31 जुलाई 2026
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कावेरी जल विवाद: केआरएस बांध पर BJP-किसानों का प्रदर्शन, 1,500 पुलिसकर्मी तैनात

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कावेरी जल विवाद: केआरएस बांध पर BJP-किसानों का प्रदर्शन, 1,500 पुलिसकर्मी तैनात

सारांश

कावेरी जल विवाद एक बार फिर उबाल पर है — BJP और किसान संगठनों ने केआरएस बांध पर डेरा डाला, 1,500 पुलिसकर्मी तैनात हुए। येदियुरप्पा और विजयेंद्र ने मुख्यमंत्री शिवकुमार से सर्वोच्च न्यायालय जाने की सीधी माँग की है।

मुख्य बातें

BJP और किसान संगठनों ने 31 जुलाई को केआरएस बांध, श्रीरंगपट्टनम पर विरोध प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन का नेतृत्व बी.वाई.
अशोक और चलावाडी नारायणस्वामी ने किया।
राज्य सरकार ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 1,500 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए।
विपक्ष की माँग — मुख्यमंत्री डी.के.
शिवकुमार तमिलनाडु को जल छोड़ने के आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दें।
कर्नाटक पीने के पानी के गंभीर संकट से जूझ रहा है; मांड्या, मैसूरु के किसान सबसे अधिक प्रभावित।

कर्नाटक में कावेरी नदी जल विवाद एक बार फिर तीखा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कई किसान संगठनों के साथ मिलकर 31 जुलाई, शुक्रवार को श्रीरंगपट्टनम स्थित कृष्ण राज सागर (केआरएस) बांध पर ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी ने कांग्रेस सरकार की कड़ी निंदा करते हुए माँग की कि राज्य सरकार तमिलनाडु को कावेरी जल छोड़ने के हालिया आदेश को तत्काल सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दे।

मुख्य घटनाक्रम

इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व BJP के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक बी.वाई. विजयेंद्र, केंद्रीय संसदीय बोर्ड के सदस्य एवं पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा, विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक और विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलावाडी नारायणस्वामी ने किया। पार्टी के अनेक नेता और विभिन्न किसान संगठनों के सदस्य भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए।

यह ऐसे समय में हुआ है जब कर्नाटक पीने के पानी के गंभीर संकट से जूझ रहा है और कावेरी बेसिन क्षेत्र के किसान पहले से ही पर्याप्त सिंचाई जल न मिलने की शिकायत कर रहे हैं।

सरकार की प्रतिक्रिया और पुलिस बंदोबस्त

प्रदर्शनकारियों द्वारा जलाशय को घेरने की आशंका को देखते हुए राज्य सरकार ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए केआरएस बांध और उसके आसपास तथा मांड्या जिले की अहम जगहों पर 1,500 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए। मांड्या की पुलिस अधीक्षक शोभा रानी ने मीडिया को बताया कि सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं।

उन्होंने कहा, 'हम किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार हैं और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठा रहे हैं। मांड्या, श्रीरंगपट्टनम और मद्दूर शहरों में सुरक्षा के खास इंतजाम किए गए हैं।'

विपक्षी नेताओं के बयान

पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से सीधी अपील करते हुए कहा, 'कावेरी विवाद को लेकर मौजूदा मुख्यमंत्री को सर्वोच्च न्यायालय में अपील करनी चाहिए और इस इलाके के लोगों को न्याय दिलाना चाहिए। पहले ही बहुत अन्याय हो चुका है। ऐसे समय में जब राज्य पीने के पानी के गंभीर संकट से जूझ रहा है, कर्नाटक को पानी छोड़ने का आदेश देना अक्षम्य है।'

बी.वाई. विजयेंद्र ने कहा, 'भाजपा और किसान संगठन मिलकर केआरएस बांध पर यह विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। मैं मुख्यमंत्री से अपील करता हूँ कि वे हालिया आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दें। सरकार को कावेरी बेसिन इलाकों में रहने वाले लोगों के हितों की रक्षा करनी चाहिए।' उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में पीने के पानी का संकट है और किसानों के लिए भी पर्याप्त पानी नहीं है।

आम जनता और किसानों पर असर

गौरतलब है कि कावेरी जल बँटवारे का यह विवाद दशकों पुराना है और कर्नाटक व तमिलनाडु के बीच बार-बार तनाव का कारण बनता रहा है। मांड्या और मैसूरु जिलों के किसान, जो मुख्यतः केआरएस जलाशय पर निर्भर हैं, हर बार जल-आवंटन आदेश आने पर असुरक्षित महसूस करते हैं। इस बार सूखे जैसी स्थिति और जलाशय के निम्न जलस्तर ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है।

क्या होगा आगे

विपक्ष के दबाव और किसान संगठनों के आक्रामक रुख के बीच अब सबकी नजरें मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के अगले कदम पर टिकी हैं — क्या राज्य सरकार सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी या नहीं। कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के आदेश और न्यायालय की अगली सुनवाई इस विवाद की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार के पास सर्वोच्च न्यायालय में ठोस कानूनी आधार है। कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के आदेश को चुनौती देना आसान नहीं होता, और पिछले अनुभव बताते हैं कि न्यायालय अंतरराज्यीय जल बँटवारे में राज्यों की एकतरफा माँगों पर सतर्क रहता है। जनता की भावनाओं को भुनाने और ज़मीनी समाधान के बीच की खाई को पाटना ही इस विवाद की असली परीक्षा है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कावेरी जल विवाद में केआरएस बांध पर प्रदर्शन क्यों हुआ?
सर्वोच्च न्यायालय या कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के हालिया आदेश के तहत कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए कावेरी नदी से पानी छोड़ने का निर्देश दिया गया। BJP और किसान संगठनों ने इसे राज्य के पीने के पानी और कृषि संकट के बीच अन्यायपूर्ण बताते हुए 31 जुलाई को केआरएस बांध पर विरोध प्रदर्शन किया।
केआरएस बांध पर कितने पुलिसकर्मी तैनात किए गए और क्यों?
राज्य सरकार ने 1,500 से अधिक पुलिसकर्मी केआरएस बांध, मांड्या, श्रीरंगपट्टनम और मद्दूर में तैनात किए। यह कदम प्रदर्शनकारियों द्वारा जलाशय को घेरने की आशंका के मद्देनज़र कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया।
BJP ने मुख्यमंत्री शिवकुमार से क्या माँग की है?
BJP नेताओं बी.एस. येदियुरप्पा और बी.वाई. विजयेंद्र ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से माँग की है कि वे तमिलनाडु को कावेरी जल छोड़ने के हालिया आदेश को तत्काल सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दें और कावेरी बेसिन के किसानों व आम जनता के हितों की रक्षा करें।
कर्नाटक में कावेरी जल विवाद का किसानों पर क्या असर है?
मांड्या और मैसूरु जिलों के किसान मुख्यतः केआरएस जलाशय पर निर्भर हैं। पानी छोड़ने के आदेश से सिंचाई जल में कमी आती है, जो धान और गन्ने की फसलों को सीधे प्रभावित करती है। इस बार जलाशय का स्तर पहले से कम होने के कारण किसानों की चिंता और गहरी है।
कावेरी जल विवाद का इतिहास क्या है?
कावेरी नदी जल बँटवारे का विवाद कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच दशकों पुराना है। सर्वोच्च न्यायालय ने 2018 में अंतिम फैसला सुनाया था और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण की स्थापना हुई थी, फिर भी हर वर्ष मानसून की स्थिति के अनुसार जल आवंटन को लेकर विवाद उठता रहता है।
राष्ट्र प्रेस
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