अल नीनो की 80% संभावना: वित्त वर्ष 2027 में CPI महंगाई 5.2–5.5% रहने का अनुमान, बैंक ऑफ बड़ौदा रिसर्च की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
बैंक ऑफ बड़ौदा की ताज़ा रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, जून से अगस्त 2026 के बीच अल नीनो की मौसमी घटना होने की संभावना 80 प्रतिशत है और इसके नवंबर 2026 तक बने रहने की संभावना 90 प्रतिशत या उससे अधिक आँकी गई है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यह स्थिति खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों पर दबाव बढ़ाते हुए वित्त वर्ष 2027 में सीपीआई महंगाई दर को 5.2 प्रतिशत से 5.5 प्रतिशत के बीच धकेल सकती है।
मौजूदा महंगाई की स्थिति
मई 2026 में हेडलाइन सीपीआई महंगाई दर 3.9 प्रतिशत रही — जो बैंक ऑफ बड़ौदा रिसर्च के 4.1 प्रतिशत के पूर्वानुमान से कम, लेकिन अप्रैल 2026 के 3.5 प्रतिशत से अधिक थी। इस बढ़त की मुख्य वजह खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों में तेज़ी रही, जिसमें खाद्य महंगाई दर बढ़कर 4.8 प्रतिशत पर पहुँच गई।
हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के कारण परिवहन से जुड़ी महंगाई दर में इज़ाफ़ा हुआ। साथ ही रेस्टोरेंट और आवास-संबंधी सेवाओं की महंगाई दर में भी वृद्धि दर्ज की गई।
कोर महंगाई में अंदरूनी दबाव
खाद्य और ईंधन को छोड़कर कोर महंगाई दर बढ़कर 3.9 प्रतिशत पर आ गई, जो कीमतों में अंदरूनी दबाव का संकेत देती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मांग स्थिर रहने के बीच कंपनियाँ इनपुट लागत में हुई बढ़ोतरी का कुछ बोझ उपभोक्ताओं पर डाल सकती हैं, जिससे कोर महंगाई दर और ऊपर जाने का जोखिम है।
अल नीनो और आपूर्ति शृंखला पर असर
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि 11 जून 2026 तक देश के जलाशयों का जलस्तर सामान्य भंडारण से अधिक है और सब्जियों की आवक के आँकड़े भी संतोषजनक हैं — जो फ़िलहाल एक राहत की बात है। हालाँकि, रिपोर्ट यह भी रेखांकित करती है कि खाद्य महंगाई के मामले में ईंधन की ऊँची कीमतों का असर और माल ढुलाई (फ्रेट) लागत में संभावित बढ़ोतरी निकट भविष्य में कीमतों को और ऊपर धकेल सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, 'सेकंड-राउंड पास-थ्रू' — यानी लागत वृद्धि का कीमतों पर बाद में पड़ने वाला असर — पर बारीकी से नज़र रखना ज़रूरी है, खासकर इस वर्ष मौसम से जुड़े जोखिम अधिक होने के मद्देनज़र।
विशेषज्ञ का अनुमान
बैंक ऑफ बड़ौदा की अर्थशास्त्री दिपान्विता मजूमदार के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 में सीपीआई महंगाई दर 5.2 प्रतिशत से 5.5 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। यह अनुमान अल नीनो के आंशिक प्रभाव और कच्चे तेल की औसत कीमत 90 से 100 डॉलर प्रति बैरल रहने की संभावना पर आधारित है।
आगे क्या होगा
रिपोर्ट के अनुसार आने वाले महीनों में आपूर्ति की स्थिति यह तय करेगी कि महंगाई किस दिशा में जाती है। गौरतलब है कि यदि मानसून कमज़ोर रहा और कच्चे तेल की कीमतें ऊँची बनी रहीं, तो भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के लिए ब्याज दरों पर नीतिगत निर्णय और जटिल हो सकते हैं। खाद्य और ईंधन — दोनों मोर्चों पर बढ़ता दबाव आम उपभोक्ता की क्रय शक्ति को प्रभावित कर सकता है।