17 जुलाई 2026
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भगवान कृष्ण पर मौलाना के बयान से परमहंसाचार्य नाराज, राष्ट्रपति मुर्मु को पत्र लिख नमाज प्रतिबंध की माँग

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भगवान कृष्ण पर मौलाना के बयान से परमहंसाचार्य नाराज, राष्ट्रपति मुर्मु को पत्र लिख नमाज प्रतिबंध की माँग

सारांश

अयोध्या के जगद्गुरु परमहंसाचार्य ने मौलाना जर्जिस अंसारी के उस कथित बयान पर — जिसमें भगवान कृष्ण को नमाज़ी बताया गया — राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिखकर भारत में नमाज़ पर पूर्ण प्रतिबंध की माँग की है। यह माँग संवैधानिक धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक संरक्षण की बहस को नए सिरे से खड़ा करती है।

मुख्य बातें

जगद्गुरु परमहंसाचार्य ने 17 जुलाई 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिखा।
मौलाना जर्जिस अंसारी पर आरोप है कि उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण पाँच वक्त नमाज़ पढ़ते थे।
परमहंसाचार्य ने भारत में नमाज़ पर पूर्ण प्रतिबंध की माँग की है।
उन्होंने तर्क दिया कि नमाज़ के लिए पाकिस्तान और बांग्लादेश पहले से उपलब्ध हैं जहाँ शरिया कानून है।
राष्ट्रपति कार्यालय या मौलाना अंसारी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

अयोध्या स्थित तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंसाचार्य ने 17 जुलाई 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिखकर मौलाना जर्जिस अंसारी के उस बयान पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई, जिसमें कथित तौर पर भगवान कृष्ण को नमाज़ पढ़ने वाला बताया गया था। परमहंसाचार्य ने इस पत्र में भारत में नमाज़ पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए जाने की माँग की है।

विवादित बयान और परमहंसाचार्य की आपत्ति

परमहंसाचार्य के अनुसार, मौलाना जर्जिस अंसारी ने कहा कि भगवान कृष्ण नमाज़ी थे और पाँच वक्त नमाज़ पढ़ते थे। परमहंसाचार्य ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि इसी प्रकार का बयान किसी सनातनी ने अल्लाह के बारे में दिया होता, तो भारत ही नहीं, इस्लामिक देशों में भी व्यापक विरोध होता। उनका कहना है कि हिंदू देवी-देवताओं के विरुद्ध इस तरह की टिप्पणियाँ सनातन धर्म का अपमान हैं।

राष्ट्रपति को पत्र में क्या माँगा

परमहंसाचार्य ने राष्ट्रपति से माँग की है कि भारत में नमाज़ पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाया जाए। उन्होंने तर्क दिया कि नमाज़ पढ़ने के लिए पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देश दिए गए हैं, जहाँ शरिया कानून लागू है। उनके अनुसार, भारत में वैदिक संस्कृति की रक्षा सर्वोपरि है और इसी आधार पर यह माँग की गई है।

व्यापक सांस्कृतिक चिंताएँ

परमहंसाचार्य ने यह भी कहा कि भारत में विविध उपासना परंपराएँ हैं और सनातन धर्म यहाँ की मूल उपासना है। उनके अनुसार, इस्लाम और ईसाइयत विदेश से आई हैं। उन्होंने कहा कि वे सबका सम्मान करते हैं, लेकिन हिंदू अस्तित्व और संस्कृति को किसी भी कीमत पर समाप्त नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने गजवा-ए-हिंद और जिहाद जैसे शब्दों का उल्लेख करते हुए अपनी आशंकाएँ व्यक्त कीं।

विशेषज्ञ और सामाजिक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब देश में धार्मिक बयानों को लेकर सामाजिक तनाव की खबरें बीच-बीच में सामने आती रहती हैं। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की माँगें संविधान में प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के विरुद्ध हैं, जबकि परमहंसाचार्य इसे सांस्कृतिक संरक्षण की दृष्टि से उचित ठहराते हैं। गौरतलब है कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन करने का मौलिक अधिकार देता है।

आगे क्या होगा

राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से अभी तक इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मौलाना जर्जिस अंसारी की ओर से भी इस विवाद पर कोई स्पष्टीकरण सार्वजनिक रूप से नहीं आया है। यह मामला आने वाले दिनों में धार्मिक और राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो प्रत्येक नागरिक को धर्म पालन का मौलिक अधिकार देता है — यह पहलू मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर दब जाता है। विवाद की जड़ में एक कथित बयान है, जिसका स्वतंत्र सत्यापन अभी तक सार्वजनिक नहीं हुआ है। यह ऐसे समय में सामने आया है जब धार्मिक बयानबाज़ी और प्रति-माँगों का एक चक्र बनता दिख रहा है, जिसमें दोनों पक्षों के अतिवादी स्वर ही सुर्खियाँ बटोरते हैं। असली सवाल यह है कि क्या राष्ट्रपति कार्यालय इस पत्र पर संवैधानिक सीमाओं के भीतर कोई कदम उठा सकता है — और यदि नहीं, तो इस तरह की माँगें किस उद्देश्य की पूर्ति करती हैं।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परमहंसाचार्य ने राष्ट्रपति को पत्र क्यों लिखा?
परमहंसाचार्य ने मौलाना जर्जिस अंसारी के उस कथित बयान पर आपत्ति जताते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को पत्र लिखा, जिसमें भगवान कृष्ण को पाँच वक्त नमाज़ पढ़ने वाला बताया गया था। उन्होंने इसे सनातन धर्म का अपमान बताते हुए भारत में नमाज़ पर प्रतिबंध की माँग की।
मौलाना जर्जिस अंसारी ने भगवान कृष्ण के बारे में क्या कहा था?
परमहंसाचार्य के अनुसार, मौलाना जर्जिस अंसारी ने कथित तौर पर कहा कि भगवान कृष्ण नमाज़ी थे और पाँच वक्त नमाज़ पढ़ते थे। इस बयान का स्वतंत्र सत्यापन अभी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है और मौलाना अंसारी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
परमहंसाचार्य कौन हैं?
जगद्गुरु परमहंसाचार्य अयोध्या स्थित तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर हैं। वे सनातन धर्म के प्रमुख धार्मिक नेताओं में गिने जाते हैं और समय-समय पर सामाजिक व धार्मिक मुद्दों पर अपनी राय सार्वजनिक करते रहे हैं।
क्या भारत में नमाज़ पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है?
भारत का संविधान अनुच्छेद 25 के तहत प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन करने का मौलिक अधिकार देता है। इस संवैधानिक प्रावधान के चलते नमाज़ पर प्रतिबंध की माँग कानूनी और संवैधानिक दृष्टि से अत्यंत जटिल है। राष्ट्रपति कार्यालय की ओर से अभी इस पत्र पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
इस विवाद का आगे क्या असर हो सकता है?
यह मामला धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक संरक्षण की बहस को नए सिरे से उठा सकता है। राष्ट्रपति कार्यालय की प्रतिक्रिया और मौलाना अंसारी के संभावित स्पष्टीकरण से इस विवाद की दिशा तय होगी।
राष्ट्र प्रेस
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