खाद्यान्न भंडार पर्याप्त: गेहूं स्टॉक 513 LMT, उर्वरक और खाद्य तेल आपूर्ति भी मजबूत — केंद्र
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 1 जून 2026 को पुष्टि की कि देश में खाद्यान्न भंडार पर्याप्त स्तर पर है और खाद्य तेलों तथा उर्वरकों की उपलब्धता भी आवश्यकता से अधिक बनी हुई है। उपभोक्ता मामलों के विभाग ने नई दिल्ली में एक अंतर-मंत्रालय ब्रीफिंग में यह जानकारी साझा की।
गेहूं और चावल का भंडार
28 मई 2026 तक केंद्रीय भंडार में गेहूं का स्टॉक 513 लाख मीट्रिक टन (LMT) दर्ज किया गया, जो 1 जुलाई के लिए निर्धारित बफर मानक 275.80 LMT से लगभग दोगुना है। चालू रबी विपणन सीजन में गेहूं की खरीद लगभग 350 LMT तक पहुँच चुकी है और यह प्रक्रिया 30 जून 2026 तक जारी रहेगी।
केंद्रीय भंडार में चावल का स्टॉक 397 LMT है, जबकि 1 जुलाई के लिए निर्धारित बफर मानक 135.40 LMT है। इसके अतिरिक्त, लगभग 298 LMT खरीदा हुआ धान अभी मिलिंग प्रक्रिया से गुज़रकर चावल स्टॉक में शामिल होना बाकी है, जो आपूर्ति को और मजबूत करेगा।
खाद्य तेलों की उपलब्धता
घरेलू स्तर पर खाद्य तेलों की उपलब्धता नियमित आयात और घरेलू उत्पादन के संयोजन से पर्याप्त बनी हुई है। प्रमुख आपूर्तिकर्ता देशों से आयात जारी है — इंडोनेशिया और मलेशिया से पाम तेल, रूस और यूक्रेन से सूरजमुखी का तेल, तथा अर्जेंटीना और ब्राजील से सोयाबीन का तेल।
सरकार ने बताया कि वह हितधारकों के साथ नियमित परामर्श कर रही है और आपूर्ति एवं मूल्य रुझानों पर निरंतर नजर रख रही है। चीनी की उपलब्धता भी घरेलू खपत की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त बताई गई है।
उर्वरक आपूर्ति की स्थिति
उर्वरक विभाग के अनुसार, आयात और घरेलू उत्पादन के माध्यम से लगभग 132.43 LMT उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। सरकार के अनुसार, भारत ने पहले ही SOH से लगभग 25 LMT यूरिया, 15 LMT DAP और 10 LMT NPK (जिसमें अमोनियम सल्फेट शामिल है) की खरीद कर ली है, जो जून-जुलाई 2026 में भारतीय बंदरगाहों पर पहुँचेंगे।
इसके अलावा, 17 LMT यूरिया की खरीद के लिए एक नई वैश्विक निविदा जारी की गई है, जिस पर कार्य प्रगति पर है।
घरेलू उत्पादन में वृद्धि
मई 2026 में भारत ने लगभग 25.17 LMT यूरिया का घरेलू उत्पादन हासिल किया, जो मई 2025 के उत्पादन से 2.80 LMT अधिक है। 26 मई 2026 तक DAP का घरेलू उत्पादन 3.86 LMT रहा, जो मई 2025 की तुलना में 2,000 मीट्रिक टन अधिक है।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में अनिश्चितता बनी हुई है। घरेलू उत्पादन में यह वृद्धि आयात निर्भरता को कम करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है।