कावेरी विवाद: भाजपा नेता आर. अशोक का आरोप — ₹300 करोड़ फीस के बावजूद कर्नाटक सरकार विफल, तमिलनाडु को 3,500 क्यूसेक पानी
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने 29 जुलाई को दावणगेरे में पत्रकारों से बातचीत में कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि वकीलों को ₹300 करोड़ की फीस चुकाने के बावजूद राज्य सरकार कावेरी जल-बंटवारा विवाद में कर्नाटक के हितों की रक्षा करने में नाकाम रही, जिसके परिणामस्वरूप कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) ने तमिलनाडु को 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का आदेश दिया।
मुख्य आरोप और घटनाक्रम
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता अशोक ने कहा कि CWRC का यह आदेश कर्नाटक सरकार की लापरवाही और कानूनी मामले की अपर्याप्त तैयारी का सीधा नतीजा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'कानूनी विशेषज्ञों के साथ उचित सलाह-मशविरा नहीं किया गया। ₹300 करोड़ की फीस देने के बावजूद सरकार राज्य के हितों की रक्षा करने में विफल रही है।'
अशोक ने यह भी माँग की कि यदि आवश्यक हो तो सरकार को अपनी कानूनी टीम बदलनी चाहिए और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) में अपील को और अधिक प्रभावी तरीके से लड़ना चाहिए।
पेयजल सुरक्षा पर चिंता
अशोक ने बेंगलुरु और कावेरी नदी पर निर्भर अन्य क्षेत्रों की पेयजल सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जताई। उनके अनुसार, इस आदेश से लाखों लोगों के लिए पीने के पानी का भविष्य खतरे में पड़ सकता है। उन्होंने कहा, 'सरकार को तुरंत कानूनी लड़ाई को मजबूत करना चाहिए और कर्नाटक के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए।'
किसानों और खर्च की प्राथमिकताओं पर सवाल
भाजपा नेता ने कांग्रेस सरकार पर जन-कल्याण की अनदेखी का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब सूखे और फसल के नुकसान से जूझ रहे किसानों को राहत देने की बात आती है, तो सरकार कहती है कि उसके पास पैसे नहीं हैं — जबकि राजनीतिक गतिविधियों और प्रचार-प्रसार पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। उन्होंने इसे 'बेहद निंदनीय' करार दिया।
कर्नाटक सरकार का पक्ष
कर्नाटक सरकार ने राज्य में बारिश की भारी कमी और जलाशयों में अपर्याप्त जलभंडार का हवाला देते हुए CWRC के आदेश को CWMA के समक्ष चुनौती देने का निर्णय लिया है। सरकार का तर्क है कि मौजूदा जल-संकट की स्थिति में इतनी बड़ी मात्रा में पानी छोड़ना राज्य के हितों के विरुद्ध है।
आगे क्या होगा
यह विवाद ऐसे समय में और गहरा हो गया है जब कर्नाटक में मानसून अपेक्षा से कमज़ोर रहा है और कावेरी बेसिन के जलाशयों में जलस्तर चिंताजनक रूप से नीचे है। CWMA में राज्य सरकार की अपील पर आने वाले हफ्तों में सुनवाई अपेक्षित है, जो इस अंतर-राज्यीय जल विवाद की दिशा तय करेगी।