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जून में CPI महंगाई 4.38% — अगली दो तिमाहियों में 4–4.5% के दायरे में रहने का अनुमान

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जून में CPI महंगाई 4.38% — अगली दो तिमाहियों में 4–4.5% के दायरे में रहने का अनुमान

सारांश

जून में भारत की CPI महंगाई 4.38% रही — अनुमान के अनुरूप। लेकिन असली सवाल आगे का है: मानसून की असमान चाल, अल नीनो का साया और कच्चे तेल की अनिश्चितता — ये तीनों मिलकर तय करेंगे कि RBI की राहत की राह खुलती है या बंद होती है।

मुख्य बातें

जून 2025 में CPI महंगाई 4.38 प्रतिशत रही, जो अर्थशास्त्रियों के पूर्वानुमान के अनुरूप है।
अगली दो तिमाहियों में महंगाई 4 से 4.5 प्रतिशत के दायरे में रहने का अनुमान।
खाद्य महंगाई 5.32 प्रतिशत ; चांदी के आभूषण 133.21% और सोने के आभूषण 36.82% महंगे हुए।
परिवहन महंगाई 4.3 प्रतिशत — कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का असर।
जुलाई में बारिश की कमी घटकर 15 प्रतिशत हुई, जो जून के अंत में 40 प्रतिशत से अधिक थी।
सामान्य मानसून रहने पर RBI के लिए राहतकारी मौद्रिक नीति जारी रखना आसान होगा।

भारत की उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर जून 2025 में 4.38 प्रतिशत रही, जो अर्थशास्त्रियों के पूर्वानुमान के अनुरूप है। विशेषज्ञों के अनुसार, अगली दो तिमाहियों में यह दर 4 से 4.5 प्रतिशत के दायरे में स्थिर रह सकती है, बशर्ते मानसून की प्रगति सामान्य बनी रहे। खाद्य कीमतों की दिशा इस पूरे परिदृश्य का सबसे निर्णायक कारक बनी हुई है।

मुख्य घटनाक्रम: किन वस्तुओं की कीमतें सबसे अधिक बढ़ीं

जून में सबसे तीव्र मूल्यवृद्धि चांदी के आभूषणों में दर्ज की गई, जिनकी कीमतें सालाना आधार पर 133.21 प्रतिशत उछलीं। सोने के आभूषण भी 36.82 प्रतिशत महंगे हुए। वहीं, कुल खाद्य महंगाई 5.32 प्रतिशत रही, जो समग्र CPI से अधिक है।

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने बताया कि गैर-खाद्य श्रेणी में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का असर खुदरा ईंधन पर पड़ा, जिससे परिवहन महंगाई 4.3 प्रतिशत तक पहुंच गई।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

सबनवीस के अनुसार, वैश्विक स्तर पर सोने-चांदी की कीमतों में नरमी आने से पर्सनल केयर श्रेणी की महंगाई में कुछ राहत मिल सकती है, हालांकि बेस इफेक्ट के कारण यह अभी ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती है। उन्होंने कहा कि खाद्य कीमतों की दिशा मुख्य रूप से मानसून की प्रगति पर निर्भर करेगी।

DBS बैंक की वरिष्ठ अर्थशास्त्री एवं कार्यकारी निदेशक राधिका राव ने कहा कि जून की महंगाई बाजार के अनुमान से थोड़ी अधिक रही — इसका कारण खाद्य कीमतों का सामान्य स्तर पर लौटना और मई के मध्य में ईंधन कीमतों में हुई बढ़ोतरी का असर है।

ब्रिकवर्क रेटिंग्स के रिसर्च प्रमुख राजीव शरण ने आगाह किया कि यदि कच्चे तेल की कीमतों में फिर से तेजी आती है और बुलियन महंगा बना रहता है, तो महंगाई पर ऊपर की ओर दबाव बन सकता है।

मानसून की भूमिका और खाद्य कीमतों पर असर

राधिका राव के अनुसार, बाजार की नजर अब दक्षिण-पश्चिम मानसून के भौगोलिक वितरण पर टिकी है। जुलाई में देशभर में बारिश की कमी घटकर 15 प्रतिशत रह गई है, जबकि जून के अंत तक यह 40 प्रतिशत से अधिक थी। मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत के प्रमुख कृषि क्षेत्रों में बारिश में सुधार देखा गया है, जो खाद्य आपूर्ति के लिए सकारात्मक संकेत है।

यह ऐसे समय में आया है जब अल नीनो से जुड़ी बारिश की अनिश्चितता खाद्य कीमतों को प्रभावित करने की आशंका बनाए हुए है। मानसून की असमान प्रगति सब्जियों और अनाज की कीमतों पर सीधा प्रभाव डाल सकती है।

आरबीआई की मौद्रिक नीति पर संभावित प्रभाव

राजीव शरण के अनुसार, यदि मानसून सामान्य और अनुकूल रहता है, तो खाद्य कीमतों में नरमी आ सकती है। इससे महंगाई नियंत्रित रहने के साथ-साथ भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के लिए मौद्रिक नीति में राहतकारी रुख बनाए रखना भी सुगम होगा। गौरतलब है कि RBI पहले ही इस वर्ष ब्याज दरों में कटौती का संकेत दे चुका है और महंगाई के इस दायरे में बने रहने से उस राह में बाधाएं कम होंगी।

आने वाले महीनों में मानसून की स्थिति, वैश्विक कमोडिटी बाजार और कच्चे तेल की कीमतें मिलकर तय करेंगी कि महंगाई 4 प्रतिशत के करीब रहती है या 4.5 प्रतिशत की ऊपरी सीमा की ओर बढ़ती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके भीतर छिपी संरचनात्मक कमज़ोरियाँ नज़रअंदाज़ नहीं की जा सकतीं — चांदी में 133 प्रतिशत और खाद्य में 5.32 प्रतिशत की वृद्धि बताती है कि दबाव व्यापक है। असली जोखिम यह है कि मानसून की एक और असफल तिमाही पूरे अनुमान को पलट सकती है, और RBI की दर-कटौती की संभावित राह फिर से बंद हो सकती है। अर्थशास्त्री 'अनुमान के अनुरूप' कहकर राहत जता रहे हैं, लेकिन बेस इफेक्ट और वैश्विक कमोडिटी की अनिश्चितता को देखते हुए यह राहत अस्थायी हो सकती है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जून 2025 में भारत की CPI महंगाई दर क्या रही?
जून 2025 में भारत की उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर 4.38 प्रतिशत रही, जो अर्थशास्त्रियों के पूर्वानुमान के अनुरूप है। खाद्य महंगाई इस दौरान 5.32 प्रतिशत दर्ज की गई।
अगली दो तिमाहियों में महंगाई कितनी रह सकती है?
अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि अगली दो तिमाहियों में CPI महंगाई 4 से 4.5 प्रतिशत के दायरे में बनी रह सकती है। हालांकि, यह अनुमान मानसून की सामान्य प्रगति और वैश्विक कमोडिटी कीमतों पर निर्भर करता है।
महंगाई पर मानसून का क्या असर पड़ता है?
मानसून की असमान प्रगति सब्जियों और अनाज की आपूर्ति को प्रभावित करती है, जिससे खाद्य कीमतें बढ़ सकती हैं। जुलाई में देशभर में बारिश की कमी घटकर 15 प्रतिशत रह गई है, जो जून के अंत में 40 प्रतिशत से अधिक थी — यह सुधार खाद्य महंगाई के लिए सकारात्मक संकेत है।
जून में किन वस्तुओं की कीमतें सबसे अधिक बढ़ीं?
जून में चांदी के आभूषणों की कीमतें सालाना आधार पर 133.21 प्रतिशत बढ़ीं, जो सर्वाधिक रही। सोने के आभूषण 36.82 प्रतिशत महंगे हुए और परिवहन महंगाई कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण 4.3 प्रतिशत तक पहुंची।
CPI महंगाई के इस रुझान का RBI की नीति पर क्या असर होगा?
यदि महंगाई 4 से 4.5 प्रतिशत के दायरे में बनी रहती है और मानसून अनुकूल रहता है, तो भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के लिए राहतकारी मौद्रिक नीति जारी रखना आसान होगा। हालांकि, कच्चे तेल या बुलियन में तेजी महंगाई पर ऊपर की ओर दबाव बना सकती है, जो दर-कटौती की संभावनाओं को सीमित कर सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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