14 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

रोमियो जेम्स: 1982 एशियन गेम्स सिल्वर से ध्यानचंद पुरस्कार तक, भारतीय हॉकी के अनसुने नायक

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
रोमियो जेम्स: 1982 एशियन गेम्स सिल्वर से ध्यानचंद पुरस्कार तक, भारतीय हॉकी के अनसुने नायक

सारांश

गोलपोस्ट की रक्षा से लेकर कोचिंग के मैदान तक — रोमियो जेम्स का सफर भारतीय हॉकी की उस पीढ़ी की कहानी है जिसने 1982 एशियन गेम्स में सिल्वर जीता, 1984 ओलंपिक में मैदान मारा और 2015 में ध्यानचंद पुरस्कार से इतिहास में अपना नाम दर्ज कराया।

मुख्य बातें

रोमियो जेम्स का जन्म 15 सितंबर 1958 को हुआ; वह भारतीय हॉकी टीम के पूर्व गोलकीपर हैं।
1982 के नई दिल्ली एशियन गेम्स में भारत को रजत पदक दिलाने में उनकी अहम भूमिका रही।
1982 से 1985 के बीच सर्विसेज टीम की कप्तानी की और तीन राष्ट्रीय हॉकी चैंपियनशिप खिताब जीते।
1984 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया; भारत पाँचवें स्थान पर रहा।
बतौर कोच 1994 एशियन गेम्स रजत पदक विजेता टीम और हॉकी विश्व कप 2010 में योगदान दिया।
2015 में भारत सरकार ने उन्हें प्रतिष्ठित 'ध्यानचंद पुरस्कार' से सम्मानित किया।

भारतीय हॉकी टीम के पूर्व गोलकीपर रोमियो जेम्स का संपूर्ण कैरियर उपलब्धियों की एक लंबी श्रृंखला है — खिलाड़ी से लेकर कोच तक, उन्होंने भारतीय हॉकी को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभाई। 1982 के नई दिल्ली एशियन गेम्स में उनकी असाधारण गोलकीपिंग ने भारत को रजत पदक दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। 2015 में उन्हें भारत सरकार के प्रतिष्ठित 'ध्यानचंद पुरस्कार' से सम्मानित किया गया।

प्रारंभिक जीवन और घरेलू हॉकी में छाप

रोमियो जेम्स का जन्म 15 सितंबर 1958 को हुआ। बचपन से ही हॉकी के प्रति उनकी गहरी रुचि थी और उन्होंने कम उम्र में ही इस खेल को कैरियर के रूप में अपनाने का निर्णय लिया। घरेलू टूर्नामेंट्स में उनका प्रदर्शन लगातार उत्कृष्ट रहा।

उन्होंने 1982 से 1985 के बीच सर्विसेज टीम की कप्तानी की और इस दौरान तीन बार राष्ट्रीय हॉकी चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया। यह उपलब्धि उनकी नेतृत्व क्षमता और खेल के प्रति समर्पण को दर्शाती है।

अंतरराष्ट्रीय करियर: एशियन गेम्स और ओलंपिक

1982 के नई दिल्ली एशियन गेम्स में रोमियो जेम्स ने भारतीय टीम की ओर से गोलकीपर की जिम्मेदारी संभाली और शानदार प्रदर्शन करते हुए देश को रजत पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई। यह उनके अंतरराष्ट्रीय कैरियर का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर था।

इसके दो साल बाद, 1984 के लॉस एंजिल्स ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में भी रोमियो ने भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया। उनकी गोलकीपिंग ने टीम को संघर्षपूर्ण प्रतिस्पर्धा में टिकाए रखा। भारत ने इस टूर्नामेंट में पाँचवाँ स्थान प्राप्त किया।

कोचिंग करियर और राष्ट्रीय योगदान

खिलाड़ी के रूप में सेवानिवृत्ति के बाद रोमियो जेम्स का कोचिंग कैरियर भी उतना ही प्रभावशाली रहा। वह 1994 के एशियन गेम्स में रजत पदक जीतने वाली भारतीय टीम के कोचिंग स्टाफ का हिस्सा रहे।

हॉकी विश्व कप 2010 में भी उन्होंने बतौर कोच महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी देखरेख में कई युवा गोलकीपर उभरे जिन्होंने आगे चलकर विश्व स्तर पर भारत का नाम रोशन किया। यह ऐसे समय में आया जब भारतीय हॉकी अपनी पुरानी प्रतिष्ठा को फिर से स्थापित करने की कोशिश में जुटी थी।

ध्यानचंद पुरस्कार: सर्वोच्च सम्मान

भारत सरकार ने 2015 में रोमियो जेम्स को खिलाड़ी और कोच दोनों भूमिकाओं में उनके असाधारण योगदान के लिए खेलों के सर्वोच्च जीवनकाल पुरस्कार 'ध्यानचंद पुरस्कार' से नवाजा। गौरतलब है कि यह पुरस्कार उन खिलाड़ियों को दिया जाता है जिन्होंने सक्रिय कैरियर के बाद भी खेल के विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया हो।

रोमियो जेम्स की विरासत आज भी भारतीय हॉकी में जड़ी हुई है — उन्होंने जमीनी स्तर से अंतरराष्ट्रीय मंच तक अनगिनत प्रतिभाओं को तराशा और देश की हॉकी परंपरा को आगे बढ़ाने में अपनी अमिट छाप छोड़ी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि कोच बनकर अगली पीढ़ी को तैयार किया। यह विडंबना है कि जिन खिलाड़ियों ने 1970-80 के दशक में भारतीय हॉकी की नींव रखी, वे अक्सर क्रिकेट की चमक-दमक में अनदेखे रह जाते हैं। ध्यानचंद पुरस्कार एक संस्थागत स्वीकृति ज़रूर है, लेकिन इन योगदानकर्ताओं की व्यापक सार्वजनिक पहचान अभी भी उतनी नहीं जितनी होनी चाहिए।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रोमियो जेम्स कौन हैं?
रोमियो जेम्स भारतीय हॉकी टीम के पूर्व गोलकीपर हैं जिनका जन्म 15 सितंबर 1958 को हुआ। उन्होंने 1982 एशियन गेम्स और 1984 लॉस एंजिल्स ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया और बाद में सफल कोच के रूप में भी भारतीय हॉकी में योगदान दिया।
रोमियो जेम्स ने 1982 एशियन गेम्स में क्या भूमिका निभाई?
1982 के नई दिल्ली एशियन गेम्स में रोमियो जेम्स भारतीय टीम के गोलकीपर थे और उनकी उत्कृष्ट गोलकीपिंग ने भारत को रजत पदक दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाई। यह टूर्नामेंट उनके अंतरराष्ट्रीय कैरियर का सबसे चर्चित अध्याय माना जाता है।
रोमियो जेम्स को ध्यानचंद पुरस्कार कब और क्यों मिला?
भारत सरकार ने 2015 में रोमियो जेम्स को 'ध्यानचंद पुरस्कार' से सम्मानित किया। यह पुरस्कार उन्हें खिलाड़ी और कोच दोनों के रूप में हॉकी के विकास में उनके दीर्घकालीन और असाधारण योगदान के लिए दिया गया।
कोच के रूप में रोमियो जेम्स की प्रमुख उपलब्धियाँ क्या हैं?
बतौर कोच रोमियो जेम्स 1994 एशियन गेम्स में रजत पदक जीतने वाली भारतीय टीम के कोचिंग स्टाफ में शामिल थे और हॉकी विश्व कप 2010 में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई। उनकी देखरेख में कई युवा गोलकीपर उभरे जिन्होंने विश्व स्तर पर देश का नाम रोशन किया।
1984 लॉस एंजिल्स ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम का प्रदर्शन कैसा रहा?
1984 के लॉस एंजिल्स ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में रोमियो जेम्स भारतीय हॉकी टीम के गोलकीपर थे। टीम ने टूर्नामेंट का समापन पाँचवें स्थान पर किया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 9 महीने पहले
  4. 9 महीने पहले
  5. 9 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 12 महीने पहले
  8. 1 साल पहले