती देने का निर्णय लिया है। सरकार ने राज्य में बारिश की भारी कमी और जलाशयों में अपर्याप्त जलभंडार को अपना आधार बनाया है।
कावेरी जल विवाद का पृष्ठभूमि क्या है?
कावेरी जल विवाद कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच दशकों पुराना अंतर-राज्यीय जल-बंटवारा विवाद है, जिसे सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर गठित CWRC और CWMA नियमित करते हैं। हर वर्ष मानसून की स्थिति के अनुसार पानी छोड़ने के आदेश जारी किए जाते हैं, जो अक्सर राजनीतिक विवाद का केंद्र बनते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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