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यूपी में 504 जीएनएसएस रोवर से बदलेगी जमीन की पैमाइश, योगी सरकार ने राजस्व सर्वेक्षण को बनाया हाईटेक

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यूपी में 504 जीएनएसएस रोवर से बदलेगी जमीन की पैमाइश, योगी सरकार ने राजस्व सर्वेक्षण को बनाया हाईटेक

सारांश

जंजीर और फीते की जगह अब उपग्रह ले रहा है — उत्तर प्रदेश में 504 जीएनएसएस रोवर के जरिए जमीन की पैमाइश का तरीका बदल रहा है। 350 रोवर तहसीलों में तैनात हो चुके हैं और किसानों की फसल को नुकसान पहुँचाए बिना 1 से 5 सेंटीमीटर सटीक सर्वेक्षण संभव हो रहा है।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश में 504 जीएनएसएस रोवर के जरिए जमीन की पैमाइश को हाईटेक बनाया जा रहा है।
350 रोवर तहसीलों में तैनात होकर फील्ड सर्वेक्षण में सक्रिय; 143 रोवर 10 यूएलबी की नक्शा परियोजनाओं में उपयोगी।
हरदोई केटीएस को 2 रोवर ; लेखपाल प्रशिक्षण के लिए 9 रोवर से सभी प्रशिक्षण पूर्ण।
तकनीक 1 से 5 सेंटीमीटर तक सटीक, फसल को नुकसान पहुँचाए बिना कृषि भूमि की पैमाइश संभव।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1 जुलाई 2026 को सहारनपुर से धारा-24 महाअभियान की शुरुआत की; अभियान 15 अगस्त 2026 तक चला।
डिजिटल डेटा को जीआईएस और भूमि रिकॉर्ड प्रणालियों से जोड़ा जा सकता है, जिससे भूमि विवादों के निस्तारण में सुविधा होगी।

उत्तर प्रदेश में जमीन की पैमाइश और सीमांकन का तरीका अब बदल रहा है। योगी सरकार ने राजस्व विभाग के कामकाज को आधुनिक बनाने के लिए जीएनएसएस रोवर तकनीक को बड़े पैमाने पर तैनात किया है। प्रदेश में उपलब्ध 504 जीएनएसएस रोवर में से 350 रोवर तहसीलों तक पहुँचाए जा चुके हैं और उनसे फील्ड सर्वेक्षण का काम भी शुरू हो गया है। यह पहल पारंपरिक जंजीर-फीते की विधि को उपग्रह-आधारित डिजिटल सर्वेक्षण से बदलने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

तैनाती का पूरा ब्यौरा

राजस्व परिषद आयुक्त एवं सचिव कंचन वर्मा ने बताया कि 350 रोवर सीधे तहसीलों में भेजे गए हैं, जो फील्ड सर्वेक्षण में सक्रिय रूप से इस्तेमाल हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त 143 रोवर प्रदेश के 10 शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) की नक्शा परियोजनाओं में लगाए गए हैं। हरदोई स्थित चकबंदी प्रशिक्षण केंद्र (केटीएस) को भी 2 रोवर उपलब्ध कराए गए हैं। वहीं, लेखपाल प्रशिक्षण संस्थानों के लिए खरीदे गए 9 रोवर से संचालित समस्त प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरे हो चुके हैं।

जीएनएसएस रोवर तकनीक कैसे काम करती है

जीएनएसएस रोवर एक आधुनिक सर्वेक्षण उपकरण है जो विभिन्न उपग्रह प्रणालियों से मिलने वाले सिग्नल के आधार पर जमीन पर किसी बिंदु की सटीक स्थिति निर्धारित करता है। उत्तर प्रदेश के नेटवर्क से जुड़ने पर यह 1 से 5 सेंटीमीटर तक की सटीक जानकारी देने में सक्षम है। सर्वेक्षक खेत या भूमि की सीमा के प्रमुख बिंदुओं के डिजिटल निर्देशांक (कोऑर्डिनेट्स) दर्ज करते हैं और सॉफ्टवेयर की मदद से दूरी, क्षेत्रफल की गणना और डिजिटल नक्शा तैयार किया जाता है।

इस प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप न्यूनतम हो जाता है, जिससे गलतियों की संभावना घटती है। बड़े क्षेत्र का सर्वेक्षण कम समय और कम जनशक्ति में पूरा किया जा सकता है, जो पारंपरिक विधि की तुलना में उल्लेखनीय बचत है।

किसानों और राजस्व प्रशासन पर असर

कृषि भूमि की पैमाइश में पारंपरिक तरीके से खेत में बार-बार आवाजाही होती थी, जिससे खड़ी फसल को नुकसान पहुँचने की आशंका रहती थी। जीएनएसएस रोवर के इस्तेमाल से सीमा के जरूरी बिंदुओं के डिजिटल निर्देशांक लेकर सर्वेक्षण किया जाता है, जिससे फसलों को बिना नुकसान पहुँचाए पैमाइश संभव हो रही है। किसानों के लिए प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक और पारदर्शी बनती जा रही है।

रोवर से तैयार डिजिटल डेटा को जीआईएस (GIS) और भूमि रिकॉर्ड प्रणालियों से जोड़ा जा सकता है। इससे रिकॉर्ड की गुणवत्ता जाँचना, डेटा की ट्रेसबिलिटी बनाए रखना और भूमि पार्सल सर्वेक्षण, कडास्ट्रल मैपिंग तथा जीआईएस आधारित मैपिंग में समन्वय करना आसान हो गया है।

धारा-24 का विशेष महाअभियान

राजस्व परिषद सचिव कंचन वर्मा ने बताया कि भूमि की सीमाओं और पैमाइश से जुड़े मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए धारा-24 का विशेष महाअभियान 1 जुलाई से 15 अगस्त 2026 तक चलाया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1 जुलाई को सहारनपुर से इस अभियान की औपचारिक शुरुआत की थी। अभियान को एकसमान और प्रभावी तरीके से संचालित करने के लिए राजस्व विभाग ने मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी जारी की।

आगे की राह

गौरतलब है कि यह पहल केवल उपकरण खरीदने तक सीमित नहीं है — लेखपाल और अन्य राजस्व कर्मियों को इन उपकरणों के संचालन के लिए प्रशिक्षित करने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब भूमि विवाद उत्तर प्रदेश के ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती बने हुए हैं। डिजिटल और उपग्रह-आधारित रिकॉर्ड की उपलब्धता भविष्य में भूमि विवादों की संख्या घटाने और न्यायालयों पर बोझ कम करने में सहायक हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा उपकरण खरीद के बाद शुरू होती है। राज्य में लेखपालों की कमी और ग्रामीण स्तर पर तकनीकी साक्षरता की सीमाएँ इस परियोजना की सबसे बड़ी चुनौती हैं, जिनका जिक्र सरकारी बयानों में प्रायः नहीं होता। यदि डिजिटल डेटा को भूमि रिकॉर्ड प्रणालियों से पारदर्शी तरीके से नहीं जोड़ा गया, तो यह तकनीक विवादों को घटाने के बजाय नए किस्म के विवाद — डेटा की शुद्धता और अपडेट को लेकर — पैदा कर सकती है। यूपी जैसे बड़े राज्य में जहाँ भूमि विवाद न्यायपालिका पर भारी बोझ हैं, इस पहल की सफलता उपकरणों की संख्या नहीं बल्कि उनके इस्तेमाल की जवाबदेही तय करेगी।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जीएनएसएस रोवर क्या है और यह जमीन की पैमाइश में कैसे काम करता है?
जीएनएसएस रोवर एक उपग्रह-आधारित सर्वेक्षण उपकरण है जो विभिन्न उपग्रह प्रणालियों के सिग्नल से जमीन पर किसी बिंदु की सटीक स्थिति निर्धारित करता है। उत्तर प्रदेश के नेटवर्क से जुड़ने पर यह 1 से 5 सेंटीमीटर तक की सटीकता देता है। सर्वेक्षक भूमि सीमा के प्रमुख बिंदुओं के डिजिटल निर्देशांक दर्ज करते हैं और सॉफ्टवेयर से डिजिटल नक्शा तैयार होता है।
उत्तर प्रदेश में कितने जीएनएसएस रोवर तैनात किए गए हैं?
प्रदेश में कुल 504 जीएनएसएस रोवर उपलब्ध हैं। इनमें से 350 रोवर तहसीलों में भेजे जा चुके हैं और फील्ड सर्वेक्षण में इस्तेमाल हो रहे हैं। 143 रोवर 10 शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) की नक्शा परियोजनाओं में लगाए गए हैं, जबकि 2 रोवर हरदोई के चकबंदी प्रशिक्षण केंद्र और 9 रोवर लेखपाल प्रशिक्षण में उपयोग किए गए हैं।
धारा-24 का विशेष महाअभियान क्या था और इसकी शुरुआत कहाँ से हुई?
धारा-24 का विशेष महाअभियान भूमि की सीमाओं और पैमाइश से जुड़े लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए 1 जुलाई से 15 अगस्त 2026 तक चलाया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1 जुलाई को सहारनपुर से इसकी शुरुआत की थी। अभियान की एकसमान संचालन के लिए राजस्व विभाग ने मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी जारी की।
जीएनएसएस रोवर तकनीक से किसानों को क्या फायदा होगा?
जीएनएसएस रोवर से कृषि भूमि की पैमाइश बिना खेत में बार-बार आवाजाही के होती है, जिससे खड़ी फसल को नुकसान पहुँचने की आशंका कम होती है। प्रक्रिया तेज और पारदर्शी होने से किसानों को लंबी प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ती। डिजिटल रिकॉर्ड होने से भूमि विवादों के निस्तारण में भी सुविधा बढ़ने की उम्मीद है।
पारंपरिक पैमाइश और जीएनएसएस रोवर में क्या अंतर है?
पारंपरिक पैमाइश में जंजीर और फीते का इस्तेमाल होता था, जिसमें अधिक समय, जनशक्ति और मानवीय गलतियों की संभावना रहती थी। जीएनएसएस रोवर से सर्वेक्षण उपग्रह सिग्नल आधारित है, जो 1 से 5 सेंटीमीटर सटीकता देता है। इससे डिजिटल नक्शा, जीआईएस से संपर्क और डेटा ट्रेसबिलिटी जैसी सुविधाएँ भी मिलती हैं जो पारंपरिक विधि में संभव नहीं थीं।
राष्ट्र प्रेस
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