14 सितंबर 2026
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अगस्त 2026 में खुदरा महंगाई 4.82% पर पहुंची, चांदी 107% और खाद्य कीमतों ने बढ़ाया दबाव

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अगस्त 2026 में खुदरा महंगाई 4.82% पर पहुंची, चांदी 107% और खाद्य कीमतों ने बढ़ाया दबाव

सारांश

अगस्त 2026 में भारत की खुदरा महंगाई 4.82% पर पहुंची — चांदी 107% उछली, खाद्य महंगाई 5.95%। RBI के दायरे में है, पर मध्य बिंदु से ऊपर। केंद्रीय बैंक ने GDP अनुमान 6.7% किया और महंगाई अनुमान घटाया — त्योहारी सीज़न में असली परीक्षा होगी।

मुख्य बातें

सांख्यिकी मंत्रालय के अनुसार अगस्त 2026 में CPI आधारित खुदरा महंगाई 4.82 प्रतिशत रही।
चांदी के आभूषणों में 107.11% और सोने के आभूषणों में 35.55% की सालाना वृद्धि दर्ज हुई।
कुल खाद्य महंगाई 5.95% ; प्याज 48.27% , अदरक 73.82% , लहसुन 43.6% महंगे हुए।
टमाटर 31.09% और आलू 13.14% सस्ते हुए; कारें 6.72% सस्ती हुईं।
RBI ने वित्त वर्ष महंगाई अनुमान 5.1% से घटाकर 5% और कोर महंगाई अनुमान 4.7% से 4.3% किया।
GDP वृद्धि अनुमान 6.6% से बढ़ाकर 6.7% किया; रेपो रेट अपरिवर्तित।

भारत की खुदरा महंगाई अगस्त 2026 में बढ़कर 4.82 प्रतिशत हो गई — यह आँकड़ा सांख्यिकी मंत्रालय ने 14 सितंबर 2026 को जारी किया। नए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) शृंखला पर आधारित यह वृद्धि पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में मामूली लेकिन उल्लेखनीय बढ़ोतरी है। सोने-चांदी के आभूषणों और कुछ सब्जियों की कीमतों में तेज उछाल इस बढ़ोतरी के प्रमुख कारणों में रहे।

मुख्य घटनाक्रम: क्या महंगा, क्या सस्ता

अगस्त में सर्वाधिक महंगाई चांदी के आभूषणों में दर्ज हुई, जिनकी कीमतें सालाना आधार पर 107.11 प्रतिशत तक उछल गईं। सोने के आभूषणों की कीमतों में भी 35.55 प्रतिशत की वृद्धि रही। वैश्विक स्तर पर कीमती धातुओं की माँग और भू-राजनीतिक अनिश्चितता को इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है।

खाद्य महंगाई की बात करें तो कुल खाद्य महंगाई 5.95 प्रतिशत रही। प्याज की कीमतों में 48.27 प्रतिशत, अदरक में 73.82 प्रतिशत और लहसुन में 43.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालाँकि राहत की बात यह रही कि टमाटर की कीमतों में 31.09 प्रतिशत और आलू में 13.14 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। इसके अलावा कारों की कीमतों में भी 6.72 प्रतिशत की कमी आई।

RBI के लक्ष्य दायरे में, पर दबाव बना हुआ

CPI-आधारित यह महंगाई दर अभी भी भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के निर्धारित 2 से 6 प्रतिशत के सहनशीलता दायरे के भीतर है। इस दायरे का मध्य बिंदु 4 प्रतिशत है। गौरतलब है कि 4.82 प्रतिशत की यह दर मध्य बिंदु से ऊपर है, जो केंद्रीय बैंक के लिए नीतिगत निर्णयों में सतर्कता की माँग करती है।

हालिया मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा था कि मुख्य महंगाई दर लक्ष्य से ऊपर गई है, जिसका प्रमुख कारण ईंधन की ऊँची कीमतें हैं, जबकि व्यापक मूल्य दबाव अभी भी नियंत्रण में हैं। आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने के उद्देश्य से RBI ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया।

RBI के संशोधित अनुमान

RBI ने चालू वित्त वर्ष के लिए औसत महंगाई के अपने अनुमान को जून में दिए गए 5.1 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया है। खाद्य और ईंधन को छोड़कर मापी जाने वाली कोर महंगाई का अनुमान भी 4.7 प्रतिशत से घटाकर 4.3 प्रतिशत कर दिया गया है। यह संशोधन दर्शाता है कि केंद्रीय बैंक को उम्मीद है कि अंतर्निहित मूल्य दबाव धीरे-धीरे कम होगा।

आर्थिक वृद्धि पर RBI का भरोसा

RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत मज़बूत बनी हुई है। मिश्रित आर्थिक संकेतों के बीच केंद्रीय बैंक का यह आशावाद निवेशकों और नीति-निर्माताओं दोनों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

आम जनता पर असर

रसोई में काम आने वाले प्याज, अदरक और लहसुन की कीमतों में तेज वृद्धि ने आम परिवारों के मासिक बजट पर सीधा असर डाला है। वहीं सोने-चांदी की आसमान छूती कीमतों ने त्योहारी सीज़न की खरीदारी को महंगा कर दिया है। टमाटर और आलू सस्ते होने से रसोई के खर्च में कुछ राहत ज़रूर मिली है, लेकिन कुल मिलाकर आम उपभोक्ता पर महंगाई का दबाव बना हुआ है। आने वाले महीनों में खाद्य कीमतों की दिशा और मानसून के प्रदर्शन पर सबकी नज़र बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह मध्य बिंदु (4%) से काफी ऊपर है — और चांदी जैसी गैर-ज़रूरी वस्तु में 107% की उछाल यह छुपाती है कि असली दर्द रसोई में हो रहा है जहाँ प्याज, अदरक और लहसुन तीव्र गति से महंगे हुए हैं। RBI का GDP अनुमान बढ़ाना और महंगाई अनुमान घटाना आशावादी है, लेकिन त्योहारी सीज़न में माँग बढ़ने पर खाद्य और कीमती धातु दोनों मोर्चों पर दबाव और गहरा हो सकता है। असली सवाल यह है कि क्या RBI रेपो रेट को आगे भी अपरिवर्तित रख सकेगा यदि महंगाई 5% के अनुमान को पार करे।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अगस्त 2026 में भारत की खुदरा महंगाई दर कितनी रही?
सांख्यिकी मंत्रालय के अनुसार अगस्त 2026 में CPI आधारित खुदरा महंगाई 4.82 प्रतिशत रही। यह RBI के 2 से 6 प्रतिशत के सहनशीलता दायरे के भीतर है, लेकिन 4 प्रतिशत के मध्य लक्ष्य से ऊपर है।
अगस्त में सबसे ज़्यादा महंगाई किन वस्तुओं में रही?
सबसे अधिक महंगाई चांदी के आभूषणों में 107.11 प्रतिशत और सोने के आभूषणों में 35.55 प्रतिशत रही। सब्जियों में अदरक 73.82%, प्याज 48.27% और लहसुन 43.6% महंगे हुए, जबकि टमाटर 31.09% और आलू 13.14% सस्ते हुए।
RBI ने अगस्त महंगाई के बाद रेपो रेट में क्या बदलाव किया?
RBI ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार मुख्य महंगाई दर ऊँची है जिसका कारण ईंधन की कीमतें हैं, लेकिन व्यापक मूल्य दबाव नियंत्रण में है और आर्थिक वृद्धि को समर्थन देना प्राथमिकता है।
RBI ने चालू वित्त वर्ष के लिए महंगाई और GDP अनुमान क्या रखा है?
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए औसत महंगाई अनुमान 5.1% से घटाकर 5% और कोर महंगाई अनुमान 4.7% से घटाकर 4.3% किया है। वहीं GDP वृद्धि अनुमान 6.6% से बढ़ाकर 6.7% कर दिया गया है।
खुदरा महंगाई का आम जनता के बजट पर क्या असर पड़ा है?
रसोई की ज़रूरी सामग्री — प्याज, अदरक और लहसुन — की कीमतों में भारी उछाल से घरेलू बजट पर सीधा दबाव पड़ा है। त्योहारी सीज़न में सोने-चांदी की महंगाई ने आभूषण खरीदारी को भी महंगा कर दिया है, हालाँकि टमाटर और आलू की गिरती कीमतों से कुछ राहत मिली है।
राष्ट्र प्रेस
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