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केआरएस बांध से पानी छोड़ो या किसान सरकार गिरा देंगे: कर्नाटक भाजपा नेता आर. अशोक की चेतावनी

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केआरएस बांध से पानी छोड़ो या किसान सरकार गिरा देंगे: कर्नाटक भाजपा नेता आर. अशोक की चेतावनी

सारांश

मंड्या में किसान KRS बांध से पानी की माँग को लेकर बेंगलुरु-मैसूर हाईवे पर धरने पर बैठे हैं, 100 से अधिक हिरासत में लिए गए। कर्नाटक भाजपा नेता आर. अशोक ने मुख्यमंत्री शिवकुमार को चेतावनी दी — तुरंत राहत दो, वरना जनता का फैसला सरकार को हिला देगा।

मुख्य बातें

कर्नाटक भाजपा नेता आर.
अशोक ने 4 जुलाई 2026 को राज्य सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाया।
मंड्या में किसान KRS बांध से सिंचाई नहरों में पानी छोड़ने की माँग को लेकर बेंगलुरु-मैसूर हाईवे पर धरने पर हैं।
कावेरी नीरावरी निगम कार्यालय घेराव के दौरान 100 से अधिक किसानों को पुलिस ने हिरासत में लिया।
अशोक ने माँग की कि नुकसान होने पर प्रत्येक प्रभावित किसान को ₹50,000 प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाए।
दावणगेरे के जगलूर सरकारी स्कूल में 600 से अधिक छात्रों के लिए शौचालय बंद — भाजपा ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।
भाजपा ने मुख्यमंत्री डी.के.
शिवकुमार से पूर्णकालिक शिक्षा मंत्री नियुक्त करने की भी माँग की।

कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता आर. अशोक ने 4 जुलाई 2026 को राज्य की कांग्रेस सरकार पर किसानों की घोर अनदेखी का आरोप लगाते हुए कड़ी चेतावनी दी कि यदि किसानों को बार-बार सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर किया गया, तो सरकार स्वयं अपने बोझ तले लड़खड़ा जाएगी। मंड्या जिले में चल रहे किसान आंदोलन की पृष्ठभूमि में यह बयान आया है, जहाँ किसान कृष्णराज सागर (KRS) बांध से सिंचाई नहरों में पानी छोड़ने की माँग को लेकर बेंगलुरु-मैसूर हाईवे पर धरने पर बैठे हैं।

मंड्या में किसान आंदोलन की पृष्ठभूमि

आर. अशोक ने बताया कि KRS कमांड क्षेत्र में गन्ने सहित हजारों एकड़ खड़ी फसलें सिंचाई जल की कमी के कारण सूखने की कगार पर हैं। किसान अपनी फसलें बचाने के लिए KRS बांध से नहरों में पानी छोड़ने की माँग कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

उन्होंने कहा कि हालात इतने विकट हो चुके हैं कि किसान बेंगलुरु-मैसूर हाईवे पर धरना देते हुए वहीं खाना पकाकर खाने को मजबूर हैं — केवल इसलिए कि उन्हें अपने हक का पानी मिल सके। भाजपा नेता ने सवाल उठाया कि क्या कर्नाटक ने इतनी असंवेदनशील सरकार पहले कभी देखी है?

100 से अधिक किसानों की हिरासत पर विरोध

आर. अशोक ने आरोप लगाया कि जब किसान कावेरी नीरावरी निगम के कार्यालय का घेराव करने पहुँचे, तब पुलिस ने 100 से अधिक किसानों को हिरासत में ले लिया। उन्होंने इसे सरकार की किसान-विरोधी सोच का प्रत्यक्ष प्रमाण बताया और पूछा, "क्या पानी माँगने वाले किसानों को गिरफ्तार करना और डराना ही सरकार का जवाब है?"

उन्होंने चेतावनी दी कि किसानों के आँसुओं और आक्रोश को नजरअंदाज करने वाली कोई भी सरकार जनता के फैसले से बच नहीं सकती। गौरतलब है कि कर्नाटक में कृषि संकट और सिंचाई जल को लेकर विवाद कोई नई बात नहीं है — कावेरी जल बँटवारे का मुद्दा दशकों से राजनीतिक रूप से संवेदनशील रहा है।

मुआवजे और राहत की माँग

आर. अशोक ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से माँग की कि सरकार तत्काल KRS बांध से सिंचाई नहरों में पानी छोड़े, ताकि खड़ी फसलें बचाई जा सकें। साथ ही उन्होंने यह भी माँग की कि यदि इस मानसून सीजन में फसलों का नुकसान होता है, तो प्रभावित प्रत्येक किसान को ₹50,000 प्रति एकड़ का मुआवजा दिया जाए।

सरकारी स्कूलों की बदहाली पर भी निशाना

भाजपा नेता ने किसान मुद्दे के साथ-साथ राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि दावणगेरे जिले के जगलूर सरकारी स्कूल की स्थिति पूरे कर्नाटक के सरकारी स्कूलों की बदहाली को उजागर करती है।

उनके अनुसार, इस स्कूल में 600 से अधिक छात्र पढ़ते हैं — जिनमें 300 से ज्यादा छात्राएँ हैं — लेकिन पानी की कमी और खराब रखरखाव के कारण शौचालय बंद पड़े हैं। मजबूरन छात्राओं को स्कूल परिसर के बाहर खुले स्थान का उपयोग करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि शौचालयों के निर्माण पर लाखों रुपये खर्च किए गए, लेकिन वे उपयोग के लायक नहीं हैं, और पूछा कि यह पैसा आखिर कहाँ गया।

आर. अशोक ने मुख्यमंत्री शिवकुमार से आग्रह किया कि वे स्वयं जगलूर स्कूल का दौरा करें और जिला प्रभारी मंत्री को बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराने का निर्देश दें। उन्होंने सरकार से बिना देरी के पूर्णकालिक शिक्षा मंत्री नियुक्त करने की भी माँग की।

आगे क्या होगा

मंड्या में किसान आंदोलन जारी है और भाजपा का दबाव बढ़ता जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में अगले स्थानीय निकाय चुनावों की तैयारियाँ चल रही हैं और ग्रामीण मतदाताओं की नाराजगी सत्तारूढ़ कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से महँगी साबित हो सकती है। यदि सरकार शीघ्र राहत नहीं देती, तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि कानून-व्यवस्था की सफलता को। कावेरी जल बँटवारे का मुद्दा दशकों पुराना है, लेकिन स्थानीय सिंचाई प्रबंधन की चूक राज्य सरकार की सीधी जिम्मेदारी है। भाजपा का यह हमला रणनीतिक रूप से सटीक है, लेकिन पाठकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि भाजपा के अपने शासनकाल में भी कर्नाटक के किसान सिंचाई संकट से अछूते नहीं रहे।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मंड्या में किसान किस माँग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं?
मंड्या के किसान कृष्णराज सागर (KRS) बांध से सिंचाई नहरों में पानी छोड़ने की माँग कर रहे हैं, ताकि उनकी खड़ी फसलें — विशेषकर गन्ना — सूखने से बचाई जा सकें। वे बेंगलुरु-मैसूर हाईवे पर धरने पर बैठे हैं।
आर. अशोक ने सरकार से क्या माँगें रखी हैं?
भाजपा नेता आर. अशोक ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से तत्काल KRS बांध से सिंचाई नहरों में पानी छोड़ने और फसल नुकसान होने पर प्रत्येक प्रभावित किसान को ₹50,000 प्रति एकड़ मुआवजा देने की माँग की है।
कावेरी नीरावरी निगम घेराव के दौरान क्या हुआ?
आर. अशोक के अनुसार, जब किसान कावेरी नीरावरी निगम के कार्यालय का घेराव करने पहुँचे, तब पुलिस ने 100 से अधिक किसानों को हिरासत में ले लिया। भाजपा ने इसे किसान-विरोधी कार्रवाई बताते हुए कड़ी निंदा की है।
जगलूर सरकारी स्कूल का मामला क्या है?
दावणगेरे जिले के जगलूर सरकारी स्कूल में 600 से अधिक छात्र पढ़ते हैं, जिनमें 300 से ज्यादा छात्राएँ हैं, लेकिन पानी की कमी और खराब रखरखाव के कारण शौचालय बंद पड़े हैं। आर. अशोक ने आरोप लगाया कि शौचालय निर्माण पर लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद वे उपयोग के लायक नहीं हैं।
कर्नाटक में किसान संकट का राजनीतिक असर क्या हो सकता है?
आलोचकों का कहना है कि ग्रामीण किसानों की नाराजगी कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से महँगी साबित हो सकती है, खासकर आगामी स्थानीय निकाय चुनावों के मद्देनजर। भाजपा इस मुद्दे को व्यापक जन आंदोलन में बदलने की कोशिश कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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