मई 2026 में खुदरा महंगाई 3.93%, आलू 23% सस्ता; RBI ने FY27 अनुमान बढ़ाकर 5.1% किया
सारांश
मुख्य बातें
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के 12 जून 2026 को जारी आँकड़ों के अनुसार, मई 2026 में देश की खुदरा महंगाई दर (CPI) सालाना आधार पर 3.93 प्रतिशत रही — जो अप्रैल 2026 के 3.48 प्रतिशत से अधिक है। हालाँकि आलू, मटर और जीरे की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई, खाद्य महंगाई में मासिक बढ़त ने कीमतों के दबाव की वापसी के संकेत दिए हैं।
शहरी बनाम ग्रामीण: महंगाई का फर्क
सरकारी आँकड़ों के अनुसार, ग्रामीण इलाकों में खुदरा महंगाई दर 4.25 प्रतिशत रही, जबकि शहरी इलाकों में यह 3.53 प्रतिशत थी। खुदरा खाद्य महंगाई दर मई में 4.78 प्रतिशत रही, जो अप्रैल के 4.20 प्रतिशत से अधिक है।
ग्रामीण इलाकों में खुदरा खाद्य महंगाई 4.85 प्रतिशत रही, जबकि शहरी इलाकों में यह 4.66 प्रतिशत दर्ज की गई। गौरतलब है कि ग्रामीण उपभोक्ता खाद्य मदों पर आय का अपेक्षाकृत बड़ा हिस्सा खर्च करते हैं, इसलिए खाद्य महंगाई का असर ग्रामीण परिवारों पर अधिक पड़ता है।
सस्ते हुए उत्पाद: आलू और मटर में बड़ी राहत
मई में सालाना आधार पर जिन शीर्ष पाँच उत्पादों के दाम घटे, वे इस प्रकार रहे:
आलू (-23.71 प्रतिशत), मटर (-11.47 प्रतिशत), मोटर कार एवं जीप (-7.19 प्रतिशत), जीरा (-4.59 प्रतिशत) और मोटरसाइकिल व स्कूटर (-3.56 प्रतिशत)। इनमें से आलू और मटर जैसी सब्जियों की कीमतों में गिरावट मौसमी आपूर्ति सुधार और पिछले वर्ष के ऊँचे आधार से जुड़ी है।
महंगे हुए उत्पाद: चाँदी ज्वेलरी और टमाटर सबसे आगे
इसके विपरीत, सालाना आधार पर जिन उत्पादों की कीमतें सर्वाधिक बढ़ीं, उनमें चाँदी की ज्वेलरी (155.23 प्रतिशत), टमाटर (48.43 प्रतिशत), सोना, हीरा एवं प्लेटिनम ज्वेलरी (40.93 प्रतिशत), अदरक (32.49 प्रतिशत) और किशमिश (21.97 प्रतिशत) शामिल हैं। चाँदी और सोने की ज्वेलरी में यह उछाल वैश्विक कीमती धातु बाज़ारों में तेज़ी को दर्शाता है।
राज्यवार स्थिति: दक्षिणी राज्यों में सबसे अधिक दबाव
आँकड़ों के अनुसार, 50 लाख से अधिक आबादी वाले शीर्ष पाँच राज्यों में मई में सर्वाधिक खुदरा महंगाई तेलंगाना (6.15 प्रतिशत) में दर्ज की गई, इसके बाद तमिलनाडु (5.11 प्रतिशत), आंध्र प्रदेश (4.90 प्रतिशत), कर्नाटक (4.59 प्रतिशत) और ओडिशा (4.54 प्रतिशत) रहे। यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिणी राज्यों में खाद्य आपूर्ति श्रृंखला पर मौसमी दबाव बना हुआ है।
RBI का अनुमान और आगे की राह
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने जून की मौद्रिक नीति समीक्षा में वित्त वर्ष 2027 के लिए महंगाई का अनुमान 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया। इसके पीछे अल-नीनो की वजह से मॉनसून के सामान्य से कम रहने की आशंका और वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तेज़ी को कारण बताया गया।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि कच्चे तेल की ऊँची कीमतें और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव आयातित महंगाई को लेकर चिंता बढ़ाने वाले प्रमुख कारण हैं। यदि मॉनसून कमज़ोर रहा तो खाद्य महंगाई पर दबाव और बढ़ सकता है, जो RBI की दर-कटौती की गुंजाइश को सीमित कर सकता है।