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भगवान कृष्ण पर विवादित टिप्पणी गलत — साजिद रशीदी; जौहर यूनिवर्सिटी कार्रवाई और वंदे मातरम बिल पर भी बोले

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भगवान कृष्ण पर विवादित टिप्पणी गलत — साजिद रशीदी; जौहर यूनिवर्सिटी कार्रवाई और वंदे मातरम बिल पर भी बोले

सारांश

ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष साजिद रशीदी ने एक साथ तीन मोर्चे खोले — भगवान कृष्ण पर विवादित टिप्पणी को गलत ठहराया, जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर कार्रवाई का विरोध किया, और वंदे मातरम बिल को मुसलमानों को निशाना बनाने की कोशिश बताया।

मुख्य बातें

मौलाना साजिद रशीदी ने मौलाना जरजिस अंसारी के उस दावे को गलत बताया कि भगवान कृष्ण मुसलमान थे और नमाज पढ़ते थे।
रशीदी ने कहा कि इस्लाम में 1,24,000 पैगंबरों की मान्यता है, लेकिन यह आस्था व्यक्तिगत दायरे में रहनी चाहिए।
उत्तर प्रदेश में जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर कार्रवाई को उन्होंने बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया और डीएम से फैसला वापस लेने की माँग की।
मानसून सत्र में पेश होने वाले वंदे मातरम बिल को रशीदी ने मुसलमानों को जानबूझकर निशाना बनाने की कोशिश करार दिया।
उन्होंने कहा कि सरकार को धार्मिक मुद्दों के बजाय महंगाई, बेरोज़गारी और शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए।

ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद साजिद रशीदी ने 17 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि मौलाना जरजिस अंसारी का यह दावा — कि भगवान श्रीकृष्ण एक मुसलमान थे जो दिन में पाँच बार नमाज पढ़ते थे — सर्वथा गलत है और दूसरों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाता है। इसके साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश में जौहर यूनिवर्सिटी के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई का विरोध किया और आरोप लगाया कि केंद्र सरकार वंदे मातरम जैसे मुद्दों के ज़रिए मुसलमानों को जानबूझकर निशाना बना रही है।

भगवान कृष्ण पर टिप्पणी: रशीदी ने क्या कहा

रशीदी ने कहा, 'यह बयान गलत है। किसी को भी दूसरों की धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुँचानी चाहिए।' उन्होंने स्वीकार किया कि इस्लामी मान्यता के अनुसार दुनिया में लगभग 1,24,000 पैगंबर या ईश्वर के संदेशवाहक आए, लेकिन उन्होंने जोड़ा कि यह आस्था व्यक्तिगत दायरे में रहनी चाहिए। उनके शब्दों में, 'यह कहना कि कोई खास व्यक्ति नमाज पढ़ता था या इस्लाम का प्रचार करता था — मेरी नज़र में ऐसी बात है जिससे किसी की आस्था को ठेस पहुँच सकती है।'

रशीदी ने यह भी कहा कि ऐसे वक्त में जब हिंदू-मुस्लिम तनाव चरम पर है, इस तरह के बयानों से बचना चाहिए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मौलाना जरजिस अंसारी के बयान को इसलिए अधिक तूल दिया जा रहा है क्योंकि वे मुसलमान हैं, जबकि इससे पहले हिंदू पक्ष के कुछ लोगों द्वारा 'सनातन को कैंसर और डेंगू-मलेरिया' कहे जाने पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।

जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर कार्रवाई का विरोध

उत्तर प्रदेश में जौहर यूनिवर्सिटी के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई पर रशीदी ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह यूनिवर्सिटी किसी एक व्यक्ति की संपत्ति नहीं है, बल्कि सभी वर्गों और धर्मों के लिए शिक्षा का केंद्र है। उनके अनुसार, 'शिक्षा के केंद्र पर बुलडोजर चलवाना बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।'

रशीदी ने माँग की कि जिलाधिकारी (डीएम) इस फैसले पर पुनर्विचार करें। उनका सुझाव था कि यदि यूनिवर्सिटी सरकारी ज़मीन पर बनी है, तो भी डीएम इसे अपने संरक्षण में लेकर चला सकते हैं — तोड़ना समाधान नहीं है। उन्होंने देश भर के मुसलमानों से एकजुट होकर इस कार्रवाई का विरोध करने का आह्वान किया।

वंदे मातरम बिल पर सवाल

मानसून सत्र के दौरान केंद्र सरकार एक ऐसा विधेयक पेश करने की तैयारी में है जो राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के गायन के दौरान जानबूझकर अपमान करने या बाधा डालने को दंडनीय अपराध बनाएगा। इस पर रशीदी ने कहा कि जो सरकारें धर्म या आस्था से जुड़े मामलों पर इस तरह के बिल लाती हैं, उनके पास असल मुद्दों — महंगाई, बेरोज़गारी और शिक्षा — पर ध्यान देने का समय नहीं होता।

रशीदी ने आरोप लगाया कि यह बिल मुसलमानों को परेशान करने और उन्हें निशाना बनाने की जानबूझकर की गई कोशिश है। उन्होंने कहा कि पहले राष्ट्रगान से पहले वंदे मातरम गाने और खड़े होने की बात उठाई गई, और अब इस पर विधायी कदम उठाया जा रहा है।

व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब देश में धार्मिक बयानों को लेकर विवाद लगातार बढ़ रहे हैं। गौरतलब है कि रशीदी ने एक साथ तीन संवेदनशील मुद्दों — धार्मिक टिप्पणी, शैक्षणिक संस्था पर कार्रवाई और राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़ा विधेयक — पर अपना पक्ष रखा, जो इस्लामी नेतृत्व की ओर से एक असामान्य रूप से बहुआयामी प्रतिक्रिया है। आने वाले दिनों में संसद में वंदे मातरम विधेयक पर बहस और जौहर यूनिवर्सिटी मामले में न्यायिक या प्रशासनिक घटनाक्रम इस विमर्श को और आकार देंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिस पर व्यापक बहस होनी चाहिए।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना साजिद रशीदी ने भगवान कृष्ण पर विवादित टिप्पणी के बारे में क्या कहा?
रशीदी ने स्पष्ट कहा कि मौलाना जरजिस अंसारी का यह दावा — कि भगवान कृष्ण मुसलमान थे और नमाज पढ़ते थे — गलत है और दूसरों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाता है। उन्होंने कहा कि आस्था से जुड़ी ऐसी मान्यताएँ व्यक्तिगत दायरे में ही रहनी चाहिए।
जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर कार्रवाई क्यों हो रही है और रशीदी का क्या रुख है?
उत्तर प्रदेश में जौहर यूनिवर्सिटी पर सरकारी ज़मीन पर अतिक्रमण के आरोप में बुलडोजर कार्रवाई की गई है। रशीदी ने इसका विरोध करते हुए कहा कि यह शिक्षा का केंद्र है और डीएम को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।
वंदे मातरम बिल क्या है और इस पर रशीदी की क्या आपत्ति है?
मानसून सत्र में केंद्र सरकार एक विधेयक पेश करने वाली है जो 'वंदे मातरम' के गायन के दौरान जानबूझकर अपमान या बाधा को दंडनीय अपराध बनाएगा। रशीदी ने इसे मुसलमानों को निशाना बनाने की कोशिश बताया और कहा कि सरकार को महंगाई, बेरोज़गारी और शिक्षा पर ध्यान देना चाहिए।
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन क्या है?
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन भारत में मस्जिदों के इमामों का एक प्रमुख संगठन है, जिसके अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद साजिद रशीदी हैं। यह संगठन मुस्लिम समुदाय से जुड़े धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर सार्वजनिक रुख अपनाता है।
रशीदी ने हिंदू-मुस्लिम तनाव के संदर्भ में क्या कहा?
रशीदी ने कहा कि ऐसे समय में जब हिंदू-मुस्लिम नफरत चरम पर है, इस तरह के भड़काऊ बयानों से बचना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि मौलाना जरजिस के बयान को इसलिए अधिक तूल दिया जा रहा है क्योंकि वे मुसलमान हैं, जबकि दूसरे पक्ष के विवादित बयानों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
राष्ट्र प्रेस
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