भगवान कृष्ण पर विवादित टिप्पणी गलत — साजिद रशीदी; जौहर यूनिवर्सिटी कार्रवाई और वंदे मातरम बिल पर भी बोले
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना मोहम्मद साजिद रशीदी ने 17 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि मौलाना जरजिस अंसारी का यह दावा — कि भगवान श्रीकृष्ण एक मुसलमान थे जो दिन में पाँच बार नमाज पढ़ते थे — सर्वथा गलत है और दूसरों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाता है। इसके साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश में जौहर यूनिवर्सिटी के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई का विरोध किया और आरोप लगाया कि केंद्र सरकार वंदे मातरम जैसे मुद्दों के ज़रिए मुसलमानों को जानबूझकर निशाना बना रही है।
भगवान कृष्ण पर टिप्पणी: रशीदी ने क्या कहा
रशीदी ने कहा, 'यह बयान गलत है। किसी को भी दूसरों की धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुँचानी चाहिए।' उन्होंने स्वीकार किया कि इस्लामी मान्यता के अनुसार दुनिया में लगभग 1,24,000 पैगंबर या ईश्वर के संदेशवाहक आए, लेकिन उन्होंने जोड़ा कि यह आस्था व्यक्तिगत दायरे में रहनी चाहिए। उनके शब्दों में, 'यह कहना कि कोई खास व्यक्ति नमाज पढ़ता था या इस्लाम का प्रचार करता था — मेरी नज़र में ऐसी बात है जिससे किसी की आस्था को ठेस पहुँच सकती है।'
रशीदी ने यह भी कहा कि ऐसे वक्त में जब हिंदू-मुस्लिम तनाव चरम पर है, इस तरह के बयानों से बचना चाहिए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मौलाना जरजिस अंसारी के बयान को इसलिए अधिक तूल दिया जा रहा है क्योंकि वे मुसलमान हैं, जबकि इससे पहले हिंदू पक्ष के कुछ लोगों द्वारा 'सनातन को कैंसर और डेंगू-मलेरिया' कहे जाने पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।
जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर कार्रवाई का विरोध
उत्तर प्रदेश में जौहर यूनिवर्सिटी के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई पर रशीदी ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि यह यूनिवर्सिटी किसी एक व्यक्ति की संपत्ति नहीं है, बल्कि सभी वर्गों और धर्मों के लिए शिक्षा का केंद्र है। उनके अनुसार, 'शिक्षा के केंद्र पर बुलडोजर चलवाना बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।'
रशीदी ने माँग की कि जिलाधिकारी (डीएम) इस फैसले पर पुनर्विचार करें। उनका सुझाव था कि यदि यूनिवर्सिटी सरकारी ज़मीन पर बनी है, तो भी डीएम इसे अपने संरक्षण में लेकर चला सकते हैं — तोड़ना समाधान नहीं है। उन्होंने देश भर के मुसलमानों से एकजुट होकर इस कार्रवाई का विरोध करने का आह्वान किया।
वंदे मातरम बिल पर सवाल
मानसून सत्र के दौरान केंद्र सरकार एक ऐसा विधेयक पेश करने की तैयारी में है जो राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के गायन के दौरान जानबूझकर अपमान करने या बाधा डालने को दंडनीय अपराध बनाएगा। इस पर रशीदी ने कहा कि जो सरकारें धर्म या आस्था से जुड़े मामलों पर इस तरह के बिल लाती हैं, उनके पास असल मुद्दों — महंगाई, बेरोज़गारी और शिक्षा — पर ध्यान देने का समय नहीं होता।
रशीदी ने आरोप लगाया कि यह बिल मुसलमानों को परेशान करने और उन्हें निशाना बनाने की जानबूझकर की गई कोशिश है। उन्होंने कहा कि पहले राष्ट्रगान से पहले वंदे मातरम गाने और खड़े होने की बात उठाई गई, और अब इस पर विधायी कदम उठाया जा रहा है।
व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब देश में धार्मिक बयानों को लेकर विवाद लगातार बढ़ रहे हैं। गौरतलब है कि रशीदी ने एक साथ तीन संवेदनशील मुद्दों — धार्मिक टिप्पणी, शैक्षणिक संस्था पर कार्रवाई और राष्ट्रीय प्रतीकों से जुड़ा विधेयक — पर अपना पक्ष रखा, जो इस्लामी नेतृत्व की ओर से एक असामान्य रूप से बहुआयामी प्रतिक्रिया है। आने वाले दिनों में संसद में वंदे मातरम विधेयक पर बहस और जौहर यूनिवर्सिटी मामले में न्यायिक या प्रशासनिक घटनाक्रम इस विमर्श को और आकार देंगे।