कावेरी जल विवाद: भाजपा ने केआरएस घेराव की चेतावनी दी, शिवकुमार पर किसानों से विश्वासघात का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने शुक्रवार, 10 जुलाई को कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए कि कावेरी बेसिन में बिगड़ती जल स्थिति के बावजूद तमिलनाडु को कावेरी नदी का पानी छोड़ना जारी रखकर वह कर्नाटक के किसानों के साथ 'विश्वासघात' कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने तत्काल सिंचाई सलाहकार समिति (आईसीसी) की बैठक नहीं बुलाई और जल प्रवाह नहीं रोका, तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) हजारों किसानों के साथ कृष्णराज सागर (केआरएस) जलाशय का घेराव करेगी।
मुख्य आरोप और माँगें
अशोक ने एक कड़े बयान में आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार राजनीतिक कारणों से पड़ोसी राज्य को पानी बहने दे रहे हैं और तथाकथित 'गुप्त समझौते' के तहत कर्नाटक के हितों की बलि दी जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में कम वर्षा के कारण झीलें, नहरें और खेत सूख रहे हैं, ऐसे में तमिलनाडु को पानी देना अस्वीकार्य है।
अशोक ने सरकार से माँग की कि जलाशयों में वास्तविक जल उपलब्धता का आकलन करने के लिए आईसीसी की बैठक तत्काल बुलाई जाए और गाँवों की झीलों, टैंकों तथा नहरों में पानी छोड़ा जाए ताकि खड़ी फसलों की सिंचाई सुनिश्चित हो सके। उन्होंने मुख्यमंत्री शिवकुमार से मांड्या का दौरा करने और विरोध कर रहे किसानों की पीड़ा को प्रत्यक्ष देखने का आग्रह भी किया।
केआरएस घेराव की चेतावनी
अशोक ने इसे 'अंतिम चेतावनी' बताते हुए कहा कि यदि सरकार आईसीसी की बैठक बुलाने और किसानों के खेतों के लिए पानी सुनिश्चित करने में विफल रही, तो भाजपा कावेरी बेसिन से हजारों किसानों को एकजुट कर केआरएस जलाशय का घेराव करेगी। गौरतलब है कि कावेरी जल बँटवारे को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच दशकों पुराना विवाद रहा है और इस मुद्दे पर राज्य में राजनीतिक तापमान हमेशा ऊँचा रहता है।
इंदिरा फूड किट और अन्न भाग्य पर आरोप
कावेरी विवाद के साथ-साथ अशोक ने कर्नाटक सरकार पर गरीब परिवारों से किए गए वादों से मुकरने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सत्ता में आने से पहले कांग्रेस ने 'अन्न भाग्य' योजना के तहत 10 किलो चावल देने का वादा किया था, लेकिन सरकार बनने के बाद अतिरिक्त 5 किलो चावल देने में नाकाम रही और केंद्र से प्राप्त 5 किलो चावल ही बाँटती रही, शेष के बदले नकद देने की घोषणा की।
अशोक के अनुसार, जब यह वादा पूरा नहीं हुआ तो सरकार ने 'इंदिरा फूड किट' की घोषणा की — जिसमें अरहर दाल, खाना पकाने का तेल और चीनी शामिल थी — और इसका व्यापक प्रचार किया। उनका दावा है कि यह प्रस्ताव अब पूरी तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि आठ महीने बाद भी टेंडर प्रक्रिया अंतिम नहीं हो सकी, 'कमीशन' से जुड़े विवादों के कारण कानूनी मामले और प्रशासनिक देरी हुई, और सरकार बीपीएल परिवारों को पोषण किट देने के लिए प्रतिमाह लगभग ₹500 करोड़ खर्च करने में असमर्थ है।
सरकार की प्रतिक्रिया और आगे का रास्ता
इन आरोपों पर कर्नाटक सरकार की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। आलोचकों का कहना है कि कावेरी जल विवाद हर वर्ष मानसून के दौरान राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो जाता है और इस बार सूखे जैसी स्थिति ने किसानों की चिंता को और गहरा कर दिया है। यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में विपक्ष सरकार की 'गारंटी योजनाओं' के क्रियान्वयन पर लगातार सवाल उठा रहा है। भाजपा ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि सरकार ने शीघ्र कदम नहीं उठाए, तो राज्यव्यापी आंदोलन अवश्यंभावी है।