जुलाई 2026 में खुदरा महंगाई 4.5% रहने का अनुमान, खाद्य तेल-दाल-प्याज से ऊपर जाने का खतरा
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली — बैंक ऑफ बड़ौदा की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भारत की खुदरा महंगाई दर (CPI) जुलाई 2026 में 4.5 प्रतिशत पर टिकी रहने का अनुमान है। हालाँकि, प्याज, खाने का तेल, चावल और दाल जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में जारी दबाव के चलते महंगाई के इस स्तर से ऊपर जाने का जोखिम बना हुआ है। 6 अगस्त 2026 को जारी यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) मूल्य स्थिरता और विकास दर के बीच संतुलन बनाने की कोशिश में है।
महंगाई का मौजूदा परिदृश्य
रिपोर्ट में कहा गया है कि जरूरी वस्तुओं में महंगाई का असर व्यापक बना हुआ है। प्याज की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है, जबकि खाने के तेल और दालों पर दबाव कम होने के संकेत अभी सीमित हैं। दूसरी ओर, मुख्य सब्जियों — विशेष रूप से टमाटर, प्याज और आलू (TOП) — की बेहतर आवक और सामान्य मानसून ने कुछ हद तक राहत दी है।
मुख्य महंगाई पर नज़र
खाद्य और ईंधन को छोड़कर मापी जाने वाली मुख्य महंगाई (Core Inflation) के 4 से 4.1 प्रतिशत के दायरे में सीमित रहने की उम्मीद है। अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में सोने की कीमतों में महीने-दर-महीने आधार पर 3.7 प्रतिशत की गिरावट से पर्सनल केयर श्रेणी में कुछ राहत मिलने की संभावना है। हालाँकि, रिपोर्ट ने चेताया है कि आगे चलकर इनपुट लागत में बढ़ोतरी मुख्य महंगाई को फिर से ऊपर धकेल सकती है।
बीओबी आवश्यक वस्तु सूचकांक का संकेत
बैंक ऑफ बड़ौदा के 'एसेंशियल कमोडिटीज इंडेक्स' (BOB-ECI) ने जुलाई 2026 में सालाना आधार पर 4.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की — जो इस पूरी श्रृंखला में अब तक की सबसे तेज़ बढ़ोतरी है। अगस्त 2026 के शुरुआती पाँच दिनों में यह आँकड़ा और भी चिंताजनक रूप से 5.4 प्रतिशत तक पहुँच गया, जो आगामी महीनों में दबाव बने रहने का संकेत देता है।
कृषि और मानसून की स्थिति
रिपोर्ट में मानसून की प्रगति को अनुकूल बताया गया है — 63 प्रतिशत राज्यों में सामान्य वर्षा दर्ज हुई है। 31 जुलाई 2026 तक प्रमुख खरीफ फसलों (तिलहन और गन्ने को छोड़कर) का बोया गया रकबा पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में अधिक रहा है, जो आगे खाद्य आपूर्ति में सुधार का संकेत देता है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खाद्य तेलों की कीमतों में नरमी भी कुछ हद तक राहत दे रही है।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि RBI का मध्यम अवधि का महंगाई लक्ष्य 4 प्रतिशत है और 4.5 प्रतिशत का अनुमान उसकी सहनशीलता सीमा के भीतर है, लेकिन यह लक्ष्य से ऊपर है। यदि BOB-ECI का अगस्त का रुझान जारी रहा, तो अगली मौद्रिक नीति समीक्षा में केंद्रीय बैंक के लिए दर कटौती की गुंजाइश और सीमित हो सकती है। खाद्य कीमतों का दबाव, विशेष रूप से मानसून के उत्तरार्ध में, आने वाले महीनों में CPI की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।