10 जुलाई 2026
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कावेरी जल विवाद: भाजपा ने केआरएस घेराव की चेतावनी दी, शिवकुमार पर किसानों से विश्वासघात का आरोप

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कावेरी जल विवाद: भाजपा ने केआरएस घेराव की चेतावनी दी, शिवकुमार पर किसानों से विश्वासघात का आरोप

सारांश

कर्नाटक में कावेरी जल विवाद एक बार फिर उबाल पर है। भाजपा नेता आर. अशोक ने CM शिवकुमार पर तमिलनाडु को पानी देकर किसानों से विश्वासघात का आरोप लगाया और केआरएस घेराव की चेतावनी दी। साथ ही इंदिरा फूड किट योजना को ठंडे बस्ते में डालने पर भी सरकार को घेरा।

मुख्य बातें

अशोक ने 10 जुलाई को कांग्रेस सरकार पर तमिलनाडु को कावेरी जल छोड़ने का आरोप लगाया।
भाजपा ने केआरएस जलाशय घेराव की चेतावनी दी यदि आईसीसी की बैठक तत्काल नहीं बुलाई गई।
शिवकुमार पर 'गुप्त समझौते' के तहत पड़ोसी राज्य को पानी देने का आरोप लगाया।
इंदिरा फूड किट योजना को आठ महीने बाद भी लागू न कर पाने पर सरकार को घेरा; टेंडर प्रक्रिया अधूरी।
'अन्न भाग्य' योजना के तहत 10 किलो चावल के वादे पर भी सरकार विफल रही, आरोप लगाया।
भाजपा ने चेतावनी दी कि सुधार न हुआ तो राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।

कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने शुक्रवार, 10 जुलाई को कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए कि कावेरी बेसिन में बिगड़ती जल स्थिति के बावजूद तमिलनाडु को कावेरी नदी का पानी छोड़ना जारी रखकर वह कर्नाटक के किसानों के साथ 'विश्वासघात' कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने तत्काल सिंचाई सलाहकार समिति (आईसीसी) की बैठक नहीं बुलाई और जल प्रवाह नहीं रोका, तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) हजारों किसानों के साथ कृष्णराज सागर (केआरएस) जलाशय का घेराव करेगी।

मुख्य आरोप और माँगें

अशोक ने एक कड़े बयान में आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार राजनीतिक कारणों से पड़ोसी राज्य को पानी बहने दे रहे हैं और तथाकथित 'गुप्त समझौते' के तहत कर्नाटक के हितों की बलि दी जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में कम वर्षा के कारण झीलें, नहरें और खेत सूख रहे हैं, ऐसे में तमिलनाडु को पानी देना अस्वीकार्य है।

अशोक ने सरकार से माँग की कि जलाशयों में वास्तविक जल उपलब्धता का आकलन करने के लिए आईसीसी की बैठक तत्काल बुलाई जाए और गाँवों की झीलों, टैंकों तथा नहरों में पानी छोड़ा जाए ताकि खड़ी फसलों की सिंचाई सुनिश्चित हो सके। उन्होंने मुख्यमंत्री शिवकुमार से मांड्या का दौरा करने और विरोध कर रहे किसानों की पीड़ा को प्रत्यक्ष देखने का आग्रह भी किया।

केआरएस घेराव की चेतावनी

अशोक ने इसे 'अंतिम चेतावनी' बताते हुए कहा कि यदि सरकार आईसीसी की बैठक बुलाने और किसानों के खेतों के लिए पानी सुनिश्चित करने में विफल रही, तो भाजपा कावेरी बेसिन से हजारों किसानों को एकजुट कर केआरएस जलाशय का घेराव करेगी। गौरतलब है कि कावेरी जल बँटवारे को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच दशकों पुराना विवाद रहा है और इस मुद्दे पर राज्य में राजनीतिक तापमान हमेशा ऊँचा रहता है।

इंदिरा फूड किट और अन्न भाग्य पर आरोप

कावेरी विवाद के साथ-साथ अशोक ने कर्नाटक सरकार पर गरीब परिवारों से किए गए वादों से मुकरने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सत्ता में आने से पहले कांग्रेस ने 'अन्न भाग्य' योजना के तहत 10 किलो चावल देने का वादा किया था, लेकिन सरकार बनने के बाद अतिरिक्त 5 किलो चावल देने में नाकाम रही और केंद्र से प्राप्त 5 किलो चावल ही बाँटती रही, शेष के बदले नकद देने की घोषणा की।

अशोक के अनुसार, जब यह वादा पूरा नहीं हुआ तो सरकार ने 'इंदिरा फूड किट' की घोषणा की — जिसमें अरहर दाल, खाना पकाने का तेल और चीनी शामिल थी — और इसका व्यापक प्रचार किया। उनका दावा है कि यह प्रस्ताव अब पूरी तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि आठ महीने बाद भी टेंडर प्रक्रिया अंतिम नहीं हो सकी, 'कमीशन' से जुड़े विवादों के कारण कानूनी मामले और प्रशासनिक देरी हुई, और सरकार बीपीएल परिवारों को पोषण किट देने के लिए प्रतिमाह लगभग ₹500 करोड़ खर्च करने में असमर्थ है।

सरकार की प्रतिक्रिया और आगे का रास्ता

इन आरोपों पर कर्नाटक सरकार की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। आलोचकों का कहना है कि कावेरी जल विवाद हर वर्ष मानसून के दौरान राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो जाता है और इस बार सूखे जैसी स्थिति ने किसानों की चिंता को और गहरा कर दिया है। यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में विपक्ष सरकार की 'गारंटी योजनाओं' के क्रियान्वयन पर लगातार सवाल उठा रहा है। भाजपा ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि सरकार ने शीघ्र कदम नहीं उठाए, तो राज्यव्यापी आंदोलन अवश्यंभावी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या सरकार के पास जल प्रबंधन का कोई ठोस वैकल्पिक रोडमैप है। इंदिरा फूड किट का मुद्दा अलग है लेकिन उतना ही महत्वपूर्ण — आठ महीने में टेंडर न निकलना प्रशासनिक शिथिलता का संकेत है, चाहे कारण कोई भी हो। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि कावेरी न्यायाधिकरण के आदेशों और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत कर्नाटक की कानूनी बाध्यताएँ भी हैं — केवल राजनीतिक इच्छाशक्ति से पानी रोकना संभव नहीं।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कावेरी जल विवाद में भाजपा की मुख्य माँग क्या है?
भाजपा ने माँग की है कि कर्नाटक सरकार तत्काल सिंचाई सलाहकार समिति (आईसीसी) की बैठक बुलाए और तमिलनाडु को कावेरी का पानी छोड़ना बंद करे। यदि यह नहीं हुआ तो भाजपा हजारों किसानों के साथ केआरएस जलाशय का घेराव करने की चेतावनी दी है।
केआरएस जलाशय घेराव की चेतावनी क्यों दी गई?
विपक्ष के नेता आर. अशोक के अनुसार, कर्नाटक में कम वर्षा के कारण झीलें और नहरें सूख रही हैं, जबकि सरकार तमिलनाडु को कावेरी का पानी देती रही है। किसानों की खड़ी फसलें सूख रही हैं और सरकार की कथित निष्क्रियता के विरोध में यह कदम उठाने की चेतावनी दी गई है।
इंदिरा फूड किट योजना क्या है और यह विवाद में क्यों है?
इंदिरा फूड किट एक प्रस्तावित योजना थी जिसमें बीपीएल परिवारों को अरहर दाल, खाना पकाने का तेल और चीनी देने का वादा था। भाजपा का आरोप है कि आठ महीने बाद भी टेंडर प्रक्रिया अंतिम नहीं हो सकी और योजना ठंडे बस्ते में चली गई, जिससे गरीब परिवार वंचित हैं।
अन्न भाग्य योजना पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
भाजपा नेता अशोक का आरोप है कि कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले 'अन्न भाग्य' योजना के तहत 10 किलो चावल देने का वादा किया था, लेकिन सरकार बनने के बाद केवल केंद्र से मिले 5 किलो चावल ही बाँटे गए और शेष के बदले नकद देने की घोषणा की गई।
कावेरी जल विवाद में कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच विवाद कितना पुराना है?
कावेरी नदी के जल बँटवारे को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच दशकों पुराना विवाद है। कावेरी जल न्यायाधिकरण और सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के तहत जल वितरण का एक ढाँचा तय है, लेकिन हर वर्ष मानसून के दौरान यह विवाद राजनीतिक रूप से तीव्र हो जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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