कावेरी जल विवाद: BJP का आरोप — कर्नाटक सरकार रात को KRS बांध खोलकर तमिलनाडु को दे रही पानी
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने 15 अगस्त 2026 को राज्य की कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए कि वह सार्वजनिक मंचों पर तमिलनाडु को कावेरी का पानी न देने की घोषणा करते हुए भी कथित तौर पर रात के अंधेरे में कृष्णराज सागर (KRS) बांध के गेट खोलकर पड़ोसी राज्य के लिए जल प्रवाहित कर रही है। अशोक के अनुसार, यह 'दोहरा रवैया' मंड्या, मैसूरु और चामराजनगर के किसानों के साथ सीधा विश्वासघात है।
मुख्य आरोप: रात को खुलते हैं KRS के गेट
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता आर. अशोक ने आरोप लगाया कि जब कर्नाटक के किसान पानी की कमी से जूझ रहे हैं और आम नागरिक पेयजल के लिए परेशान हैं, तब सरकार रात के समय KRS बांध के गेट खोलकर तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ रही है। उन्होंने कहा, 'एक तरफ सरकार कहती है कि वह तमिलनाडु को पानी नहीं छोड़ेगी, वहीं दूसरी तरफ गुपचुप तरीके से KRS बांध के गेट खोलकर पानी छोड़ा जा रहा है।'
अशोक ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और जल संसाधन मंत्री एन. चालुवरायस्वामी को सीधे निशाने पर लेते हुए कहा कि सरकार कावेरी मुद्दे पर अपने राजनीतिक सहयोगियों को खुश करने के लिए कन्नड़ लोगों के हितों की बलि दे रही है।
किसानों की स्थिति और जल संकट
मंड्या, मैसूरु और चामराजनगर जिलों के किसान कावेरी जल पर निर्भर हैं। अशोक ने दावा किया कि इन क्षेत्रों में फसलें सूख रही हैं और KRS जलाशय में कन्नड़ लोगों की ज़रूरत के लिए पर्याप्त पानी नहीं बचा है। उन्होंने सवाल किया, 'जब KRS जलाशय में कन्नड़ लोगों के लिए पर्याप्त पानी नहीं है, तो सरकार तमिलनाडु को पानी छोड़ने की इतनी जल्दी में क्यों है?'
यह ऐसे समय में आया है जब कावेरी जल बंटवारे का मुद्दा दशकों से कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच विवाद का केंद्र रहा है और सर्वोच्च न्यायालय तथा कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) इस पर निगरानी रखते हैं।
BJP की चेतावनी और आंदोलन का ऐलान
अशोक ने कांग्रेस सरकार से KRS बांध से तमिलनाडु के लिए जल प्रवाह तत्काल रोकने की माँग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने यह नहीं रोका, तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) पूरे कर्नाटक में सड़कों पर उतरेगी। उनके शब्दों में, 'कन्नड़ लोगों के धैर्य की परीक्षा न लें। BJP किसानों और जनता के हितों की कीमत पर की जा रही इस कर्नाटक विरोधी राजनीति की कड़ी निंदा करती है।'
शराब राजस्व नीति पर भी निशाना
अशोक ने इसी बयान में कर्नाटक सरकार की आबकारी नीति पर भी हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मुफ्त गारंटी योजनाओं की भरपाई के लिए आबकारी अधिकारियों और शराब दुकानदारों पर ₹45,000 करोड़ का वार्षिक राजस्व लक्ष्य थोप रही है, जिसके तहत हर महीने औसतन ₹3,800 करोड़ की शराब बिक्री का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
उन्होंने दावा किया कि लक्ष्य पूरा न होने पर अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जा रहे हैं। अशोक ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और आबकारी मंत्री शिवलिंगे गौड़ा से पूछा कि क्या राज्य में 12,003 से अधिक शराब की दुकानों का विस्तार करके गरीब परिवारों को जानबूझकर शराब की लत की ओर धकेला जा रहा है। उन्होंने कहा, 'गरीब परिवारों को शराब की लत की ओर न धकेलें और महिलाओं का श्राप न लें।'
आगे क्या
कर्नाटक सरकार की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कावेरी जल विवाद पर CWMA की निगरानी जारी है और BJP के प्रस्तावित आंदोलन की दिशा आने वाले दिनों में स्पष्ट होगी। गौरतलब है कि यह मुद्दा कर्नाटक की राजनीति में हमेशा संवेदनशील रहा है और चुनावी समीकरणों को प्रभावित करता है।