योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ वैज्ञानिक जांच की मुहिम को और मजबूत किया
सारांश
मुख्य बातें
लखनऊ, १७ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश में अब अपराधियों के खिलाफ तकनीकी और वैज्ञानिक जांच का शिकंजा और भी मजबूत किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राज्य की पुलिसिंग को आधुनिक और परिणाम-उन्मुख बनाने के लिए उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (यूपीएसआईएफएस) में बड़े स्तर पर क्राइम सीन एक्सपर्ट तैयार करने का कार्य किया जा रहा है।
संस्थान में पांच चरणों में ५०० विशेषज्ञों को प्रशिक्षित करने की योजना तेजी से आगे बढ़ रही है, जिनमें से अब तक ३०० एक्सपर्ट तैयार हो चुके हैं और बाकी दो बैच का प्रशिक्षण जल्द ही पूरा किया जाएगा।
इस पहल की एक बड़ी विशेषता यह है कि ये प्रशिक्षित अधिकारी अपने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि अपने-अपने कमिश्नरेट और जिलों में जाकर अन्य पुलिसकर्मियों को भी प्रशिक्षित करेंगे। इसका मतलब है कि यूपीएसआईएफएस में तैयार हो रहे ये एक्सपर्ट प्रदेश में फॉरेंसिक पुलिसिंग की एक मजबूत श्रृंखला विकसित करेंगे।
वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में ये अधिकारी वर्कशॉप आयोजित कर आरक्षी से लेकर निरीक्षक स्तर तक के अधिकारियों को क्राइम सीन मैनेजमेंट, साइबर फॉरेंसिक, डिजिटल साक्ष्य संरक्षण और वैज्ञानिक जांच की बारीकियां सिखाएंगे, जिससे पुलिस बल की समग्र कार्यक्षमता में बड़ा परिवर्तन देखने को मिलेगा।
यूपीएसआईएफएस की यह पहल जांच प्रक्रिया को वैज्ञानिक आधार प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को पारंपरिक जांच के साथ-साथ आधुनिक तकनीकों जैसे डिजिटल एविडेंस प्रिजर्वेशन, साइबर ट्रैकिंग, वैज्ञानिक सैंपलिंग और फॉरेंसिक एनालिसिस की विस्तृत जानकारी दी जा रही है, ताकि घटनास्थल पर पहुंचते ही हर पहलू को सटीक तरीके से सुरक्षित और विश्लेषित किया जा सके।
संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी के अनुसार, अभी फॉरेंसिक एक्सपर्ट के तीन बैचों के माध्यम से पुलिस कर्मियों और अधिकारियों को तकनीकी बारीकियों में प्रशिक्षित किया गया है। चौथे बैच की शुरुआत २७ अप्रैल से होगी और उसके बाद पांचवें चरण में बाकी विशेषज्ञ भी तैयार कर लिए जाएंगे। ये विशेषज्ञ प्रदेश के सभी कमिश्नरेट और ७५ जिलों के अधिकारियों को बारीकियां सिखाएंगे।
योगी सरकार की इस रणनीति से उत्तर प्रदेश में फॉरेंसिक आधारित पुलिसिंग को नई दिशा मिलने वाली है। यह पहल प्रदेश को आधुनिक, तकनीक सक्षम और मजबूत कानून-व्यवस्था वाले राज्य के रूप में और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।