ब्रिटिश स्टील राष्ट्रीयकरण: चीन ने जताया कड़ा विरोध, चिंगये के हितों की रक्षा का संकल्प
सारांश
मुख्य बातें
चीनी वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने 17 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि चीन ब्रिटिश सरकार के ब्रिटिश स्टील के राष्ट्रीयकरण के फैसले का कड़ा विरोध करता है और इस कदम से बेहद नाराज है। 16 जुलाई को ब्रिटेन ने चीन के चिंगये ग्रुप की अनुषंगी कंपनी ब्रिटिश स्टील के राष्ट्रीयकरण के लिए आवश्यक कानून पारित कर दिया था।
मुख्य घटनाक्रम
16 जुलाई को ब्रिटिश संसद ने वह विधेयक पारित किया जिसके तहत चिंगये ग्रुप की अधीनस्थ कंपनी ब्रिटिश स्टील को सरकारी नियंत्रण में लिया गया। ब्रिटेन की सरकार ने इस कदम को राष्ट्रीय सुरक्षा की आवश्यकता बताया। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिमी देशों में चीनी निवेश को लेकर जाँच-पड़ताल का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
चीन की आपत्तियाँ
चीनी वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि चिंगये द्वारा अधिग्रहण से पहले ब्रिटिश स्टील कई वर्षों से घाटे में चल रही थी। अधिग्रहण के बाद चिंगये ने कंपनी में पर्याप्त पूँजी निवेश की, जिससे उसका परिचालन जारी रहा और रोज़गार भी सुरक्षित रहे। प्रवक्ता के अनुसार, ब्रिटेन ने चिंगये के ब्रिटिश अर्थव्यवस्था और समाज में दिए गए योगदान को नज़रअंदाज़ करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर जबरन यह अधिग्रहण किया, जिससे चिंगये के वैध अधिकारों और हितों को गंभीर नुकसान पहुँचा है।
निवेशकों के भरोसे पर असर
प्रवक्ता ने आगे कहा कि इस फैसले से ब्रिटेन में निवेश को लेकर चीनी कंपनियों का भरोसा बुरी तरह टूटा है। गौरतलब है कि यह मामला केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है — आलोचकों का कहना है कि इस तरह के कदम यूरोप में चीनी पूँजी के प्रवाह को हतोत्साहित कर सकते हैं।
चीन की माँगें और आगे की कार्रवाई
चीन ने ब्रिटेन से अपील की है कि वह संबंधित अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करे और चीन-ब्रिटेन निवेश संरक्षण समझौते के तहत अपने दायित्वों को ईमानदारी से निभाए। साथ ही माँग की गई है कि ब्रिटेन में कार्यरत चीनी कंपनियों के साथ निष्पक्ष और न्यायसंगत व्यवहार किया जाए। प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि चीन इस मामले की आगे की प्रगति पर बारीकी से नज़र रखेगा, चीनी कंपनियों को कानूनी रास्ते अपनाने में सहायता करेगा और उनके हितों की रक्षा के लिए सख्त कदम उठाएगा।
क्या होगा आगे
यह विवाद चीन-ब्रिटेन व्यापार संबंधों में नए तनाव का संकेत है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि मामला निवेश संरक्षण समझौते के तहत अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता तक पहुँचता है, तो यह दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को और जटिल बना सकता है। फिलहाल चीनी पक्ष ने कानूनी कार्रवाई के विकल्प खुले रखे हैं।