अल नीनो से प्रभावित मलावी में भारत ने भेजी 1,000 मीट्रिक टन चावल की सहायता

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अल नीनो से प्रभावित मलावी में भारत ने भेजी 1,000 मीट्रिक टन चावल की सहायता

सारांश

अफ्रीकी देश मलावी में अल नीनो के कारण सूखा पड़ा है, जिससे खाद्य संकट उत्पन्न हो गया है। भारत ने इस स्थिति में 1,000 मीट्रिक टन चावल की सहायता भेजकर अपने सहयोगी देशों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।

Key Takeaways

  • मलावी में अल नीनो के कारण सूखा पड़ा है।
  • भारत ने 1,000 मीट्रिक टन चावल की सहायता भेजी है।
  • खाद्य सुरक्षा के लिए भारत-मलावी साझेदारी का महत्व।
  • मलावी में 40 लाख लोगों को खाद्य संकट का सामना करना पड़ रहा है।
  • भारत और मलावी के बीच द्विपक्षीय संबंध मजबूत हैं।

नई दिल्ली, 9 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अफ्रीकी राष्ट्र मलावी में अल नीनो के कारण गंभीर सूखा पड़ा है। इस संकट के समय में, भारत ने 1,000 मीट्रिक टन चावल की मानवीय सहायता मलावी को भेजी है। भारत ने इस पहल के माध्यम से ग्लोबल साउथ में सहयोगियों का समर्थन करने और साउथ-साउथ सहयोग की भावना को बढ़ाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दर्शाया है।

भारत के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह जानकारी साझा करते हुए कहा है, "खाद्य सुरक्षा के लिए भारत-मलावी साझेदारी। अल नीनो के प्रभाव से उत्पन्न सूखे के बाद, मलावी की खाद्य सुरक्षा प्रयासों का समर्थन करने के लिए, भारत ने न्हावा शेवा पोर्ट से 1,000 मीट्रिक टन चावल की मानवीय खेप भेजी है। यह ग्लोबल साउथ में साझेदारों को सहायता प्रदान करने और साउथ-साउथ सहयोग की भावना को आगे बढ़ाने के लिए भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है।"

ध्यान दें कि मलावी में 40 लाख से अधिक लोग (आबादी का 20 प्रतिशत) भोजन की गंभीर कमी का सामना कर रहे हैं, जिससे कुपोषण में वृद्धि हो रही है और परिवार भोजन छोड़ने पर मजबूर हो रहे हैं।

अल नीनो के कारण, मलावी में बारिश में अनियमितता आ रही है और चिलवा झील जैसे प्रमुख जल स्रोत सूख गए हैं। इसी बीच, मलावी सरकार ने आपातकाल की स्थिति घोषित कर दी है।

पिछले वर्ष अक्टूबर में, भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने जॉर्ज चापोंडा को मलावी के विदेश मंत्री पद पर नियुक्त करने पर बधाई दी थी। जयशंकर ने कहा कि वह भारत और मलावी के बीच द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए तत्पर हैं।

जयशंकर ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "जॉर्ज चापोंडा को मलावी रिपब्लिक के विदेश मंत्री के रूप में उनकी नियुक्ति पर बधाई। भारत के साथ उनके निकट संबंधों को देखते हुए, हम अपने द्विपक्षीय सहयोग को और आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं।"

मलावी के नए राष्ट्रपति पीटर मुथारिका की डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (डीपीपी) के पूर्व सदस्य जॉर्ज चापोंडा को वहां का विदेश मंत्री नियुक्त किया गया था।

भारत और मलावी के बीच अच्छे द्विपक्षीय संबंध हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, नियमित उच्चस्तरीय संवाद से भारत और मलावी के द्विपक्षीय संबंध और मजबूत हुए हैं। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु भी 2024 में मलावी के राजकीय दौरे पर गई थीं।

राष्ट्रपति भवन की एक विज्ञप्ति में कहा गया कि इस यात्रा के दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने तत्कालीन मलावी समकक्ष लाजरस मैकार्थी चकवेरा से मुलाकात की और भारत-मलावी संबंधों को और मजबूत करने के लिए कई मुद्दों पर चर्चा की।

उन्होंने कला और संस्कृति, युवा मामलों, खेल और फार्मास्यूटिकल सहयोग पर समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए। इस दौरान, राष्ट्रपति मुर्मु ने लिलोंग्वे में नेशनल वॉर मेमोरियल का दौरा किया और पहले और दूसरे विश्व युद्ध में अपनी जान देने वाले सैनिकों और नागरिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

Point of View

वैश्विक सहयोग और साउथ-साउथ साझेदारी के प्रति देश की गंभीरता को दर्शाती है। यह कदम न केवल मलावी के लोगों के लिए एक राहत है, बल्कि भारत की अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों को भी रेखांकित करता है।
NationPress
14/03/2026

Frequently Asked Questions

अल नीनो क्या है?
अल नीनो एक जलवायु घटना है, जो समुद्र के तापमान में वृद्धि के कारण होती है, जिससे मौसम में असामान्यताएँ आती हैं।
भारत ने मलावी को चावल क्यों भेजा?
भारत ने मलावी में सूखे के कारण खाद्य संकट को देखते हुए मानवीय सहायता के रूप में 1,000 मीट्रिक टन चावल भेजा है।
मलावी में कितने लोग खाद्य संकट का सामना कर रहे हैं?
मलावी में 40 लाख से अधिक लोग खाद्य संकट का सामना कर रहे हैं।
भारत और मलावी के बीच संबंध कैसे हैं?
भारत और मलावी के बीच संबंध अच्छे हैं, और दोनों देशों के बीच नियमित उच्चस्तरीय संवाद होता है।
भारत की राष्ट्रपति ने कब मलावी का दौरा किया?
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 2024 में मलावी का राजकीय दौरा किया।
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