15 जुलाई 2026
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एल नीनो से खाद्य महंगाई का खतरा, FCI के पास 817.53 लाख टन का मजबूत बफर स्टॉक: वित्त मंत्रालय

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एल नीनो से खाद्य महंगाई का खतरा, FCI के पास 817.53 लाख टन का मजबूत बफर स्टॉक: वित्त मंत्रालय

सारांश

वित्त मंत्रालय की मई समीक्षा ने दो-तरफा तस्वीर पेश की — 817.53 लाख टन का मजबूत बफर स्टॉक और 10 वर्षीय औसत से 23% अधिक जलाशय भंडारण राहत देते हैं, लेकिन IMD का 92% LPA वर्षा अनुमान और एल नीनो की आशंका दलहन, तिलहन और डेयरी क्षेत्र के लिए गंभीर चेतावनी है।

मुख्य बातें

वित्त मंत्रालय की मई 2026 की मासिक आर्थिक समीक्षा में एल नीनो से खाद्य महंगाई और ग्रामीण मांग पर दबाव बढ़ने की चेतावनी दी गई।
FCI और राज्य एजेंसियों के पास अप्रैल 2026 के अंत तक चावल-गेहूं का संयुक्त भंडार 817.53 लाख टन रहा।
देशभर के जलाशयों में जल भंडारण पिछले 10 वर्षों के औसत का 123.86% दर्ज किया गया।
IMD ने 2026 मानसून में कुल वर्षा LPA के 92% रहने का अनुमान जताया; एल नीनो विकसित होने की संभावना।
दलहन, तिलहन और डेयरी क्षेत्र एल नीनो के प्रति सर्वाधिक संवेदनशील; चावल उत्पादन पर कम असर पड़ने की उम्मीद।
घरेलू हवाई यात्री यातायात में सालाना आधार पर 1.3% की गिरावट; ऑटोमोबाइल बिक्री सभी श्रेणियों में मजबूत।

वित्त मंत्रालय की मई 2026 की मासिक आर्थिक समीक्षा में चेतावनी दी गई है कि यदि जून में एल नीनो के विकसित होने से मानसूनी वर्षा सामान्य से कम रहती है, तो इसका सीधा असर खाद्य महंगाई, ग्रामीण मांग और समग्र आर्थिक वृद्धि पर पड़ सकता है। समीक्षा के अनुसार, पहले से ऊँची वैश्विक ऊर्जा कीमतों के कारण बना महंगाई का दबाव इससे और गहरा हो सकता है।

बफर स्टॉक और जलाशय: मजबूत शुरुआती स्थिति

समीक्षा में सकारात्मक पहलू यह बताया गया है कि देश का खाद्यान्न भंडार फिलहाल ठोस स्थिति में है। अप्रैल 2026 के अंत तक भारतीय खाद्य निगम (FCI) और राज्य एजेंसियों के पास चावल एवं गेहूं का संयुक्त भंडार 817.53 लाख टन था। इसके अलावा, देशभर के जलाशयों में जल भंडारण पिछले 10 वर्षों के औसत का 123.86 प्रतिशत दर्ज किया गया, जो मानसून से पहले एक मजबूत आधार प्रदान करता है।

गर्मी की फसलों की बुवाई में भी उत्साहजनक वृद्धि दिखी है। इस वर्ष 83.08 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह आँकड़ा 80.01 लाख हेक्टेयर था।

एल नीनो का अनुमान और IMD की चेतावनी

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने संकेत दिया है कि 2026 के मानसून सीजन के दौरान ENSO-न्यूट्रल स्थिति से एल नीनो की स्थिति विकसित हो सकती है। विभाग ने कुल वर्षा को दीर्घकालिक औसत (LPA) के लगभग 92 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। अन्य जलवायु कारकों के साथ एल नीनो की परस्पर क्रिया के आधार पर वर्षा में उल्लेखनीय कमी की भी काफी संभावना बताई गई है।

दलहन, तिलहन और डेयरी पर विशेष खतरा

समीक्षा में कहा गया है कि अतीत में एल नीनो और कम वर्षा वाले वर्षों में चावल का उत्पादन अपेक्षाकृत स्थिर रहा, क्योंकि प्रमुख उत्पादक राज्यों में सिंचाई की बेहतर व्यवस्था है। हालाँकि, दलहन और तिलहन फसलें मौसम के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं और मुख्यतः वर्षा-आधारित क्षेत्रों में उगाई जाती हैं — ऐसे में एल नीनो के दौरान इनके रकबे, उत्पादकता और कुल उत्पादन में गिरावट देखी गई है।

इसके साथ ही, चारे की संभावित कमी, दूध उत्पादन में गिरावट और पशु आहार की बढ़ती लागत के कारण पशुपालन और डेयरी क्षेत्र पर भी दबाव बढ़ने की आशंका जताई गई है।

मांग की स्थिति और आगे की चुनौतियाँ

फिलहाल घरेलू मांग की स्थिति मजबूत बनी हुई है। ऑटोमोबाइल बिक्री में दोपहिया, तिपहिया, यात्री वाहन, वाणिज्यिक वाहन और ट्रैक्टर सहित सभी श्रेणियों में अच्छी वृद्धि दर्ज की गई है। हालाँकि, घरेलू हवाई यात्री यातायात में सालाना आधार पर 1.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो मांग में कुछ नरमी का संकेत देती है।

वित्त मंत्रालय की समीक्षा में स्पष्ट किया गया है कि यदि मानसून सामान्य से कमजोर रहता है और आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती आती है, तो आने वाले महीनों में समग्र उपभोक्ता मांग पर दबाव बढ़ सकता है। खरीफ सीजन की तैयारी और बफर स्टॉक की मजबूती से निकट भविष्य में राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन मध्यम अवधि की चुनौतियाँ नीति-निर्माताओं की नजर में बनी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कमज़ोरी दलहन और तिलहन में है — जो पहले से ही ऊँची खुदरा कीमतों पर हैं और सिंचाई के अभाव में वर्षा पर निर्भर हैं। IMD का 92% LPA अनुमान कोई आपदा नहीं, पर यह उस महीन रेखा पर है जहाँ उत्पादन में मामूली गिरावट भी बाज़ार में तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर सकती है। वैश्विक ऊर्जा कीमतों का दबाव पहले से बना है — ऐसे में खाद्य महंगाई और ऊर्जा महंगाई का एक साथ उभरना RBI की मौद्रिक नीति के लिए असली परीक्षा होगी। सरकार के पास बफर का हथियार है, पर उसका सही समय पर और पर्याप्त मात्रा में उपयोग ही फर्क करेगा।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एल नीनो से भारत की खाद्य महंगाई पर क्या असर पड़ सकता है?
वित्त मंत्रालय की समीक्षा के अनुसार, यदि एल नीनो के कारण मानसूनी वर्षा सामान्य से कम रहती है, तो खाद्य महंगाई, ग्रामीण मांग और समग्र आर्थिक वृद्धि पर तेज़ असर पड़ सकता है। पहले से ऊँची वैश्विक ऊर्जा कीमतों के साथ मिलकर यह महंगाई का दबाव और बढ़ा सकता है।
FCI के पास अभी कितना खाद्यान्न भंडार है?
अप्रैल 2026 के अंत तक भारतीय खाद्य निगम (FCI) और राज्य एजेंसियों के पास चावल और गेहूं का कुल बफर स्टॉक 817.53 लाख टन था। समीक्षा में इसे मानसून-पूर्व की मजबूत स्थिति बताया गया है।
IMD ने 2026 मानसून के बारे में क्या अनुमान लगाया है?
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 2026 मानसून सीजन में कुल वर्षा दीर्घकालिक औसत (LPA) के लगभग 92 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। साथ ही विभाग ने ENSO-न्यूट्रल स्थिति से एल नीनो विकसित होने और वर्षा में कमी की संभावना भी बताई है।
एल नीनो का असर किन फसलों पर सबसे ज़्यादा पड़ेगा?
समीक्षा के अनुसार, दलहन और तिलहन फसलें मौसम के प्रति सर्वाधिक संवेदनशील हैं क्योंकि ये मुख्यतः वर्षा-आधारित क्षेत्रों में उगाई जाती हैं। चावल उत्पादन पर अपेक्षाकृत कम असर पड़ने की उम्मीद है, क्योंकि प्रमुख उत्पादक राज्यों में सिंचाई की बेहतर व्यवस्था है।
क्या घरेलू मांग अभी मजबूत है?
फिलहाल घरेलू मांग की स्थिति मिश्रित है — ऑटोमोबाइल बिक्री सभी श्रेणियों में अच्छी वृद्धि दर्शा रही है, लेकिन घरेलू हवाई यात्री यातायात में सालाना आधार पर 1.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। वित्त मंत्रालय ने चेताया है कि कमज़ोर मानसून की स्थिति में आने वाले महीनों में उपभोक्ता मांग पर दबाव बढ़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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