14 सितंबर 2026
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ABVP ने नंदन नीलेकणि की टास्क फोर्स को भेजे NEET सुधार के सुझाव, दो-चरणीय परीक्षा की माँग

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ABVP ने नंदन नीलेकणि की टास्क फोर्स को भेजे NEET सुधार के सुझाव, दो-चरणीय परीक्षा की माँग

सारांश

ABVP ने NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में आमूल बदलाव के लिए नंदन नीलेकणि की टास्क फोर्स को व्यापक सुझाव सौंपे हैं — दो-चरणीय परीक्षा, वर्ष में दो बार NEET, कंप्यूटर-आधारित प्रारूप और स्वतंत्र ऑडिट। यह कदम उस व्यापक बहस की अगली कड़ी है जो NEET पेपर लीक के बाद से देशभर में जारी है।

मुख्य बातें

ABVP ने 14 सितंबर 2026 को हाई पावर्ड टास्क फोर्स के अध्यक्ष नंदन नीलेकणि को NEET सहित प्रतियोगी परीक्षाओं में सुधार के सुझाव भेजे।
प्रमुख सुझाव: दो-चरणीय परीक्षा प्रणाली — पहले चरण में शॉर्टलिस्टिंग, दूसरे में अंतिम चयन।
NEET को वर्ष में दो बार आयोजित करने की व्यवहार्यता के अध्ययन और बेहतर स्कोर को मान्यता देने की माँग।
परीक्षा को कंप्यूटर आधारित बनाने, राष्ट्रीय प्रश्न बैंक और केंद्रीय परीक्षा डैशबोर्ड की स्थापना का सुझाव।
सुझाव पुणे, नागपुर, भोपाल, दिल्ली, चंडीगढ़ और दक्षिण बिहार में आयोजित राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस के आधार पर तैयार।
दीर्घकालिक लक्ष्य: कोचिंग पर निर्भरता कम करना और संस्थागत शिक्षण को मज़बूत करना।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने 14 सितंबर 2026 को हाई पावर्ड टास्क फोर्स के अध्यक्ष नंदन नीलेकणि को देश की प्रतियोगी परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए एक विस्तृत सुझाव पत्र सौंपा। NEET सहित अन्य महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विद्यार्थी हितैषी बनाने की माँग इस पत्र के केंद्र में है।

सुझाव कैसे तैयार हुए

ABVP ने यह सुझाव पत्र महज़ कागज़ी कवायद के रूप में नहीं, बल्कि व्यापक ज़मीनी परामर्श के बाद तैयार किया। संगठन ने पुणे, नागपुर, भोपाल, नई दिल्ली, चंडीगढ़ और दक्षिण बिहार में राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस आयोजित कर विद्यार्थियों और विषय विशेषज्ञों की राय ली। इन्हीं चर्चाओं के आधार पर तीन स्तरों — तत्काल, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक — पर सुझाव तैयार किए गए।

मुख्य सुझाव: दो-चरणीय परीक्षा प्रणाली

ABVP का सबसे प्रमुख सुझाव यह है कि महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं को दो चरणों में विभाजित किया जाए — पहले चरण में शॉर्टलिस्टिंग और दूसरे चरण में अंतिम चयन। इसके अतिरिक्त संगठन ने NEET को वर्ष में दो बार आयोजित करने की व्यवहार्यता के अध्ययन और बेहतर स्कोर को मान्यता देने की भी माँग की है।

एकल परीक्षा पर अत्यधिक निर्भरता कम करने, परीक्षा को कंप्यूटर आधारित बनाने, प्रश्नपत्र की सुरक्षा मज़बूत करने और परीक्षा केंद्रों के लिए समान राष्ट्रीय मानक तय करने पर भी ज़ोर दिया गया है। अभ्यर्थी सत्यापन, डेटा सुरक्षा, उत्तर कुंजी, सामान्यीकरण, टाई-ब्रेकिंग और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की भी माँग की गई है।

तकनीकी और प्रशासनिक सुधारों की रूपरेखा

तकनीकी या प्रशासनिक गड़बड़ी की स्थिति में स्पष्ट प्रोटोकॉल और आवश्यकता पड़ने पर पुनर्परीक्षा की व्यवस्था, स्वतंत्र सुरक्षा एवं प्रक्रिया ऑडिट, राष्ट्रीय प्रश्न बैंक, डिजिटल मूल्यांकन, एकीकृत परीक्षा प्रबंधन प्रणाली और केंद्रीय परीक्षा डैशबोर्ड की स्थापना पर भी सुझाव दिए गए हैं। ये सुझाव 2024 में सामने आई NEET पेपर लीक जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की दिशा में अहम कदम माने जा रहे हैं।

दीर्घकालिक दृष्टिकोण

दीर्घकालिक स्तर पर ABVP ने पाठ्यक्रम, शिक्षण, मूल्यांकन और प्रवेश परीक्षाओं के बीच बेहतर समन्वय की माँग की है। कोचिंग पर निर्भरता कम करने के लिए संस्थागत शिक्षण को मज़बूत बनाने, करियर काउंसलिंग और योग्यता-आधारित मूल्यांकन को बढ़ावा देने तथा बड़े सुधारों को पायलट, परीक्षण और स्वतंत्र ऑडिट के बाद चरणबद्ध रूप से लागू करने का सुझाव दिया गया है।

ABVP के राष्ट्रीय महामंत्री का बयान

ABVP के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा, 'परीक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें विद्यार्थी की मेहनत और क्षमता का सही मूल्यांकन हो और उसे परीक्षा से लेकर चयन तक अनावश्यक दबाव और अनिश्चितता का सामना न करना पड़े।' उन्होंने कहा कि यदि समिति संगठन को चर्चा के लिए आमंत्रित करती है, तो ABVP विस्तृत योजना और व्यावहारिक मॉडल के साथ अपनी बात रखेगा।

डॉ. सोलंकी ने यह भी कहा कि संगठन का उद्देश्य ऐसी परीक्षा प्रणाली बनाना है जिसमें 'हर विद्यार्थी को समान अवसर मिले, किसी तकनीकी या प्रशासनिक कमी की वजह से उसे परेशान न होना पड़े, और परीक्षा प्रणाली पर विद्यार्थियों एवं समाज का भरोसा मज़बूत हो।' यह सुझाव पत्र ऐसे समय आया है जब NEET और अन्य केंद्रीय परीक्षाओं को लेकर विश्वसनीयता का संकट गहरा हो रहा है, और टास्क फोर्स अपनी सिफारिशें अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि टास्क फोर्स इन्हें किस हद तक अपनाती है और सरकार क्रियान्वयन की राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाती है या नहीं। दो-चरणीय NEET और वर्ष में दो बार परीक्षा जैसे प्रस्ताव परीक्षार्थियों के तनाव को कम कर सकते हैं, पर इनके लिए NTA की क्षमता और बुनियादी ढाँचे का व्यापक विस्तार ज़रूरी होगा — जो अब तक एक कमज़ोर कड़ी रही है। कोचिंग-निर्भरता कम करने की माँग दशकों पुरानी है, लेकिन संस्थागत शिक्षण की गुणवत्ता बढ़ाए बिना यह लक्ष्य कागज़ पर ही रहेगा। मुख्यधारा की कवरेज इन सुझावों को सुर्खी बना रही है, पर यह नहीं पूछ रही कि पिछले दौर में इसी तरह के सुझावों का क्या हुआ।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ABVP ने NEET सुधार के लिए कौन-से प्रमुख सुझाव दिए हैं?
ABVP ने NEET सहित प्रतियोगी परीक्षाओं को दो चरणों में आयोजित करने, NEET को वर्ष में दो बार आयोजित करने की व्यवहार्यता का अध्ययन करने और परीक्षा को कंप्यूटर आधारित बनाने का सुझाव दिया है। इसके अलावा राष्ट्रीय प्रश्न बैंक, स्वतंत्र ऑडिट और केंद्रीय परीक्षा डैशबोर्ड की माँग भी की गई है।
हाई पावर्ड टास्क फोर्स क्या है और इसकी अध्यक्षता कौन कर रहा है?
हाई पावर्ड टास्क फोर्स देश की परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए गठित एक उच्च-स्तरीय समिति है, जिसकी अध्यक्षता इन्फोसिस के सह-संस्थापक और तकनीकविद् नंदन नीलेकणि कर रहे हैं। ABVP ने इसी समिति को अपना सुझाव पत्र भेजा है।
ABVP ने परीक्षा सुधार के सुझाव कैसे तैयार किए?
संगठन ने पुणे, नागपुर, भोपाल, नई दिल्ली, चंडीगढ़ और दक्षिण बिहार में राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस आयोजित कर विद्यार्थियों और विषय विशेषज्ञों के साथ विस्तृत चर्चा की। इन्हीं परामर्शों के आधार पर तत्काल, मध्यम अवधि और दीर्घकालिक सुधारों की रूपरेखा तैयार की गई।
NEET को वर्ष में दो बार आयोजित करने का क्या मतलब होगा?
ABVP के अनुसार, NEET वर्ष में दो बार आयोजित होने से विद्यार्थियों को एकल परीक्षा के दबाव से राहत मिलेगी और दोनों प्रयासों में से बेहतर स्कोर को मान्यता देने का प्रस्ताव है। हालाँकि संगठन ने इस पर व्यवहार्यता अध्ययन की माँग की है, कोई तत्काल समयसीमा नहीं दी गई।
ABVP ने कोचिंग पर निर्भरता कम करने के लिए क्या सुझाया है?
दीर्घकालिक सुधारों में ABVP ने संस्थागत शिक्षण को मज़बूत करने, करियर काउंसलिंग और योग्यता-आधारित मूल्यांकन को बढ़ावा देने का सुझाव दिया है। संगठन का मानना है कि पाठ्यक्रम, शिक्षण और प्रवेश परीक्षाओं के बीच बेहतर समन्वय से कोचिंग पर निर्भरता स्वाभाविक रूप से घटेगी।
राष्ट्र प्रेस
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