2 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

स्लीमनाबाद टनल से 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को मिलेगी सिंचाई — CM मोहन यादव

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
स्लीमनाबाद टनल से 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को मिलेगी सिंचाई — CM मोहन यादव

सारांश

नर्मदा के पानी को विंध्य पर्वतमाला के आर-पार सोन नदी तक पहुँचाने वाली स्लीमनाबाद टनल अब लगभग तैयार है। 11.952 किलोमीटर लंबी यह सुरंग मध्यप्रदेश के 5 जिलों के 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को सींचेगी — बुंदेलखंड और बघेलखंड के लिए जल-संकट से मुक्ति का बड़ा दांव।

मुख्य बातें

स्लीमनाबाद टनल की लंबाई 11.952 किलोमीटर है और यह विंध्य पर्वतमाला के भीतर से गुज़रती है।
जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना जिलों के 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को स्थायी सिंचाई मिलेगी।
आगामी तीन माह में रबी फसल के लिए 1 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई जल उपलब्ध होने की उम्मीद।
2016 से जर्मनी की आधुनिक मशीन से खुदाई; 2015 तक केवल 1406 मीटर बोरिंग हुई थी।
टनल 100 वर्षों तक भूकंप-सुरक्षित; कई स्थानों पर गहराई 120 फीट तक।
नर्मदा बेसिन से गंगा बेसिन (सोन नदी) तक जल-प्रवाह — गुरुत्वाकर्षण आधारित अनूठी इंजीनियरिंग।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 17 जुलाई को स्लीमनाबाद टनल परियोजना का स्थलीय निरीक्षण किया और घोषणा की कि यह सुरंग विंध्य तथा महाकौशल क्षेत्र के पाँच जिलों के 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा प्रदान करेगी। 11.952 किलोमीटर लंबी यह परियोजना लगभग पूर्णता की कगार पर है और इसे बुंदेलखंड व बघेलखंड के लिए ऐतिहासिक कदम बताया जा रहा है।

परियोजना का विस्तार और लाभान्वित क्षेत्र

स्लीमनाबाद टनल से जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना जिलों के करीब 1450 गांवों को सीधा लाभ मिलेगा। टनल के अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम दोनों छोरों पर मिलाकर लगभग ढाई लाख हेक्टेयर सिंचाई का रकबा बढ़ने का अनुमान है। इसके अलावा, कई स्थानों पर इस परियोजना के माध्यम से बिजली उत्पादन भी किया जाएगा।

इंजीनियरिंग की विशेषताएँ

यह सुरंग विंध्य पर्वतमाला के भीतर से गुज़रती है और नर्मदा नदी के पानी को गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत पर सोन नदी के कछार तक पहुँचाएगी — यानी नर्मदा बेसिन से गंगा बेसिन की ओर जल-प्रवाह का अनूठा प्रयोग। कई स्थानों पर टनल की गहराई भूतल से 120 फीट तक है। मुख्यमंत्री यादव ने बताया कि वर्ष 2016 से जर्मनी से मँगाई गई आधुनिक मशीन द्वारा अपस्ट्रीम छोर से खुदाई की गई, जिससे निर्माण की गति में उल्लेखनीय तेज़ी आई। इससे पहले 2015 तक केवल 1406 मीटर टनल बोरिंग हो पाई थी। टनल के भीतर एक ओर नर्मदा का जल प्रवाहित होगा, तो ऊपर से कटनी नदी बहेगी।

किसानों और जनजीवन पर असर

मुख्यमंत्री यादव ने इसे किसान कल्याण वर्ष की सबसे बड़ी सौगातों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि आगामी तीन माह में रबी फसल के लिए किसानों को 1 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो जाएगा। इसके साथ ही पेयजल की दीर्घकालिक समस्या का भी समाधान होने की उम्मीद है। यादव ने कहा, 'विंध्य क्षेत्र हर प्रकार के संसाधनों से परिपूर्ण है, लेकिन कुछ स्थानों पर पानी की कमी की चुनौती सामने आती है। यह टनल उन जिलों के लिए अमृतधारा बनेगी।'

दीर्घकालिक महत्त्व

मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि लगभग 12 किलोमीटर लंबी यह परियोजना भविष्य में इंजीनियरिंग के क्षेत्र में केस स्टडी सिद्ध होगी। उनके अनुसार, भीषण भूकंप की स्थिति में भी यह टनल 100 वर्षों तक सुरक्षित रहेगी। यह परियोजना मध्यप्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़ाने के राज्य सरकार के संकल्प में निर्णायक भूमिका निभाएगी और बुंदेलखंड व बघेलखंड दोनों क्षेत्रों की जनता की दीर्घकालिक अपेक्षाओं को पूरा करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की समयसीमा और जल-वितरण की न्यायसंगतता होगी। नर्मदा से सोन बेसिन तक पानी मोड़ने की योजना दशकों पुरानी है — यह प्रश्न स्वाभाविक है कि 2015 में महज 1406 मीटर बोरिंग पर क्यों रुकी रही और 2016 के बाद जर्मन मशीन की ज़रूरत क्यों पड़ी। रबी फसल के लिए तीन माह में 1 लाख हेक्टेयर को पानी देने का वादा उत्साहजनक है, पर इसके लिए वितरण नेटवर्क और नहरों की तैयारी का स्वतंत्र सत्यापन ज़रूरी है — अन्यथा टनल बन जाने के बाद भी किसान प्यासे रह सकते हैं।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्लीमनाबाद टनल क्या है और यह कहाँ बन रही है?
स्लीमनाबाद टनल मध्यप्रदेश में विंध्य पर्वतमाला के भीतर से बनाई जा रही 11.952 किलोमीटर लंबी सुरंग है, जो नर्मदा नदी के पानी को गुरुत्वाकर्षण के आधार पर सोन नदी के कछार तक पहुँचाएगी। यह नर्मदा बेसिन से गंगा बेसिन की ओर जल-प्रवाह का अनूठा प्रयोग है।
इस टनल से कितने गांवों और कितनी ज़मीन को फायदा होगा?
स्लीमनाबाद टनल से जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना जिलों के करीब 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी। यह क्षेत्र बुंदेलखंड और बघेलखंड दोनों में फैला है।
किसानों को इस टनल से कब तक पानी मिलेगा?
मुख्यमंत्री मोहन यादव के अनुसार, आगामी तीन माह में रबी फसल के लिए 1 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध हो जाएगा। टनल लगभग पूर्णता की स्थिति में है।
स्लीमनाबाद टनल की इंजीनियरिंग विशेषताएँ क्या हैं?
यह टनल 2016 से जर्मनी से मँगाई गई आधुनिक मशीन द्वारा बनाई गई है। कई स्थानों पर इसकी गहराई भूतल से 120 फीट तक है और इसे भीषण भूकंप की स्थिति में भी 100 वर्षों तक सुरक्षित बताया गया है।
इस परियोजना में बिजली उत्पादन भी होगा क्या?
हाँ, मुख्यमंत्री यादव ने कहा है कि कई स्थानों पर इस टनल परियोजना के माध्यम से बिजली भी बनाई जाएगी। इससे सिंचाई के साथ-साथ ऊर्जा उत्पादन का भी लाभ मिलेगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले